आपके वार्ड में सड़क टूटी है तो क्या करें? जानिए पार्षद के अधिकार और जिम्मेदारियां
नगर निगम आयुक्त के विभाग का काम है उसे ठीक करना. इन दोनों के पीछे राज्य सरकार होती है, जो पैसे और बड़े फैसलों को नियंत्रित करती है. यही तय करता है कि इन दोनों के पास काम करने के लिए जरूरी है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: नगर निगम आयुक्त के विभाग का काम है उसे ठीक करना. इन दोनों के पीछे राज्य सरकार होती है, जो पैसे और बड़े फैसलों को नियंत्रित करती है. यही तय करता है कि इन दोनों के पास काम करने के लिए जरूरी है.
पिछले दो लेखों में हमने दो ऐसे लोगों को अलग कर दिया, जिन्हें शायद आप अपनी टूटी हुई सड़क के लिए जिम्मेदार मान रहे थे. न आपका सांसद. न आपका विधायक. तो फिर जिम्मेदार कौन है? मिलिए अपने पार्षद से. कई जगह इन्हें पार्षद (Corporator) भी कहा जाता है. आपका शहर एक ही बड़ा इलाका नहीं होता. उसे कई वार्डों में बांटा जाता है. हर वार्ड में करीब 30 से 40 हजार लोग हो सकते हैं और हर वार्ड अपने एक पार्षद को चुनता है.
भारतीय शहर की सरकार में यह सबसे छोटा और सबसे स्थानीय चुना हुआ पद है. मेयर का क्षेत्र इससे बड़ा होता है. विधायक और सांसद का क्षेत्र तो इससे भी बहुत बड़ा होता है. अगर आपने कभी सोचा है कि आपकी अपनी गली के बारे में जानने वाला व्यक्ति कौन होना चाहिए, तो वह यही पार्षद है.
सभी पार्षद मिलकर करते हैं मेयर का चुनाव
पार्षद का असली काम अपने शहर के इस छोटे से हिस्से की आवाज बनना है. आपके इलाके का कूड़ा नहीं उठ रहा. सड़क की बत्ती कई हफ्तों से बंद है. हर बारिश में नाली भर जाती है. ऐसी ही समस्याओं को पार्षद को नगर निगम के उन अधिकारियों के सामने उठाना होता है, जो इन कामों को चलाते हैं. पार्षद का एक और महत्वपूर्ण काम है. सभी पार्षद मिलकर मेयर का चुनाव करते हैं. कुछ लेख पहले हमने देखा था कि भारत के ज्यादातर शहरों में मेयर का काम मुख्य रूप से औपचारिक होता है. लेकिन मेयर को उस कुर्सी पर बैठाने में पार्षदों की अपनी भूमिका होती है. वे नगर परिषद के अंदर अपने वोट से मेयर को चुनते हैं.
वार्ड समिति का मकसद
बड़े शहरों में इसके ऊपर एक और व्यवस्था होती है. 1992 के संविधान में किए गए एक बदलाव के तहत तीन लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में Ward Committees यानी वार्ड समितियां बननी चाहिए. आपके इलाके का पार्षद आम तौर पर ऐसी समिति की अध्यक्षता करता है. वार्ड समिति का उद्देश्य यह है कि आम लोगों और सरकारी व्यवस्था के बीच सीधा संपर्क बना रहे. स्थानीय समस्याएं वहीं उठें, उन पर बात हो और यह भी देखा जाए कि उनका क्या हुआ, इससे पहले कि वे सरकारी दफ्तरों की बड़ी व्यवस्था में कहीं खो जाएं.
तो फिर समस्या हल हो गई. आपकी गली की शिकायत करने के लिए पार्षद ही सही व्यक्ति है. लेकिन शहर वाले हमारे पिछले लेख की वह बात याद रखिए. पार्षद के सामने भी वही दीवार खड़ी हो जाती है, जो मेयर के सामने खड़ी होती है. इन कामों को रोज़ असल में करवाने वाला व्यक्ति नगर निगम आयुक्त होता है. उसे राज्य सरकार नियुक्त करती है. और वह आपके पार्षद को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं होता. पार्षद आपकी कूड़े की समस्या जोर से उठा सकता है.
आपकी गली का असली जिम्मेदार
वार्ड समिति में उसके लिए बात कर सकता है. चिट्ठियां लिख सकता है. बार-बार अधिकारियों के पीछे जा सकता है. फिर भी काम तब तक रुका रह सकता है, जब तक वह अधिकारी, जो किसी दूसरी जगह जवाब देता है, उसे आगे नहीं बढ़ाता. तो अब आपकी गली की असली जिम्मेदारी की पूरी तस्वीर सामने आती है. आपके पार्षद का काम है समस्या को देखना और उसे उठाना, क्योंकि वह उस समस्या के सबसे करीब है.
नगर निगम आयुक्त के विभाग का काम है उसे ठीक करना. और इन दोनों के पीछे राज्य सरकार होती है, जो आम तौर पर पैसे और बड़े फैसलों को नियंत्रित करती है. यही तय करता है कि इन दोनों के पास काम करने के लिए जरूरी साधन हैं भी या नहीं. तीन अलग कड़ियां. इनमें से कोई एक भी चुपचाप टूट जाए, तो वही होता है जो हममें से ज्यादातर लोगों ने कभी न कभी देखा है. समस्या सच में मौजूद है. आपका चुना हुआ प्रतिनिधि भी उसके बारे में जानता है. फिर भी महीनों तक कुछ नहीं बदलता.
सही दरवाजे पर जाकर दस्तक
पिछले पांच लेखों को एक साथ देखें, तो असली बात यही सामने आती है. भारतीय लोकतंत्र आपको केवल एक प्रतिनिधि नहीं देता. अलग-अलग स्तरों पर कई प्रतिनिधि देता है. गांव या वार्ड. शहर या जिला. राज्य और देश. हर किसी के पास जिम्मेदारी का एक अलग हिस्सा है. आपकी किसी खास समस्या की जिम्मेदारी किसके पास है, यह जानना कोई छोटी या उबाऊ सरकारी बात नहीं है. यही फर्क है आसमान की तरफ देखकर शिकायत करने और सही दरवाजे पर जाकर दस्तक देने में.
इसलिए अगली बार आपके आसपास कोई स्थानीय समस्या आपको सच में परेशान करे, तो हवा में शिकायत करने के बजाय एक काम करके देखिए. अपने पार्षद का नाम पता कीजिए. अगर आपके शहर में वार्ड समिति की बैठक होती है, तो उसमें जाइए. उनसे सीधे पूछिए कि आपकी गली की ओर से उन्होंने कौन-सी बात उठाई और उसका जवाब क्या मिला. हो सकता है, आपको यह जानकर आश्चर्य हो कि उनमें से कई लोग भी किसी के पूछने का इंतजार कर रहे हैं.



