मनोज बाजपेयी की जिंदगी के खुलेंगे अनकहे राज!
संजय शर्मा के सवालों से सजेगी मुंबई की शाम

- किरदारों से आगे असल जिंदगी के संघर्षों और अनुभवों पर होगी बात
- एक नवंबर को 4PM तहजीब में सिनेमा के दमदार अभिनेता से सीधा संवाद
- संपादक संजय शर्मा की मुहिम, हर माह सजेगी संस्कृति की नई महफिल
- संगीत के बाद अब अभिनय की दुनिया के सितारे से रूबरू होंगे दर्शक
- कार्यक्रम के टिकट बुकमायशो पर उपलब्ध हैं
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुम्बई। पर्दे पर कभी पुलिस अधिकारी कभी अपराध की दुनिया का चेहरा और कभी जिंदगी से जूझता आम इंसान। भीखू माह्त्रे फिल्मी कैरेकटर से लोगों के दिलो पर राज कर रहे मनोज बाजपेयी हर किरदार में कुछ ऐसी छाप छोड़ जाते हैं जो फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के भीतर लंबे समय तक जिंदा रहती है।
उस कलाकार की अपनी कहानी क्या है? सफलता के शिखर तक पहुंचने का रास्ता कितना कठिन था? असफलताओं ने कितना तोड़ा और संघर्ष ने कितना गढ़ा? एक नवंबर को मुंबई में इन सवालों के जवाब मिलेगें, मौका होगा 4PM तहजीब की विशेष सांस्कृतिक संध्या का जहां अभिनेता मनोज बाजपेयी अपने जीवन और अभिनय यात्रा के अनकहे प्रसंग लोगों के साथ करेंगे। उनके सामने होंगे 4PM के संपादक संजय शर्मा और सामने बैठा होगा वह दर्शक जो अपने पसंदीदा कलाकार को इस बार पर्दे पर नहीं बल्कि जिंदगी की असली कहानी सुनाते हुए देखना चाहता है।

संजय शर्मा की पहल, हर महीने संस्कृति से मुलाकात
4PM के संपादक संजय शर्मा ने पत्रकारिता से आगे बढ़कर कला और संस्कृति के क्षेत्र में संवाद की एक नई पहल की है। 4PM तहजीब के माध्यम से उनकी कोशिश है कि संगीत, साहित्य, सिनेमा और दूसरी सांस्कृतिक विधाओं से जुड़ी हस्तियों को ऐसा मंच मिले जहां दर्शक उनके काम के साथ-साथ उनके विचारों और जीवनानुभवों से भी जुड़ सकें। इस श्रृंखला की पहली सांस्कृतिक संध्या 24 अक्टूबर को मुंबई में गायिका वैष्णवी शर्मा की संगीत और काव्य प्रस्तुति के साथ आयोजित हुई थी। अब दूसरी कड़ी में मनोज बाजपेयी के साथ बातचीत का कार्यक्रम रखा गया है। संगीत से शुरू हुआ यह सफर अब अभिनय की दुनिया तक पहुंच रहा है। इस पहल की खासियत यह है कि संस्कृति को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित रखने के बजाय उसे संवाद का माध्यम बनाया जा रहा है। कलाकार अपनी यात्रा साझा करें दर्शक प्रश्न पूछें और दोनों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हो यही 4PM तहजीब की मूल भावना है।
सत्या से लेकर गैंग्स ऑफ वासेपुर
मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित मुक्ति ऑडिटोरियम में शाम सात बजे होने वाला यह आयोजन महज एक फिल्मी हस्ती का साक्षात्कार नहीं होगा बल्कि सिनेमा के पीछे छिपे कलाकार से मुलाकात का अवसर होगा। मनोज बाजपेयी की पहचान उन अभिनेताओं में है जिन्होंने चमक-दमक से अधिक अपने अभिनय की ताकत पर भरोसा किया। ‘सत्या’ से लेकर ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘अलीगढ़’ और ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ तक उनकी भूमिकाएं अलग-अलग रंगों में सामने आईं। ‘द फैमिली मैन’ ने उन्हें नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी खास पहचान दिलाई। अब सवाल यह है कि इन किरदारों को जीने वाला कलाकार खुद जिंदगी को किस नजर से देखता है? उसके भीतर एक भूमिका आकार कैसे लेती है? कैमरे के सामने सहज दिखने वाला अभिनेता कैमरे के पीछे किन चुनौतियों से गुजरता है? संजय शर्मा के साथ होने वाली बातचीत इन्हीं पहलुओं को सामने लाने का प्रयास करेगी। खास बात यह है कि दर्शकों को भी अपने सवाल पूछने का अवसर मिलेगा। यानी बातचीत केवल मंच से दर्शकों तक नहीं पहुंचेगी बल्कि दर्शकों की जिज्ञासाएं भी मंच तक जाएंगी।
जेन जी के लिए खास है मनोज बाजपेयी का सफर
मनोज बाजपेयी का सफर उन युवाओं के लिए खास मायने रखता है जो छोटे शहरों और सीमित संसाधनों से निकलकर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं। बिहार के एक गांव से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग जगह बनाना आसान नहीं था। अभिनय की दुनिया में पहचान बनाने के लिए उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ा। शुरुआती असफलताओं और सीमित अवसरों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। उनकी सफलता की कहानी केवल पुरस्कारों और लोकप्रिय फिल्मों की सूची नहीं है। यह उस धैर्य की कहानी भी है जो कलाकार को लगातार अपने काम में बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। यही वजह है कि मनोज बाजपेयी का व्यक्तित्व पर्दे पर निभाए गए किरदारों से कहीं आगे तक जाता है।
4PM तहजीब के बैनर तले सजेगा मंच
4PM तहजीब की इस शाम में दर्शकों को उनके फिल्मी सफर के उन पहलुओं को जानने का अवसर मिलेगा जो आमतौर पर प्रचार और साक्षात्कारों की औपचारिक बातचीत में पीछे छूट जाते हैं। अभिनय के चुनाव किरदारों की तैयारी सफलता के बाद बदलती जिम्मेदारियां और असफलताओं से मिलने वाले सबक ऐसे विषय बातचीत को रोचक बनाएगे।
मुंबई की शाम सिनेमा और जिंदगी के नाम
महानगर की तेज रफ्तार जिंदगी में ऐसी शामें लोगों को अपने प्रिय कलाकारों से जुडऩे का अवसर देती हैं। मनोज बाजपेयी के प्रशंसकों के लिए यह आयोजन खास होगा क्योंकि यहां वह अपने पसंदीदा अभिनेता को उनकी भूमिकाओं से आगे समझ सकेंगे। एक कलाकार की सफलता के पीछे कितनी तैयारी कितनी असफलताएं और कितने अनकहे अनुभव होते हैं इसका अंदाजा ऐसी बातचीत से ही लगाया जा सकता है। एक नवंबर को शाम सात बजे मुक्ति ऑडिटोरियम में होने वाली इस संध्या के टिकट बुकमायशो पर उपलब्ध हैं। संजय शर्मा की इस पहल में एक तरफ कला के प्रति जिज्ञासा है तो दूसरी तरफ दर्शकों को कलाकार के करीब लाने की कोशिश। मनोज बाजपेयी के साथ होने वाली बातचीत इसी सिलसिले की अगली कड़ी है।



