राहुल की भविष्यवाणी हुई सच, गुजरात से राजस्थान तक BJP का सूपड़ा साफ!
गुजरात के दो सबसे ताकतवर किलों...बारडोली शुगर फैक्ट्री और धोलका APMC मंडी के चुनाव नतीजे जैसे ही घोषित हुए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः क्या बीजेपी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है?…और क्या अब वही होने लगा है जिसका भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा डर था…एक तरफ जहां संसद के अंदर राहुल गांधी ने गरजते हुए ऐलान किया था कि केंद्र की मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है…तो वहीं दूसरी तरफ अब बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ गुजरात से लेकर राजस्थान तक PM मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने सबसे भारी संकट खड़ा हो गया है…तो आज की अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे एक के बाद एक आए चुनावी नतीजों ने दिल्ली के गलियारों से लेकर गांधीनगर और जयपुर तक हड़कंप मचा दिया है…लेकिन इस पूरे सियासी खेल को समझने से पहले आप ये बड़ी खबर देखिए…
तो ताजा और चौंकाने वाली खबर गुजरात के सहकारिता क्षेत्र से निकलकर सामने आई है…जिसने बीजेपी आलाकमान की रातों की नींद पूरी तरह उड़ा दी है…खबर में साफ-साफ लिखा है…बगावत और करारी चुनावी हार के बीच गुजरात के चीनी कारखानों पर बीजेपी का दशकों पुराना दबदबा टूट चुका है…आपको बता दें कि गुजरात की शक्तिशाली चीनी सहकारी समितियों पर बीजेपी की सालों पुरानी पकड़ ढीली पड़ गई है…सबसे बड़ा झटका बारडोली में लगा है…जहां पिछले 20 सालों से चला आ रहा बीजेपी का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह बिखर गया…पार्टी के अपने ही बागियों ने आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया और नतीजे ऐसे आए जिसने हर किसी को हैरान कर दिया…
बता दें कि गुजरात के दो सबसे ताकतवर किलों…बारडोली शुगर फैक्ट्री और धोलका APMC मंडी के चुनाव नतीजे जैसे ही घोषित हुए…बीजेपी का पूरा का पूरा सूपड़ा साफ हो गया और कांग्रेस समर्थित किसान पैनलों ने ऐतिहासिक और एकतरफा कब्जा जमाते हुए बीजेपी को शून्य पर समेट दिया…बारडोली की सड़कों पर सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ किसानों ने जो विजय जुलूस निकाला…उसने साफ संदेश दे दिया कि गुजरात के ग्रामीण इलाकों में अब बदलाव की भीषण आंधी चल पड़ी है…लेकिन असली खेल तो इस हार के पीछे छिपा है…जिसे समझना आपके लिए बेहद जरूरी है…
आपको बता दें कि गुजरात का कोऑपरेटिव सेक्टर सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं है…बल्कि ये राज्य की राजनीति की असली रीढ़ की हड्डी माना जाता है…इसी सहकारिता साम्राज्य के दम पर बीजेपी पिछले तीन दशकों से गुजरात पर राज करती आई है…लेकिन जब से देश के गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय का कार्यभार संभाला है…तब से ये चुनाव सीधे मोदी और शाह की साख से जुड़ गया था…ऐसे में अमित शाह के अपने ही गृह राज्य और गढ़ में बीजेपी का इस तरह पूरी तरह साफ हो जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है…
क्योंकि, 1955 में बनी ऐतिहासिक बारडोली शुगर फैक्ट्री में 5,600 से ज्यादा किसान सदस्य हैं और 21 मेगावाट का पावर प्लांट है…सालों से यहां बीजेपी का कब्जा था…लेकिन इस बार कांग्रेस समर्थित किसान परिवर्तन पैनल ने सभी 14 सीटों पर कब्जा करके बीजेपी के किले को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया…इसके तुरंत बाद अहमदाबाद की धोलका मंडी (APMC) के चुनाव हुए…जहां पिछले 30 सालों से बीजेपी राज कर रही थी…लेकिन जब नतीजे आए…तो बीजेपी नेताओं के पैरों तले जमीन खिसक गई…कांग्रेस समर्थित किसान विकास पैनल ने सभी 10 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और जिला बीजेपी के कद्दावर महासचिव देवेश पटेल खुद अपनी सीट तक नहीं बचा सके…और इस करारी हार के बाद बीजेपी के अंदर लीपापोती का खेल शुरू हो चुका है…हार से बौखलाए नेताओं का तर्क है कि ये चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे…इसलिए वो हार गए…अगर EVM से होते तो बीजेपी ही जीतती…जोकि एक बार फिर से EVM पर उठने वाले सवालों को ताजा करते हैं…
लेकिन दोस्तों, बीजेपी के लिए ये मुसीबत सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं रही…गुजरात में सहकारिता का किला ढहने के साथ ही राजस्थान से भी ऐसी खबरें सामने आ रही हैं….जिसने अमित शाह की चुनावी चाणक्य नीति पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं…निकाय चुनावों के नतीजों ने राजस्थान की सियासत में भूचाल ला दिया है…वहां कई ऐसे इलाकों से कांग्रेस और अन्य दलों के पक्ष में चौंकाने वाले नतीजे आए हैं…जिन्हें बीजेपी का सबसे मजबूत किला माना जाता था…एक तरफ जहां खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अमित शाह ने प्रचार में पूरी ताकत झोंकी…वहीं नतीजों ने पूरी पार्टी की नींद उड़ा दी है…
राजस्थान के इन निकाय चुनावों में सबसे हैरान करने वाला नतीजा तो तब सामने आया…जब पर्वतसर नगर पालिका के वार्ड नंबर 13 से बीजेपी उम्मीदवार कैलाश चंद्र को कथित तौर पर सिर्फ 1 वोट मिला…यानी करोड़ों रुपए का चुनावी अभियान, बड़े-बड़े नेताओं के भाषण और पूरी सरकारी मशीनरी के बावजूद बीजेपी उम्मीदवार को मिला वोट सिर्फ उनके खुद के वोट के बराबर था…हद तो तब हो गई जब नोटा (NOTA) को भी 1 वोट मिला…मतलब एक तरफ बड़े-बड़े दावे और दूसरी तरफ उम्मीदवार को सिर्फ 1 वोट मिलना बीजेपी के लिए किसी बहुत बड़े झटके से कम नहीं है…



