दिल्ली प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र समेत कई विभागों को नोटिस

अदालत की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों और आम नागरिकों की आवाजाही पर पड़े असर को लेकर मामला महत्वपूर्ण हो गया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों और 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, रेलवे और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अदालत की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों और आम नागरिकों की आवाजाही पर पड़े असर को लेकर मामला महत्वपूर्ण हो गया है।

प्रकरण में मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम किस आधार पर लागू किए गए और क्या इनसे आम लोगों की आवाजाही तथा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर जरूरत से ज्यादा असर पड़ा। हालांकि, नोटिस जारी होने का अर्थ संबंधित पक्षों की गलती साबित होना नहीं है। उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस,DMRC और रेलवे को अवमानना का नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि बैरिकेडिंग की समीक्षा की जानी चाहिए. इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को पांच सख्त निर्देश जारी किए हैं. ऐसे में आइये जानते हैं कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश

  • मेट्रो और रेल सुविधाएं सामान्य रूप से चलेंगी, जब तक कि आर्टिकल 19(2) के तहत पब्लिक ऑर्डर में गड़बड़ी को देखते हुए कोई नियम लागू करने की ज़रूरत न पड़े.
  • शहर में लोगों की आवाजाही पर ट्रैफिक नियमों के तहत कोई रोक नहीं होगी. कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए बैरिकेड लगाने के फैसले की तुरंत समीक्षा की जाएगी.
  • इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी.
  • कानून के अनुसार शहर में लोगों की आवाजाही सुचारू रूप से जारी रहेगी.
  • कानून द्वारा तय प्रक्रिया के बिना किसी को हिरासत में नहीं लिया जाएगा, खासकर उन इलाकों के बाहर जहां शांतिपूर्ण और बिना हथियारों वाले लोगों का जमावड़ा हो और जहां BNSS की धारा 163 लागू न हो.

बोर्ड हटाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 के बारे में कोर्ट ने कहा ‘हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि अगर बोर्ड नहीं हटाया गया है तो उसे हटा दें, ताकि किसी को भी कोर्ट तक पहुंचने (आने-जाने) में परेशानी न हो और न्याय पाने में कोई डर या शंका न रहे.

‘मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकना जिम्मेदारी’

जस्टिस बागची ने कहा कि हमने आर्टिकल 19 के तहत अधिकारों की रक्षा की है. कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन पर हमें जवाब चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि बिना बैज के पुलिस अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग किए जाने की जांच की जाएगी. जस्टिस बागची ने SG से कहा कि आर्टिकल 32 के तहत हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि हम मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकें.

‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में न लें’

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को उन जगहों पर हिरासत में न लें, जहां BNS की धारा 163 लागू नहीं है. कोर्ट ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने और कानून के मुताबिक इंटरनेट सुविधाएं बिना किसी रुकावट के जारी रखने का आदेश दिया है. साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि लोगों और ट्रैफिक की आवाजाही की अनुमति दी जाए और बैरिकेड्स की ज़रूरत की समीक्षा की जाए.

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