चुनाव आयुक्तों की अनदेखी की रिपोर्ट आने के बाद देश भर में सियासी बवंडर
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त का मांगा इस्तीफा

- कांग्रेस, सपा, आप, शिवसेना यूबीटी समेत सभी दलों ने भाजपा को घेरा
- दोनों चुनाव आयुक्त बोले- हमारी नहीं सुनी जाती
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एक अंग्रेजी अखबार में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने फैसले लेने में मनमानी करने और उनकी आपत्तियों की अनदेखी करने का आरोप लगाने की खबर आने केबाद पूरे देश में सियासी बवंडर मच गया। पूरे विपक्ष ने चुनावव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर करारा प्रहार किया है। बता दें इस रिपोर्ट चुनाव आयोग द्वारा देश भर में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा-एसआईआर अभियान के बीच नया विवाद सामने आया है। खुलासा हुआ है कि चुनाव आयुक्त डॉ। सुखबीर सिंह संधू और डॉ। विवेक जोशी ने 1० महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराई थीं। दोनों ने नए वोटरों को जोडऩे और नाम डिलीट करने के मामले में उन्हें अंधेरे में रखने का सवाल भी उठाया था।
इस खुलासे पर कांग्रेस, शिवसेना, सपा, आप समेत कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है। एसआईआर की प्रक्रिया जून 25 से बिहार से शुरू हुई थी और अब सभी तीनों चुनाव आयुक्तों की अगुवाई में देश भर में वोटर लिस्ट की गहन समीक्षा चल रही है। एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने औपचारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई। दस महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, इसमें एक बार तो एक दिन में ही चार बार सवाल उठाया गया। चुनाव आयुक्तों का कहना है कि जो फैसले लिए जा रहे हैं और आदेश दिए जा रहे हैं, उसमें उन्हें संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है। भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसी में फैसले लेने का अधिकार तीन अधिकारियों के पास है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं। चुनाव आयोग के फैसलों में मतभेदों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं सीईसी ने इन सभी आरोपों का जवाब देते हुए बताया कि मतभेदों के बाद भी फैसला तब लिया जाता है, जब चुनाव आयुक्तों के बीच सर्वसम्मति होती है।
क्या कोई अदृश्य ताकत ईसी को चला रही : मनीष
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी का कहना है कि अगर रिपोर्ट में बताई गई बातें सही हैं तो ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग को कोई अदृश्य ताकत चला रही हैं। अगर नियमों का पालन नहीं किया गया और ऐसे फैसले लिए गए जो सर्वसम्मति या बहुमत से नहीं थे, तो चुनाव आयोग के सभी फैसले मनमाने और बिना किसी ठोस आधार के माने जाएंगे, भले ही वे पूरी तरह से गैर-कानूनी न हों। शायद यह मामला महाभियोग की कार्यवाही पर गंभीरता से विचार करने लायक है, लेकिन इससे भी जरूरी बुनियादी सवाल यह है कि चुनाव आयोग की साख को आखिर कैसे बहाल किया जाएगा। बता दें दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची में नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन, वोटर्स के नाम डिलीट करने और उनके नाम दोबारा जुडऩे से संबंधित हैं. एसआईआर के दौरान वोटरों के नाम बहाल करने, अपील फाइल करने के साथ पूरी मतदाता सूची की सुरक्षा से जुड़े मामले भी इसमें हैं. इन सारी आपत्तियों की प्रति मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी. एक लिखित आपत्ति में संधू ने शिकायत दर्ज कराई कि चुनाव आयोग ने दो आयुक्तों की लिखित सलाह के बाहर जाकर काम किया और उनकी कार्यवाही को अनधिकृत और गैरकानूनी करार दिया था।
चुनाव आयुक्त को जेल जाना होगा : संजय राउत
शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे! उन्हें जाना ही होगा! उनके आका देश छोडक़र भाग जाएंगे! चुनाव आयोग से जुड़े खुलासे पर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है. प्रमोद तिवारी की मांग है कि दोनों चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच के पत्राचार को सार्वजनिक किया जाए. प्रमोद तिवारी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त बीजेपी से मिले हुए हैं. संसद में ये मुद्दा उठाया जाएगा, ये लोकतंत्र के हत्यारे हैं। वहीं इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की साख पर सवाल उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टीके अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है। अखिलेश ने ट्वीट किया, अगर किसी स्वतंत्र संस्था के सदस्यों को निष्पक्ष रूप से काम करने की आज़ादी नहीं है या उनकी चिंताओं को नहीं सुना जाता है, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक और चिंताजनक स्थिति है।
भाजपा संगठन की तरह काम कर रहा है आयोग : दिग्विजय
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग-एसआईआर विवाद पर न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि जब से ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है, तब से चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के एक संगठन की तरह काम कर रहा है. यह सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि देश के हर नागरिक को वोट देने का अधिकार मिले।
कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता : केजरीवाल
चुनाव आयोग को लेकर खुलासे पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता है। दिल्ली, हरियाणा के चुनाव कैंसिल किए जाएं। चुनाव आयोग के विवाद पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि हम पहले दिन से ही कह रहे हैं कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (ण्सआईआर एक धोखाधड़ी वाली प्रक्रिया है जिसे भाजपा के कहने पर ज्ञानेश कुमार चला रहे हैं। अब यह बात सच साबित हो गई है. ज्ञानेश कुमार ने जान-बूझकर वोट हटाने का अपराध किया है। उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए. जहां-जहां भी ये धोखाधड़ी हुई है, उन सभी चुनावों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

तंत्र और यंत्र से चुनाव हराया गया : तेजस्वी यादव
- चुनाव आयोग बना फर्जीवाड़े का अड्डा : पीके
तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 27 जून 25 को बिहार चुनाव से चंद दिन पहले एकपक्षीय दोषपूर्ण एसआईआर शुरू करने पर हमने सबसे पहले देश को आगाह किया था। 15 से अधिक बार सबूतों के साथ एसआईआर प्र्रक्रिया पर परजेंटशन देकर जनता और मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था वोट चोरी को उजागर करने के लिए सबसे पहे बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली। आरजेडी नेता ने कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो आयुक्तों ने 1० महीनों में 14 बार चुनाव आयोग के निर्णयों व नीतियों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, यहां तक की एक दिन में 4 बार आपत्तियां दर्ज करा इनके निर्णयों को अनधिकृत और अवैध बताया लेकिन बहुमत को दरकिनार करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जबरन मनमानी की ताकि बीजेपी को फायदा पहुंचे। बिना किसी का नाम लिए लिखा, दो शीर्ष लोगों के अनैतिक, अवैधानिक कुकृत्यों एवं निर्देशों की पालना कर लोकतंत्र और संविधान खत्म करने पर आमादा ज्ञानेश कुमार को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें विश्वास दिलाया गया है उन्हें बचा लिया जाएगा। वहीं प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने चुनाव आयोग को फर्जीवाड़े का अड्डा बताया है। जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह की ओर से यह बयान इंडियन एक्सप्रेस की एसआईआर को लेकर जारी एक रिपोर्ट के बाद आया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग अधिकार को छीन रहा है। कुमार सौरभ सिंह ने बुधवार को अपने एक्स हैंडल से पोस्ट करते हुए लिखा, चुनाव आयोग फर्जीवाड़ा का अड्डा बन गया है। संवैधानिक मूल्यों को ताक पर रख सत्ता में शीर्ष पर बैठे लोगों के इशारे पर भारत के लोकत को पूरी तरह से कुचलने का कार्य किया जा रहा है।
शर्मनाक! ओडि़शा में बिहार के जमुई जैसी हुई बर्बरता
- सड़क पर जा रहे जोड़े को ग्रामीणों ने घेरा, युवती की मिन्नतों के बाद भी बदसलूकी व मारपीट
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कटक। घटना 18 सितंबर को ढेंकनाल और कपिलाश को जोडऩे वाली सडक़ पर हुई और इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह घटना बिहार के जमुई में हुई ऐसी ही एक घटना के कुछ दिनों बाद सामने आई है, जहाँ एक छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी, जिससे काफी आक्रोश फैल गया था। ओडिशा के ढेंकनाल से एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहांएक युवक और युवती को मुख्य सडक़ पर रोककर ग्रामीणों के एक समूह ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। यह घटना 18 सितंबर को ढेंकनाल और कपिलाश को जोडऩे वाली सडक़ पर हुई और इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
यह घटना बिहार के जमुई में हुई ऐसी ही एक घटना के कुछ दिनों बाद सामने आई है, जहां एक छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई थी, जिससे काफी आक्रोश फैल गया था।जानकारी के अनुसार, युवक और युवती मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें सडक़ पर रोक लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में लोगों का एक समूह जोड़े को घेरे हुए और उनके साथ मारपीट व बदसलूकी करता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में महिला को उन लोगों से बार-बार विनती करते हुए सुना जा सकता है कि वे उसे छोड़ दें और जाने दें।
फेसबुक और एक्स पर एंटी नेशनल कंटेंट हटाने की मांग खारिज
- सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक पीआईएल पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसमें केंद्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट और मीम्स की पहचान करने, उन्हें हटाने और ब्लॉक करने के निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन्हें याचिकाकर्ता ने देश-विरोधी नारे और भाषण बताया था। चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच ने अहमदाबाद के रहने वाले याचिकाकर्ता हितेंद्र कुमार परसोत्तमभाई गाधिया की ओर से पेश वकील बरुण सिन्हा की दलीलों को नहीं माना।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा। सुनवाई के दौरान, बेंच ने इस याचिका को सोशल मीडिया कंटेंट से जुड़े किसी दूसरे लंबित मामले के साथ जोडऩे से भी इनकार कर दिया। कोर्ट में दी गई दलीलों के मुताबिक, चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत ने याचिकाकर्ता से कहा आप दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। याचिका में केंद्र और कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को उन पोस्ट के खिलाफ़ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और न्यायिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं।
याचिका में सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने की की गई मांग
याचिकाकर्ता ने रिट ऑफ़ मैंडमस (अदालत का आदेश) की मांग की, जिसमें प्रतिवादियों को पब्लिश सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक करने या हटाने का निर्देश देने को कहा गया। याचिका के अनुसार, जिन पोस्ट को हटाने की मांग की गई, वे ऐसी थीं जिनसे जनता को सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय अखंडता और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ भडक़ाने और संवैधानिक अधिकारियों के अधिकार को कमजोर करने की आशंका थी।याचिका में ऐसे कंटेंट और मीम्स का भी ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में याचिकाकर्ता का आरोप था कि वे राष्ट्र-विरोधी नारों और भाषणों से जुड़े थे।



