तानाशाही से मिलकर लड़ें डीएमके व आप

- उद्धव ठाकरे ने दोनोंपार्टियों से कहा – कांग्रेस के साथ आएं
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन से आप और डीएमके के दूर रहने पर, शिवसेना (यूबीटी) ने इन दोनों पार्टियों से कांग्रेस के साथ अपने मतभेद भुलाकर तानाशाही के खिलाफ लडऩे की अपील की। सामना में छपे एक संपादकीय में पार्टी ने कहा कि पूरा देश स्पेशल इंटेंसिव रिविजन -एसआईआर के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को देख रहा है। पार्टी ने कहा कि लेकिन आम आदमी पार्टी-आप और द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (डीएमके) इससे दूर रहे हैं।
पार्टी ने कहा कि आप के कांग्रेस के साथ मतभेद हैं। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि लेकिन देश को तानाशाही की बेडय़िों से मुक्त कराने के लिए आप और कांग्रेस को कम से कम एक साथ आना चाहिए। आप के कन्वीनर अरविंद केजरीवाल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग के साथ कड़वा अनुभव रहा है। जब केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तो उन्हें एक झूठे मामले में जेल भेज दिया गया था। आरोप है कि उनके चुनाव क्षेत्र से वोटरों के नाम हटाकर उनकी हार की साज़िश रची गई थी। इसलिए, पार्टी का कहना है कि इंडिया गठबंधन से दूर रहना आपके हित में नहीं है। सेना (यूबीटी) ने कहा कि भले ही पंजाब विधानसभा चुनाव, जहाँ दोनों पार्टियाँ मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं, विवाद का विषय हो सकते हैं, फिर भी केजरीवाल को मोदी और शाह के खिलाफ लड़ाई में शामिल होना चाहिए। संपादकीय में कहा गया है कि तमिलनाडु में डीएमके हार गई और कांग्रेस की मदद से सी. जोसेफ विजय की टीवीके सत्ता में आई। इससे डीएमके नाराज हो गई। संपादकीय में आगे कहा गया, लेकिन डीएमके का यह रुख देशहित में नहीं है।



