मेधा रूपम की याचिका पर SC का फैसला सुरक्षित, HC के आदेश के खिलाफ पहुंची थीं कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया. याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोएडा की डीएम मेधा रूपम की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया. याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आकृति चौधरी NSA केस में नोएडा की DM मेधा रूपम की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया. याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है.
हाई कोर्ट ने कहा था कि आकृति चौधरी को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए यह रकम नोएडा डीएम की सैलरी से वसूली जाए. मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की बेंच कर रही है.
दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा आकृति चौधरी को NSA एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गैर-कानूनी करार दिया था. इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई की बेंच को बताया था कि डीएम हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी.
यूपी सरकार की ओर पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश पूरी तरह से गैर-जरूरी है. यह हिरासत में ली गई महिला पहले मानेसर में गड़बड़ी फैला रही थीं.
मुकुल रोहतगी ने दी थी ये दलीलें
रोहतगी ने कहा कि वह फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों को इकट्ठा करती हैं और उन्हें विरोध-प्रदर्शन के लिए उकसाती हैं फिर यह मामला नोएडा पहुंच जाता है, सड़कें जाम की जाती हैं, फैक्ट्रियां जलाई जाती हैं, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं होती हैं, उसे 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया जाता है. NSA के तहत हिरासत का प्रस्ताव SHO स्तर से आगे बढ़ाया जाना होता है. आखिरकार डीएम आदेश जारी करते हैं.
इसे एक जज की अध्यक्षता वाली सलाहकार समिति द्वारा मंजूरी दी जानी होती है, फिर राज्य और केंद्र सरकार इसकी पुष्टि करती हैं. वह इस पूरी प्रक्रिया की एक कड़ी मात्र है, हाई कोर्ट आदेश की ठीक से जांच नहीं करता. वह इस नतीजे पर पहुंचता है कि चूंकि वह 11 तारीख की शाम से अपने व्हाट्सएप मैसेज का जवाब नहीं दे रही थी इसलिए उसे 11 तारीख को ही गिरफ्तार कर लिया गया था.
हिरासत का आदेश एक महीने बाद जारी किया गया. यहां कानून की पूरी तरह से गलत व्याख्या की गई है. रोहतगी ने कहा कि गिरफ्तारी के एक महीने बाद आदेश जारी किया गया. हाई कोर्ट को इसका स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना चाहिए था. मुझे नहीं लगता कि इससे बेहतर तरीके से सोच-विचार किया जा सकता था.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, स्टूडेंट-एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 के नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन पर NSA लगाया गया और वह करीब पांच महीने हिरासत में रहीं. इलाहाबाद हाई कोर्ट को NSA लगाने के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री नहीं मिली. कोर्ट ने हिरासत को रद्द कर डीएम को अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया.
आकृति चौधरी अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस और प्रशासन की तरफ से उन पर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने जैसे आरोप लगाए गए.
इसके बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया. मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने हिरासत के आधार और प्रशासन की ओर से पेश सामग्री की जांच की.



