बिहार में नाबालिग के साथ अभद्रता पर बवाल

राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर उठा सवाल

जमुई वायरल वीडियो पर पुलिस का एक्शन, तीन आरोपी पकड़े गए
राजद-कांग्रेस ने कार्रवाई की मांग की

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
जमुई । बिहार के जमुई में नाबालिग लडक़ा-लडक़ी को रास्ते में रोककर लडक़ी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और छेडख़ानी किए जाने का वीडियो सामने आने के बाद से राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर सवालिया निशान लगने लगे है। विपक्ष ने इसकों लेकर एनडीए सरकार पर हमला किया है। कांग्रेस व राजद ने सम्राट सरकार को घेरा है। हालांकि पुलिस ने भी कार्रवाई तेज कर दी है।
पुलिस के मुताबिक घटना 19 सितंबर की शाम की है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने उसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान शुरू की और पीडि़तों तक पहुंचकर उनका बयान दर्ज किया। पुलिस ने मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घटना को लेकर बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं और वीडियो में दिख रहे सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ पॉक्सो के तहत कार्रवाई की मांग की है।
घटना जमुई टाउन थाना क्षेत्र के मड़वा गांव इलाके की बताई जा रही है। वायरल वीडियो में बाइक सवार नाबालिग युवक और युवती को कुछ लोग रोकते और घेरते नजर आ रहे हैं। वीडियो में युवती हाथ जोडक़र लोगों से उन्हें जाने देने की अपील करती दिखाई दे रही है। वह कहती सुनाई दे रही है, बच्चा हैं, जाने दीजिए। अब कभी नहीं आएंगे।

तीन युवकों को गिरफ्तार करने का दावा

जमुई पुलिस की टीम ने मामले में छापेमारी कर तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान मड़वा गांव निवासी मिथिलेश, प्रमोद और गोलू के रूप में बताई गई है। तीनों की उम्र करीब 24 से 26 वर्ष के बीच बताई जा रही है।पुलिस अब वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले में सामने आए सभी तथ्यों और पीडि़त के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि वीडियो में नजर आ रहे अन्य लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है।

वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस ने शुरू की जांच

वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। पुलिस ने वीडियो को आधार बनाकर जांच शुरू की। जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने बताया कि पुलिस को वीडियो मिला था। इसके बाद वीडियो के आधार पर पीडि़ता की पहचान की गई और उसका बयान दर्ज किया गया। एसपी के मुताबिक, शुरुआती जांच में घटना 19 सितंबर की शाम करीब सात बजे की सामने आई है। वीडियो में छह-सात लोग दिखाई दे रहे हैं और इनमें से कुछ की पहचान कर ली गई है।

पीडि़ता का बयान दर्ज

एसपी विश्वजीत दयाल के मुताबिक, शुरुआत में पुलिस के पास घटना को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं आई थी। वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने खुद मामले का संज्ञान लिया और वीडियो के आधार पर पीडि़ता तक पहुंची। उसका बयान दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि घटना के दौरान वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे और किसकी क्या भूमिका थी। मामले में वायरल वीडियो को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है।

हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए : राहुल

वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे बेहद परेशान करने वाला वीडियो बताया। राहुल गांधी ने कहा कि दो 1०वीं कक्षा के छात्रों को रास्ते में रोका गया और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट, उत्पीडऩ और लडक़ी के साथ छेड़छाड़ की गई। राहुल गांधी ने कहा कि वीडियो में लडक़ी हाथ जोडक़र जाने देने की गुहार लगाती दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इन लोगों को इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसने दिया। राहुल गांधी ने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहे हर व्यक्ति की पहचान की जानी चाहिए और आरोपियों के खिलाफ पॉक्सो के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर घटना 19 सितंबर की है तो आरोपियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने बिहार सरकार से भी सवाल किया कि शाम करीब सात बजे सार्वजनिक सडक़ पर एक लडक़ी की सुरक्षा को लेकर ऐसी स्थिति क्यों बनी। राहुल गांधी ने अपने बयान में इस घटना को महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

घटना राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बयां कर रही : शक्ति सिंह यादव

घटना का वीडियो सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि यह घटना राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

कानून तोडऩे वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : भाजपा

वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया कि सरकार सुशासन के सिद्धांत पर काम कर रही है और कानून तोडऩे वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान के बाद कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की ओर से अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही गई है, जबकि वीडियो में दिखाई दे रहे अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी होगी जरूरी, पुलिस को बताना होगा कारण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाया। इसमें आरोपी की दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया को साफ किया गया, क्योंकि पिछली गिरफ्तारी को इसलिए गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया था क्योंकि उसमें गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत जरूरी है।
जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने यह तय किया कि आर्टिकल 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किए गए व्यक्ति को दोबारा गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने एक अर्जी देनी होगी और मजिस्ट्रेट की मंजूरी लेनी होगी। यह अर्जी तभी दी जा सकती है जब आरोपी को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में दे दिए जाएं। साथ ही अर्जी पर उस पुलिस अधिकारी के तुरंत ऊपर के अधिकारी की मंजूरी भी होनी चाहिए जिसने पहली बार गिरफ्तारी की थी।
आवेदन में इस बात का भी कारण बताया जाना चाहिए कि गिरफ्तारी के आधार शुरू में क्यों नहीं बताए गए थे। बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन करके पहली गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। जस्टिस भुइयां ने कहा, एक बार जब अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन हो जाता है तो दोबारा गिरफ्तारी का अधिकार उसी अधिकारी की मर्जी पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए जिसने संविधान के प्रावधान का उल्लंघन किया है। इसे न्यायिक तरीके से लागू किया जाना चाहिए। इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया कि मजिस्ट्रेट को इस अर्जी पर जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए और एजेंसी को जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंप देनी चाहिए।
जस्टिस भुयन ने कहा, जब मजिस्ट्रेट इस बात से संतुष्ट हो जाए कि सही वजहों से गिरफ्तारी के आधार शुरू में गिरफ्तार व्यक्ति को नहीं बताए जा सके थे लेकिन बाद में बताए गए और साथ ही इस बात से भी संतुष्ट हो कि आरोपी को दोबारा गिरफ्तार करने की जरूरत है, तभी वह जांच एजेंसी को दोबारा गिरफ्तारी की इजाजत देने का आदेश दे सकता है।
उन्होंने आगे कहा, प्रशासनिक स्तर पर जब किसी ऐसे आरोपी की कस्टडी के लिए मंजूरी मांगने वाली अर्जी सीनियर अधिकारी के सामने पेश की जाए जिसे आर्टिकल 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किया गया था तो वह अधिकारी मामले की जांच किसी दूसरे अफसर को सौंप देगा और साथ ही इतनी गंभीर चूक के लिए विभागीय जांच का आदेश भी देगा। अगर जांच में दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल नतीजा निकलता है तो ऐसे अधिकारी के सर्विस बुक में एंट्री के साथ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

वोटर लिस्ट से जुड़े मामले में बड़ा मोड़

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सोनिया गांधी मतदाता सूची मामले में विशेष न्यायाधीश ने उस पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया है, जो भारतीय नागरिक बनने से पहले कांग्रेस नेता सोनीया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने से जुड़ी शिकायत में मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।
सत्र अदालत ने 025 में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया है। मामले को नए सिरे से सुनवाई और कारण स्पष्ट करने वाला आदेश पारित करने के लिए वापस भेज दिया गया है। मजिस्ट्रेट अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया था।
सत्र अदालत ने कहा कि शिकायत को एक अप्रमाणित रिकॉर्ड की फोटोकॉपी के आधार पर महज एक तथ्यात्मक दावा मानकर खारिज किया गया था। अदालत ने कहा कि यह आदेश रद्द किए जाने योग्य है। सत्र अदालत ने नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर क्षेत्राधिकार के संबंध में मजिस्ट्रेट अदालत की टिप्पणी को गलत पाया। सत्र अदालत ने कहा कि चुनौती दिए गए आदेश में इस बात पर कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है कि क्या संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है या नहीं। सत्र अदालत ने कहा कि नागरिकता के संबंध में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को लेकर की गई टिप्पणियां उचित नहीं थीं। मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया गया है और इसे 29 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है।

बिहार के भागलपुर के अजगैवीनाथ धाम में बड़ा हादसा

बाढ़ के पानी में नहाने गईं 6 बच्चियों की डूबने से मौत

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बिहार (भागलपुर)। बिहार के भागलपुर जिले के अजगैवीनाथ धाम प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर बहियार में मंगलवार की सुबह हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। लोक आस्था के कर्मा-धर्मा पर्व के पावन अवसर पर बहियार स्थित जलमग्न खेत में स्नान करने गए छह बच्चों की गहरे पानी में डूबने से अकाल मौत हो गई।
एक साथ छह घरों के चिराग बुझने से बिष्णु टोला सहित आसपास के समूचे ग्रामीण क्षेत्र में चीत्कार मच गया और मातम पसर गया है। मृतकों की पहचान नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27, बिष्णु टोला निवासी पूरन मंडल की पुत्री पूजा कुमारी (13 वर्ष), राहुल कुमार (14 वर्ष), रंजन कुमार के पुत्र विकास कुमार (13 वर्ष), विनोद मंडल के पुत्र आयुष कुमार (12 वर्ष), वाल्मीकि मंडल की पुत्री मीनाक्षी कुमारी मिनकी (12 वर्ष) तथा रंचडीदीपुर निवासी धनंजय मंडल की पुत्री ज्योति कुमारी (14 वर्ष) के रूप में हुई है।
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्मा-धर्मा पर्व को लेकर बच्चे सुबह पूजा की तैयारी और पवित्र स्नान के लिए नारायणपुर बहियार की ओर गए थे। गंगा के बढ़े जलस्तर और हालिया बारिश के चलते बहियार के खेतों में काफी गहरा पानी जमा था।

सीएम आवास के पास टावर पर चढ़ी पीड़ित महिला

सुनवाई न होने से है आहत, पुलिस-दमकल टीम ने संभाला मोर्चा, काफी मशक्कत के बाद सुरक्षित उतारा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री आवास के नजदीक उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आगरा की रहने वाली एक महिला पार्क रोड के पास स्थित ऊंचे टावर पर चढ़ गई। महिला के टावर पर चढऩे की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।
जानकारी के मुताबिक, महिला का आरोप है कि उसके पड़ोसी ने उसके प्लॉट पर कब्जा कर रखा है। महिला का कहना है कि जमीन से जुड़े मामले को लेकर उसने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन शिकायत के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए महिला आगरा से लखनऊ पहुंची और मुख्यमंत्री आवास के नजदीक टावर पर चढ़ गई। हालांकि, जमीन विवाद और प्लॉट पर कब्जे से जुड़े आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर अभी पुष्टि नहीं हुई है।महिला के टावर पर चढऩे की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की टीम को भी बुलाया गया। अधिकारियों ने महिला से बातचीत कर उसे नीचे उतरने के लिए समझाया। पुलिस ने उसकी शिकायत और टावर पर चढऩे की वजह के संबंध में जानकारी जुटाई। महिला को टावर पर चढ़ा देखकर मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने आसपास मौजूद लोगों को दूर किया, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की परेशानी न हो। काफी मशक्कत और समझाने के बाद महिला को टावर से सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। पुलिस ने महिला से पूरे मामले की जानकारी ली है। अब उसके द्वारा लगाए गए प्लॉट पर कब्जे और शिकायत पर सुनवाई नहीं होने के आरोपों की जांच की जा रही है।

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