पंचायत चुनाव की तैयारी में रविंद्र भाटी, राजस्थान में 5 दिन की यात्रा का ऐलान

राजस्थान में EWS आरक्षण के नियमों में बदलाव और सरलीकरण की मांग को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी आज से 5 दिन की पदयात्रा शुरू करेंगे. बाड़मेर से शुरू होने वाली यह यात्रा जोधपुर में खत्म होगी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राजस्थान में EWS आरक्षण के नियमों में बदलाव और सरलीकरण की मांग को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी आज से 5 दिन की पदयात्रा शुरू करेंगे. बाड़मेर से शुरू होने वाली यह यात्रा जोधपुर में खत्म होगी.

राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण के नियमों में बदलाव की मांग उठ रही है. शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आज से पांच दिवसीय पदयात्रा शुरू करने जा रहे हैं. भाटी की यह यात्रा आज यानी 25 सितंबर से बाड़मेर के आलोक आश्रम से शुरू होकर पश्चिमी राजस्थान के अलग-अलग इलाकों से गुजरते हुए जोधपुर में समाप्त होगी.

रविंद्र भाटी ने इसका नाम “सरलीकरण यात्रा” रखा है, जिसके तहत वो बाड़मेर से जोधपुर तक हर गांव में पैदल यात्रा करेंगे. भाटी केंद्र और राज्य के EWS नियमों में समानता, 5 एकड़ भूमि मानदंड में बदलाव और प्रमाण-पत्र की वैधता बढ़ाने की वकालत कर रहे हैं. भाटी ने साफ किया कि यह किसी एक जाति की नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े हर परिवार के हक की लड़ाई है.

EWS आरक्षण में क्या-क्या बदलाव चाहते हैं भाटी?
रविंद्र सिंह भाटी ने बीते दिनों जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पदयात्रा निकलाने का ऐलान किया था. उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने पूरे देश के लिए एक जैसे नियम (जैसे 5 एकड़ जमीन की सीमा) बना दिए हैं. जबकि राजस्थान की पत्थरीली और बंजर जमीन, पंजाब या दिल्ली-NCR की उपजाऊ जमीन के बराबर नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि बाड़मेर-जैसलमेर के रेगिस्तान या मेवाड़ की 5 एकड़ जमीन की कीमत और पैदावार में जमीन-आसमान का अंतर है. रेगिस्तान में बड़ी जमीन होने के बावजूद लोग गरीब हैं, लेकिन वे नियमों के कारण आरक्षण से वंचित रह जाते हैं. इसके अलावा उन्होंने EWS प्रमाण-पत्र के हर साल रिन्यू कराने पर सवाल किया और कहा कि इसकी वैधता कम से कम 3 से 5 साल होनी चाहिए.

भाटी ने इसके साथ ही राज्य और केंद्र के लिए EWS के अलग-अलग सर्टिफिकेट जारी करने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘इन शर्तों की वजह से बहुत से सच में पिछड़े EWS युवा UPSC एग्जाम नहीं दे पाते और इस कोटे के तहत फ़ायदे नहीं पा पाते.’ भाटी ने दावा किया है कि राजस्थान के 75 से अधिक विधायकों ने उनके इन मांगों का लिखित समर्थन किया है.

25 साल की उम्र में विधानसभा पहुंचे
रविंद्र भाटी की इस मुहिम को राजस्थान में अपनी पकड़ मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है. पश्चिमी राजस्थान, भाटी का गढ़ माना जाता है. इन क्षेत्रों में भाटी काफी लोकप्रिय हैं, इसका अंजादा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 25 साल की उम्र में भाटी ने पहला विधानसभा चुनाव जीता, वो भी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार. अब इस मुहिम के जरिए भाटी अपने पकड़ और मजबूर करेंगे.

रविंद्र भाटी ने पिछले साल 2023 के विधानसभा चुनाव में Sheo सीट पर 4034 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार फतेह खान को मात दी थी. रविंद्र भाटी को कुल 78726 वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अमीन खान को 54692 वोट और बीजेपी के स्वरूप सिंह खारा को 22412 मत मिले थे. कांग्रेस और बीजेपी चुनाव में तीसरे और चौथे स्थान पर रही.

लोकसभा में 5.86 लाख से ज़्यादा वोट मिले
भाटी के नोमिनेशन में भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे. यहीं नहीं, उन्होंने साल 2024 का लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन भाटी 5.86 लाख से ज़्यादा वोटों लाने में कामयाब रहे, वह कांग्रेस कैंडिडेट से 1 लाख से ज़्यादा वोटों से पीछे रह गए थे. हालांकि, BJP कैंडिडेट और मौजूदा मंत्री कैलाश चौधरी से 2.99 लाख वोटों से आगे थे.

भाटी ने कॉलेज के दिनों से छात्र राजनीति से जुड़े रहे. वह साल 2019 से 2022 तक जोधपुर यूनिवर्सिटी में छात्र अध्यक्ष भी थे. इंस्टाग्राम पर उनके 3.1 मिलियन, फेसबुक पर 1.6 मिलियन से अधिक और उनके ट्विटर हैंडल पर 3.49 लाख फॉलोअर्स हैं. भाटी इस मुहिम के जरिए पंचायत चुनाव से पहले क्षेत्र में अपनी पैठ और मजबूत करने की कोशिश में हैं।

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