यूपी में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, गलत तरीके से नाम कटवाने पर जांच के आदेश
अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) को इन शिकायतों की जांच करने और जहां गड़बड़ी मिले, वहां जरूरी सुधार करने का निर्देश दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। वोटर लिस्ट से लोगों के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) को इन शिकायतों की जांच करने और जहां गड़बड़ी मिले, वहां जरूरी सुधार करने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए सवालों पर ध्यान दिया। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के हलफनामे में कुछ ऐसी विसंगतियों का दावा किया, जिनसे फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर संदेह पैदा होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे जिन गड़बड़ियों की शिकायत कर रहे हैं, उनकी जानकारी लिखित रूप में चुनाव आयोग के वकील को दें। इसके बाद आयोग को तथ्यों की जांच करके जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने होंगे और अदालत में अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।
इस दौरान याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में फॉर्म-7 आवेदनों पर कथित तौर पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर थे… उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जमा किए गए आवेदनों में अनियमितताओं की ओर अदालत का ध्यान दिलाया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिन अनियमितताओं का समाधान नहीं हुआ है, उन्हें चिह्नित करते हुए एक विस्तृत नोट चुनाव आयोग को सौंपें.
इसके बाद चुनाव आयोग को इन तथ्यों की जांच करनी होगी. अदालत ने आयोग से कहा है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाए. इस निर्देश के बाद अब चुनाव आयोग को फॉर्म-7 आवेदनों से जुड़ी शिकायतों, खासकर BLO के कथित हस्ताक्षरों और हलफनामे में बताई गई विसंगतियों की जांच करनी होगी.



