गुजरात के स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर सख्त पाबंदी, बिना अनुमति फोटो-वीडियो पर रोक
गुजरात सरकार ने सरकारी स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा, गरिमा और प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः बीजेपी जबस सत्ता में आई है.. तभी से अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नए- नए नियम लागू करती है.. स्कूलों की बदतर व्यवस्था को लेकर जनका सवाल उठा रही.. लोग सरकारी का स्कूलों का वीडियो बनाकर उसकी बदहाली को जनता के सामने लाने का काम करते हैं.. जिससे बीजेपी के दावों की पोल खुल कर सामने आती रही है.. और सरकार का झूठ बेनकाब होने लगा था.. जिसको देखते हुए गुजरात की भूपेंद्र पटेल सरकार ने एक ऐसा फरमान जारी किया है.. जिससे अब कोई भी बाहरी व्यक्त स्कूलों की वीडियो ग्राफी और फोटो ग्राफी नहीं कर सकता है. ना ही बच्चों से किसी तरह का कोई संवाद कर सकता है.. वहीं अगर किसी को भी स्कूल में जाना है.. तो सबसे पहले उसे प्रधानाचार्य से लिखित अनुमति लेनी होगी.. उसके बाद ही वह स्कूल जा सकता है..
वहीं अब सवाल उठता है कि इस तरह प्रतिबंध लगाकर सरकार कब तक अपनी नाकामी छुपाती रहेगी.. और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करती रहेगी.. एक तरफ सरकार गजरात मॉडल की बात करती है.. तो वहीं दूसरी तरफ अपनी नाकामी छुपाकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करती है.. वहीं बीजेपी सरकार के दावे के मुताबिक अगर राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था पूरी तरह से चाक चौबंद है.. सरकार पूरी तरह से ईमानदार हो तो फिर स्कूलों को लेकर ऐसी पावंदी क्यों लगा रही.. वहीं इस तरह की पाबंदी से साफ पता चलता है कि सरकार के सभी दावे पूरी तरह से फेल हो गए हैं.. और अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नए नए नियम बनाने पड़ रहे हैं..
इसी कड़ी में गुजरात सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी.. और लाइव स्ट्रीमिंग पर सख्त नियम लागू कर दिए हैं.. शिक्षा विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार अब किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने के लिए प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख से पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है.. प्रवेश से पहले विजिटर रजिस्टर में अपना पूरा नाम, पता, उद्देश्य.. और अन्य विवरण दर्ज करना भी जरूरी होगा.. बिना अनुमति के कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, खेल के मैदानों या अन्य छात्र गतिविधि क्षेत्रों में जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है.. बच्चों की तस्वीरें या वीडियो बनाने पर भी सख्त रोक लगाई गई है.. ताकि उनकी गरिमा और गोपनीयता बनी रहे..
जानकारी के अनुसार यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा, गोपनीयता और गरिमा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है.. परिपत्र में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नीतियों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है.. जिसको लेकर सरकार का कहना है कि स्कूल परिसर को अनाधिकृत प्रवेश.. और व्यवधान से मुक्त रखना आवश्यक है.. ताकि अध्ययन-अध्यापन का वातावरण प्रभावित न हो.. अधिकृत सरकारी अधिकारी आधिकारिक ड्यूटी पर आने पर इस अनुमति से मुक्त रहेंगे.. उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है.. जिसमें भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम जैसी धाराएं लागू हो सकती हैं..
गुजरात भाजपा के मुख्य प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि.. पिछले कुछ दिनों में राज्य में रीलबाज और टोलीबाज विपक्ष की बीमारी देखने को मिली थी.. और उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा.. और स्कूलों में होने वाले अनावश्यक व्यवधान को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है.. जो कोई भी अनाधिकृत तरीके से प्रवेश करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.. पटेल के अनुसार यह नियम सिर्फ दुर्भावनापूर्ण इरादों वाले लोगों को रोकने के लिए है.. न कि आम नागरिकों या सद्भावना रखने वालों के लिए..



