रील्स के दौर में बदला त्योहारों का अंदाज, कैलेंडर से पहले एल्गोरिदम में दस्तक

अब त्योहार आने से पहले ही उनकी आमद हमें रील्स के जरिए महसूस होने लगती है. लोग उसी हिसाब से शॉपिंग भी करने लगते हैं. त्योहार की तारीख से पहले एल्गोरिदम फेस्विट वाइब दिखाने लगता है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अब त्योहार आने से पहले ही उनकी आमद हमें रील्स के जरिए महसूस होने लगती है. लोग उसी हिसाब से शॉपिंग भी करने लगते हैं. त्योहार की तारीख से पहले एल्गोरिदम फेस्विट वाइब दिखाने लगता है.

दिवाली आने में अभी वक्त है. नवरात्रि शुरू होने वाली है, दुकानों में सजावट पूरी तरह लगी भी नहीं लेकिन आपके फोन पर, दिवाली लुक, नवरात्रि आउटफिट, गरबा ड्रेस, गिफ्ट आइडिया, होम डेकोर, फेस्टिव मेकअप सबकी रीलों की झड़ी लगी है. अभी तो लोग त्योहार का बाजार बनने पर ही बहस करते थे. नई जनरेशन और नई व्यवस्था तो कैलेंडर में आने से पहले ही एल्गोरिदम में त्योहार ले आई.

पहले त्योहार की तारीख आती थी, अब डिस्कवरी आती है
पहले कोई शॉपिंग करके रखता था कि श्राद्ध में नहीं लेना तो समझ आता था कि नवरात्रि आने वाली है, सफाई अभियान से लेकर पेंट-पुताई शुरू हो जाती थी तो मालूम चलता था, दीवाली आने वाली है. बाजार में रोशनी, मिठाई की दुकान पर भीड़, अखबारों और मार्केंट में डिस्काउंट की लहर और फिर शॉपिंग लेकिन अब एक रील आपको नवरात्रि लुक सजेस्ट कर रही हैं तो दूसरी दिवाली का गिफ्ट हैम्पर.

तीसरी में क्रिएटर आपको अपनी ड्रेस का पता बता रही है. बस फिर क्या दो रील पार कर वही प्रोडक्ट शॉपिंग लिंक के साथ आपके सामने हाज़िर है. आप भूल भी गए तो ऐप आपको भूलने नहीं देगी. घड़ी घड़ी आपको याद दिलाएगी, हे यू हैव समथिंग अमेज़िग इन योर कार्ट मतलब त्योहार का मूड सेट करने में एल्गोरिदम कोई कसर नहीं छोड़ रहा.

रील बस इंटरटेनमेंट नहीं
फरवरी 2026 में मेटा और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने एक स्टडी की जो बताती है, भारत में 77% रिटेल ब्रांड और प्रोडक्ट डिस्कवरी सोशल मीडिया से होती है. शॉर्ट-फॉर्म वीडियो रोज देखने वाले कंज्यूमर्स की गिनती बहुत है और क्रिएटर कंटेंट खरीदारी को इम्पैक्ट करता है.

जून 2026 में मेटा और मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनयन कंपनी इप्सोस स्टडी में 4,000 से ज्यादा लोगों और 23 मेट्रो, टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया. 97% यूजर्स ने माना वो रोज वीडियो देखते हैं. जेन जी के भी 89% लोगों ने इसके डेली यूज की बात कही. मेटा के हिसाब से रील्स ने प्रोडक्ट डिस्कवरी में 81%, कंसिडरेशन में 66% और खरीदारी के फैसले पर 47% असर दिखाया.

अब क्रिएटर बना रहे बाजार
पहले सेलिब्रिटी आपको कुछ खरीदने के लिए कहते थे. अब क्रिएटर कहते हैं, मैने जो पहना वो यहां से लिया है, यही बड़ा फर्क है. अक्टूबर 2025 में यूट्यूब ने बताया था, भारत में उसके 20 करोड़ से ज्यादा लॉग-इन यूजर्स ने शॉपिंग से जुड़े सर्च किए थे. शॉपिंग से जुड़ा वॉच टाइम एक साल में बहुत तेजी से बढ़ा है. यूट्यूब की माने तो मई 2026 तक भारत में 50% से ज्यादा योग्य क्रिएटर शॉपिंग एफिलिएट प्रोग्राम में शामिल थे और 1.9 करोड़ से ज्यादा वीडियो में प्रोडक्ट टैग किए जा चुके थे.

अब खरीदारी में एआई भी शामिल
पहले आपको दीवाली के लिए कुछ चाहिए होता तो बेवसाइट सर्च के बाद 20 ऑप्शन कन्फ्यूज करते थे लेकिन अब आप एआई को बजट साइज डिस्काउंट सब बता सकते हैं. गूगल ने 2026 में भारत में शॉपिंग से जुड़े एआई फीचर बढ़ाए हैं, जिनमें जेमिनी में प्रोडक्ट लिस्टिंग, प्राइज कंपैरिज़न और बाइंग सजेशन शामिल हैं. अब फेस्टिवल मार्केट केवल ये नहीं पूछ रहा क्या खरीदना है, टेक्नोलॉजी आप ही को समझा रही आप क्या खरीदना चाहेंगे?

इसलिए त्योहार एक दिन नहीं, हफ्तों का कंटेंट है. अब त्योहार से काफी पहले कंटेंट शुरू होता है. पहले आउटफिट दिखता है फिर मेकअप. उसके बाद डेकोरेशन. फिर गिफ्ट, ऑफर, रिव्यू, डिस्काउंट और आखिर में खरीदारी. फिर उसी खरीदारी का कंटेट इसलिए त्योहार अब सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक कैलेंडर नहीं कंटेंट कैलेंडर भी बन रहा है.

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