उदयपुर की बेटी का पर्वतारोहण में इतिहास, 9 महीने में 5 महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां फतह
उदयपुर की डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने मई 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह कर राजस्थान की पहली महिला सिविलियन पर्वतारोही बनने का गौरव हासिल किया. उनकी कहानी देशभर के युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उदयपुर की डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने मई 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह कर राजस्थान की पहली महिला सिविलियन पर्वतारोही बनने का गौरव हासिल किया. उनकी कहानी देशभर के युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है.
राजस्थान के उदयपुर की बेटी और पर्वतारोही डॉक्टर मनस्वी अग्रवाल ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है. मई 2026 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने वाली डॉक्टर मनस्वी राजस्थान की पहली महिला सिविलियन पर्वतारोही बनीं, जिन्होंने इस सर्वोच्च शिखर पर तिरंगा फहराया.
जानकारी के अनुसार, इससे पहले राजस्थान की तीन महिलाएं सेना, अर्धसैनिक बल या सरकारी संस्थानों से जुड़ी थीं, जिन्होंने एवरेस्ट फतह किया था. मनस्वी की उपलब्धि की असली व्यापकता तब सामने आती है, जब उनकी अब तक की पर्वतारोहण यात्रा को देखा जाए. एवरेस्ट से पहले वह अंटार्कटिका के सर्वोच्च शिखर विन्सन मैसिफ, यूरोप के माउंट एल्ब्रुस, अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो और दक्षिण अमेरिका के माउंट अकोंकागुआ पर तिरंगा फहरा चुकी थीं.
विन्सन मैसिफ पर राजस्थान की पहली शख्सियत
इस तरह मनस्वी ने महज नौ महीनों में पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियां फतह करने का गौरव हासिल किया. दिसंबर 2025 में मनस्वी ने करीब 4,892 मीटर ऊंचे विन्सन मैसिफ पर भारतीय तिरंगा फहराया. वह इस शिखर तक पहुंचने वाली राजस्थान की पहली शख्सियत हैं. उनसे पहले राजस्थान से किसी पुरुष या महिला ने विन्सन मैसिफ फतह नहीं किया था.
यह उपलब्धि बेहद कठिन परिस्थितियों में हासिल हुई. अंटार्कटिका की अत्यधिक ठंड, बर्फीले वातावरण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच मनस्वी ने अपने अदम्य साहस का परिचय दिया. मनस्वी की एवरेस्ट यात्रा केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष की कहानी भी रही. एवरेस्ट अभियान के दौरान उनके दो सह-आरोहियों को उन्होंने खो दिया.
चोटी तक पहुंचने से कहीं ज्यादा कठिन थी वापसी
खुद मनस्वी भी अत्यधिक ठंड और बर्फीली परिस्थितियों की चपेट में आ गईं और उन्हें गंभीर थर्ड और फोर्थ-डिग्री फ्रॉस्टबाइट का सामना करना पड़ा. स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उनके दोनों पैरों को काटने तक की आशंका पैदा हो गई थी. इलाज और लंबे संघर्ष के बाद उनकी जान और अंगों को बचाया जा सका, हालांकि इस कठिन अभियान में उन्हें छह उंगलियों/पैर की उंगलियों में गंभीर स्थायी नुकसान झेलना पड़ा.
यही वजह है कि एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा फहराने की उनकी उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि असाधारण साहस और जीवन के प्रति संघर्ष की मिसाल है. मनस्वी की प्रतिभा सिर्फ पर्वतारोहण तक सीमित नहीं है. वह राष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध शूटर भी हैं और भारतीय राष्ट्रीय शूटिंग टीम के चयन की प्रक्रिया में आगे के दौर तक पहुंच चुकी हैं.
स्वतंत्रता दिवस समारोह में राज्य स्तरीय सम्मान मिला
इसके अलावा वह राष्ट्रीय स्तर की घुड़सवार भी हैं और 60 किलोमीटर Endurance Ride प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी हैं. इस तरह पर्वतारोहण, शूटिंग और घुड़सवारी तीनों क्षेत्रों में उनकी सक्रियता उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है. पर्वतारोहण के क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों और योगदान को देखते हुए मनस्वी को स्वतंत्रता दिवस समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से राज्य स्तरीय सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है.
यह सम्मान उनके साहस, उपलब्धियों और राज्य का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने के योगदान की पहचान है. डॉ मनस्वी ने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (GNLU) से पांच वर्षीय लॉ डिग्री हासिल की है और पर्यावरण कानून के क्षेत्र में शोध किया है. पर्वतारोहण के साथ वह कानून और शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं. यानी एक तरफ वह दुनिया की सबसे कठिन पर्वत चोटियों को चुनौती दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, कानून, शूटिंग और घुड़सवारी जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं.
हर व्यक्ति के भीतर एक पहाड़ होता है
हाल ही में उदयपुर में आयोजित एक सम्मान समारोह में युवाओं को संबोधित करते हुए मनस्वी ने कहा, एक माउंटेन हर व्यक्ति के भीतर होता है, यदि उसे हम जीत लेते हैं तो दुनिया की कोई भी चुनौती हम जीत सकते हैं. उनका यह विचार उनकी अपनी जिंदगी की कहानी को भी बयां करता है. एक ऐसा सफर जिसमें हर शिखर के साथ एक नई चुनौती आई और हर चुनौती के सामने उनका संकल्प और मजबूत होता गया.
अब लक्ष्य Seven Summits
मनस्वी अब दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करने के लक्ष्य Seven Summits की ओर बढ़ रही हैं. पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा फहराने के बाद अब उनकी नजर शेष दो महाद्वीपों की चोटियों पर है. मनस्वी अग्रवाल की कहानी सिर्फ एवरेस्ट फतह करने की कहानी नहीं है.
यह उस जिद, जुनून और जज्बे की कहानी है, जिसमें इंसान अपने सामने खड़ी सबसे बड़ी मुश्किल को भी चुनौती देने का साहस करता है. उदयपुर की इस बेटी ने पांच महाद्वीपों की चोटियों पर तिरंगा फहराकर राजस्थान का मान बढ़ाया है और अपनी संघर्ष यात्रा से देश की बेटियों को यह संदेश दिया है कि सपने कितने भी ऊंचे हों-दृढ़ संकल्प, अनुशासन और हौसले के आगे कोई भी शिखर असंभव नहीं.



