रूस ने यूक्रेन के 6 पावर प्लांट उड़ाए, 5 लाख से ज्यादा लोगों की बिजली आपूर्ति ठप

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों ने बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों ने बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यूक्रेन में हालिया रूसी हमलों के बाद लाखों लोगों के प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। बिजली बहाली के लिए ऊर्जा कर्मियों को क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत करनी पड़ रही है, जबकि सर्दियों से पहले ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।

यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर रूस का हमला, बिजली संकट गहराने की आशंका

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में अब ऊर्जा बुनियादी ढांचा एक बार फिर प्रमुख निशाने पर है। यूक्रेन के बिजली उत्पादन और आपूर्ति तंत्र पर हुए हमलों ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिजली संयंत्रों, सबस्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।

रूस के हमले में छह पावर प्लांट निशाने पर आए और पांच लाख से अधिक लोगों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी छह संयंत्र पूरी तरह नष्ट हुए हैं या उन्हें अलग-अलग स्तर पर नुकसान पहुंचा है। इसलिए इस संख्या और नुकसान की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण है।

अक्टूबर 2026 में सामने आई विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन में रूसी हमलों ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। 14 अक्टूबर की रिपोर्टों में यूक्रेनी अधिकारियों ने लगभग 30 ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचने और करीब छह लाख उपभोक्ताओं के बिजली आपूर्ति से प्रभावित होने की जानकारी दी थी। वहीं, 16 से 19 अक्टूबर के बीच भी ऊर्जा ढांचे पर हमलों और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती की खबरें सामने आईं।

5 लाख से ज्यादा लोगों पर बिजली संकट का असर

बिजली की आपूर्ति बाधित होने का असर केवल घरों में रोशनी बंद होने तक सीमित नहीं रहता। किसी बड़े क्षेत्र में बिजली जाने से पानी की आपूर्ति, अस्पतालों की सेवाएं, संचार व्यवस्था, कारोबार और सार्वजनिक परिवहन जैसी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

यूक्रेन के प्रभावित इलाकों में बिजली बहाल करने के लिए ऊर्जा विभाग और मरम्मत दलों को क्षतिग्रस्त उपकरणों का निरीक्षण करना पड़ता है। इसके बाद बिजली लाइनों, ट्रांसफॉर्मरों और अन्य उपकरणों की मरम्मत कर आपूर्ति को धीरे-धीरे सामान्य किया जाता है।

हालांकि, युद्धग्रस्त क्षेत्रों में मरम्मत का काम आसान नहीं होता। लगातार हमलों का खतरा, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचा और सुरक्षा संबंधी प्रतिबंध राहत कार्यों को धीमा कर सकते हैं।

यह भी ध्यान देना जरूरी है कि पांच लाख से अधिक प्रभावित लोगों का आंकड़ा किस क्षेत्र, किस अवधि और कितने उपभोक्ताओं के आधार पर दिया गया है, इसकी पुष्टि के बाद ही सटीक स्थिति सामने आ सकेगी।

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