अभेद दुर्ग में बदली दिल्ली
दिल्ली में प्रदर्शन होने वाला है या दुश्मन देश चढ़ाई करने वाला है

- राहुल, अखिलेश उद्वव—राज ठाकरे ध्रुव राठी प्रकाश राज, सीजेपी नेता, समेत सभी तैयार
- विपक्ष का निर्णायक आंदोलन कल
- तैयारी दोनों तरफ से सरकार की कोशिश विफल हो आंदोलन
- 10 डिटेंशन सेंटर और 40 मेट्रो स्टेशन होंगे बंद
- राजधानी के रास्ते बंद किए जा सकते हैं लोकतंत्र के सवाल नहीं
- दिल्ली आंदोलन के लिए जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से सरकार ने बुलाये सीआरपीएफ के जवान
- विपक्षी करो-मरो की रणनीति के साथ मैदान में
- दिल्ली वाले एप बेस्ड टैक्सी भी नहीं कर सकेंगे बुक इस पर भी पाबंदी
- ग्रह मंत्रालाय ने 8 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक के लिए सीआरपीएफ की 221 कंपनियां उपलब्ध कराई।
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शन होने वाला है या दुश्मन देश चढ़ाई करने वाला है? 23 हजार जवानों की तैनाती, 10 डिटेंशन सेंटर 40 मेट्रो स्टेशनों पर ताला लगाने की तैयारी और राजधानी के रास्तों पर पहरेदारी। सीजेपी और विपक्षी राजनीतिक पार्टियों के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा का जो चक्रव्यूह रचा जा रहा है वह एक सीधा सवाल सत्ता के सामने खड़ा करता है कि जब सरकार को अपने लोकतंत्र पर भरोसा है तो उसे जनता की आवाज से इतना डर क्यों लग रहा है।
क्या अब विरोध करने वालों को सुनने के बजाय उन्हें राजधानी की दहलीज तक पहुंचने से रोकना ही नया लोकतांत्रिक मॉडल है। किसान आंदोलन याद है दिल्ली की सीमाओं पर कीलें गाड़ी गयी सड़कों पर बैरिकेडिंग की दीवारें खड़ी की गयी आंसू गैस के गोले छोड़े गए। किसानों को रोकने के लिए रास्तों को युद्धभूमि जैसा बना दिया गया। लेकिन किसान पीछे नहीं हटे। महीनों तक डटे रहे और आखिरकार सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। अब फिर राजधानी के चारों ओर पहरे का पहाड़ खड़ा करने की तैयारी है। इस बार मुद्दा जंतर मंतर का आंदोलन है। सवाल यह है कि क्या सरकार विरोध की आवाज को सुरक्षा का खतरा बताकर लोकतांत्रिक असहमति पर ताला लगाना चाहती है। इतिहास की विडंबना देखिए 1857 में हुकूमत बगावत से घबराई थी 1947 में उसी देश ने आजादी हासिल की। आजाद भारत में सत्ता के सामने सबसे बड़ा इम्तिहान यही है कि वह असहमति को दुश्मनी समझती है या लोकतंत्र की ताकत। क्योंकि बैरिकेडिंग रास्ता रोक सकती है मेट्रो बंद कर सकती है लोगों को हिरासत में ले सकती है लेकिन विचारों की आवाजाही पर पहरा लगाना इतना आसान नहीं होता।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, ज्ञानेश कुमार हवा में उड़ जाएंगे, ये जन आंदोलन बन चुका है, अब हर आदमी सवाल पूछने लगा है। आप 13 करोड़ लोगों के वोट काट दोगे, देश सवाल नहीं करेगा? यह प्रदर्शन भाजपा को उखाड़ फेंक देगा। हम लोकतंत्र के अधिकारों को खत्म नहीं होने देंगे।
इमरान मसूद, कांग्रेस सांसद



