एक और बड़ा आतंकी कमांडर ढेर, हाशिम मूसा के मारे जाने से J&K में हलचल
बड़गाम में लश्कर-ए-तैयबा कमांडर हाशिम मूसा मारा गया. इसके साथ 2022 से सक्रिय बताए जा रहे चार सदस्यीय लश्कर कमांडर ग्रुप का अंत हो गया. गृह मंत्रालय ने इसे आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बड़गाम में लश्कर-ए-तैयबा कमांडर हाशिम मूसा मारा गया. इसके साथ 2022 से सक्रिय बताए जा रहे चार सदस्यीय लश्कर कमांडर ग्रुप का अंत हो गया. गृह मंत्रालय ने इसे आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया.
जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है. लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर हाशिम मूसा को बड़गाम में ढेर कर दिया गया. मूसा की मौत के साथ ही उस चार सदस्यीय लश्कर कमांडर ग्रुप का भी पूरा खात्मा हो गया, जिसे गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा था. अबू तलहा, जुनैद भट… सुलेमान… और अब हाशिम मूसा. चारों कमांडर अलग-अलग ऑपरेशनों में मारे जा चुके हैं.
गृह मंत्रालय ने हाशिम मूसा के खात्मे को जम्मू-कश्मीर में लश्कर के पूरे नेटवर्क के लिए बड़ा झटका बताया है, लेकिन सवाल ये है कि मूसा के मारे जाने के बाद जमीन पर आतंक का कमांड स्ट्रक्चर कितना कमजोर हुआ? क्या पाकिस्तान में बैठे हैंडलर अब छोटे-छोटे मॉड्यूल के जरिए नेटवर्क चलाने की कोशिश करेंगे? और अब सुरक्षा एजेंसियों का अगला निशाना कौन होगा?
लश्कर और जैश पर कमांड संकट
हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों की कमांड स्ट्रक्चर को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद दोनों ही इस समय जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े स्थानीय या पाकिस्तानी कमांडर की प्रत्यक्ष मौजूदगी के बिना ऑपरेट कर रहे हैं. घाटी और जम्मू संभाग में सक्रिय आतंकियों के पास फिलहाल ऐसा कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो जमीन पर रहकर बड़े आतंकी ऑपरेशन की कमान संभाल सके.
कौन था हाशिम मूसा?
जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा उर्फ आसिफ फौजी को मार गिराया. गृह मंत्रालय के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियां काफी समय से मूसा को ट्रैक कर रही थीं. तकनीकी और ह्यूमन इंटेलिजेंस से उसकी मौजूदगी और मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ एक विशेष प्लान तैयार किया. इसके बाद गुरवतकलां इलाके में संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया.
मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन में मूसा का शव बरामद किया गया और उसके पास से हथियार और दूसरे युद्धक सामान भी मिले. गृह मंत्रालय ने उसके खात्मे को LeT इकोसिस्टम के लिए गंभीर झटका बताया है. हाशिम मूसा के मारे जाने की सबसे बड़ी अहमियत इसलिए है क्योंकि इसके साथ ही लश्कर के उस चार सदस्यीय ग्रुप का अंत हो गया, जो 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था. इस ग्रुप में शामिल थे अबू तलहा, जुनैद भट, सुलेमान और हाशिम मूसा.
गृह मंत्रालय के मुताबिक इस चार सदस्यीय ग्रुप को जम्मू-कश्मीर में कई बड़े हमलों से जोड़ा गया था. इनमें अगस्त 2023 में हलान हमला, मई 2023 में कांडी हमला, दिसंबर 2023 में DKG हमला, मई 2024 में शाहसितार हमला शामिल है.
इसके अलावा जून 2024 में शिव खोरी हमला, अक्टूबर 2024 में गगनगीर हमला, अक्टूबर 2024 में बूटापथरी हमला और अप्रैल 2025 का बैसरन हमला शामिल हैं. यानी एक ऐसा आतंकी नेटवर्क, जो कश्मीर से लेकर पीर पंजाल और जम्मू क्षेत्र तक अलग-अलग हमलों से जुड़ा रहा, उसके चारों प्रमुख सदस्यों को सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों में खत्म कर दिया है. सुरक्षा एजेंसियों के लिए मूसा सिर्फ एक हथियारबंद आतंकी नहीं था.
अप्रैल 2025 एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें घुसपैठ, हथियारों की सप्लाई, स्थानीय संपर्क, मूवमेंट और हमलों की प्लानिंग जैसे काम जुड़े हुए थे. गृह मंत्रालय ने खुद मूसा के खात्मे को जम्मू-कश्मीर में लश्कर के नेटवर्क के लिए गंभीर झटका बताया है. 2022 से सक्रिय बताए गए इस चार सदस्यीय वरिष्ठ कमांडर ग्रुप का अब कोई सदस्य जिंदा नहीं बचा है. हालांकि, दूसरे नेटवर्क, हैंडलर और छोटे मॉड्यूल अब भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं.
अब OGW नेटवर्क पर नजर
बड़े कमांडरों के खात्मे के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने अगली चुनौती होती है कि उन लोगों तक पहुंचना जो आतंकियों को जमीन पर मदद देते हैं. यानी ओवरग्राउंड वर्कर्स, स्थानीय मददगार, ठिकाने उपलब्ध कराने वाले लोग, हथियार पहुंचाने वाले नेटवर्क और आतंकियों की आवाजाही में मदद करने वाले संपर्क. मूसा के मामले में भी सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि वह इतने लंबे समय तक जंगलों और पहाड़ी इलाकों में किस नेटवर्क की मदद से सक्रिय रहा.
इसी बीच जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ भी सुरक्षा अभियान जारी है. सितंबर में उधमपुर के मजालता इलाके में सुरक्षा बलों ने जैश से जुड़े दो पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया और एक संदिग्ध OGW को हिरासत में लिया था. इससे पहले डोडा के जंगलों में जैश से जुड़े एक संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकी का शव बरामद हुआ था. उसके पास से अमेरिकी M4 कार्बाइन और गोला-बारूद बरामद हुआ था.



