नक्सल विरोधी अभियानों में CoBRA की भूमिका, अब संजुक्ता पराशर के नेतृत्व में नई जिम्मेदारी
CRPF की जांबाज CoBRA यूनिट को पहली बार एक महिला IG मिली हैं. नक्सल विरोधी अभियानों में 'कोबरा' का अहम योगदान रहा है. इस यूनिट ने आतंकवाद और नक्सलवाद को घुटनों पर लाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: CRPF की जांबाज CoBRA यूनिट को पहली बार एक महिला IG मिली हैं. नक्सल विरोधी अभियानों में ‘कोबरा’ का अहम योगदान रहा है. इस यूनिट ने आतंकवाद और नक्सलवाद को घुटनों पर लाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है.
CRPF की जांबाज कमांडो यूनिट CoBRA के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है. दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाली इस खास टुकड़ी की कमान अब एक महिला के हाथों में होगी. ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर 2006 बैच की तेजतर्रार IPS अधिकारी संजुक्ता पराशर को ‘कोबरा’ का नया इंस्पेक्टर जनरल (IG) नियुक्त किया गया है. वह इस बेहद चुनौतीपूर्ण और गौरवशाली पद को संभालने वाली देश की पहली महिला अधिकारी बन गई हैं. जंगलों में उग्रवाद का खात्मा करने का लंबा अनुभव रखने वाली संजुक्ता अब देश की आंतरिक सुरक्षा को एक नई धार देंगी.
क्या है CRPF की CoBRA यूनिट?
घने जंगलों की खाक छानने वाली संजुक्ता पराशर जिस CoBRA की चीफ बनी हैं, उसका नाम नहीं काम भी घातक है. संजुक्ता दानेश राणा की जगह लेंगी. ‘कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन’ एक किस्म का खास फोर्स है, जिसे गुरिल्ला और जंगल वॉरफेयर यानी जंगल में लड़ाई के ऑपरेशन करने के लिए बनाया गया है. इसे खास तौर पर माओवादी विद्रोह से निपटने के लिए तैयार किया गया है.
कोबरा कमांडो को इसलिए ‘जंगल वॉरियर्स’ भी कहा जाता है. CoBRA, CRPF के ढांचे का ही एक अहम हिस्सा है. कोबरा के जवानों को सीआरपीएफ से चुना जाता है. CoBRA की पहचान के मुख्य आधार हैं – साहस, जोश और देशभक्ति. एंटी-नक्सल ऑपरेशन के लिए कोबरा बटालियन में भेजे जाने से पहले इन जवानों को कमांडो टैक्टिक्स और जंगल वॉरफेयर की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है.
2008-09 में हुई थी शुरुआत
CRPF की जांबाज कमांडो यूनिट CoBRA की शुरुआत साल 2008-09 में हुई थी. 2008 से 2011 के बीच कुल 10 कोबरा यूनिट बनाई गईं. पूरी ट्रेनिंग के बाद इन सभी 10 बटालियनों को नक्सलवाद और विद्रोह प्रभावित इलाकों में तैनात किया गया. ये इलाके छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, असम और मेघालय जैसे राज्यों में फैले हैं.
कोबरा देश की एक प्रमुख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस यूनिट बन चुकी है. इसे कठिन जंगली इलाकों में टिके रहने, डटे रहने और जीत हासिल करने की बेहतरीन ट्रेनिंग दी जाती है. इसे देश की सबसे अच्छी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस यूनिट माना जाता है.
CoBRA को मिले ये पुरस्कार
इनकी बेमिसाल बहादुरी के लिए इस फोर्स को अब तक 05 कीर्ति चक्र, 25 शौर्य चक्र, 03 PPMG, और 362 पुलिस पदक जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा जा चुका है. इन खूंखार ऑपरेशन्स में देश की सुरक्षा करते हुए 78 जांबाज कमांडो और 03 जांबाज K9 (खोजी कुत्ते) वीरगति को प्राप्त हुए हैं.
05 कीर्ति चक्र
25 शौर्य चक्र
03 PPMG
362 पुलिस पदक
298 पराक्रम पदक
07 जीवन रक्षा पदक
13027 आंतरिक सुरक्षा पदक
5801 डीजी प्रशस्ति पदक
अब तक कुल 40,501 विशेष ऑपरेशन
सीआरपीएफ ने CoBRA यूनिट ने साल 2009 से अब तक कुल 40,501 विशेष ऑपरेशन चलाए हैं. देश के सबसे दुर्गम जंगलों में ‘जंगल वॉरियर्स’ के नाम से मशहूर इस यूनिट ने आतंकवाद और नक्सलवाद को घुटनों पर लाने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है.
इन अभियानों के दौरान CoBRA कमांडो ने 641 कट्टर नक्सलियों और उग्रवादियों को मार गिराया है. इन ऑपरेशन्स के दबाव में 4,002 संदिग्धों/नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 3,444 नक्सलियों ने अपने हथियार डालकर सरेंडर किया है.
जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाकर कमांडो ने 1,952 आधुनिक हथियार, 71396 राउंड कारतूस और नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए 9740 बम, IED और ग्रेनेड बरामद किए हैं. नक्सल मोर्चे पर मिली शानदार सफलता के बाद अब इन कमांडो को जम्मू-कश्मीर और मणिपुर के अशांत इलाकों में भी तैनात किया गया है.



