यूपीआई पर चार्ज समाज के साथ अन्याय

  • कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने की केंद्र से फैसला वापस लेने की मांग

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बेंगलुरू । कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनिंदा यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यूपीआई ट्रांज़ैक्शन के लिए बदले हुए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) फ्रेमवर्क का विरोध किया। उन्होंने इसे समाज के हर वर्ग के साथ बड़ी नाइंसाफी बताया और केंद्र से इस फैसले को वापस लेने की अपील की। टांज़ैक्शन चार्ज पर शिवकुमार ने कहा कि मर्चेंट और व्यापारी संभवत: यह अतिरिक्त खर्च ग्राहकों पर डालेंगे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, यह समाज के हर वर्ग के साथ बड़ी नाइंसाफी है। व्यापारी स्वाभाविक रूप से यह खर्च आम आदमी पर डालेंगे। जनता पर ये चार्ज डालने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
हम पुरज़ोर अपील करते हैं कि इस फैसले को वापस लिया जाए। रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने भी बदले हुए फ्रेमवर्क का विरोध करते हुए कहा कि इस लेवी (शुल्क) का बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा। प्रेमाचंद्रन ने बताया ट्रांज़ैक्शन पर लेवी लगाने से आखिरकार आम लोगों, खासकर ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार का तर्क है कि यह चार्ज दुकानदारों या व्यापारियों को देना होगा। हालांकि, इस बात की संभावना कम है कि व्यापारी खुद यह खर्च उठाएंगे। इसके बजाय, इसका बोझ सीधे ग्राहकों पर डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि 2हजार रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत लेवी (अधिकतम चार्ज 300 रुपये) से ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ेगा और उन्होंने मांग की कि इस फैसले की समीक्षा की जाए और इसे वापस लिया जाए। उन्होंने कहा 2,000 रुपये से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की लेवी (अधिकतम चार्ज 300 रुपये प्रति माह) से ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ेगा। इसीलिए हम मांग कर रहे हैं कि इस फैसले की समीक्षा की जाए और इसे वापस लिया जाए। एक तरफ, भारत सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है और लोगों को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढऩे के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

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