खतरे में लोकतंत्र, बचाने का दिन: कांग्रेस

लोकतंत्र बचाने की रैली से घबराई सत्ता? व्यापार, ट्रेन और नौकरी के आदेश पर छिड़ा सियासी संग्राम

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कल रामलीला मैदान में जुटेगा विपक्ष
व्यापार प्रभावित होने की दलील पर कांग्रेस का पलटवार, लाखों लोग आएंगे तो चाय, नाश्ते, होटल, टैक्सी और कपड़े के कारोबार को मिलेगा फायदा
कांग्रेस का आरोप, रैली रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही मोदी सरकार

ट्रेनों के रद्द होने और कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने के आरोपों के बीच यूपी में सरकारी नौकरी से जुड़े आदेश पर भी सवाल; विपक्ष बोला—आवाज उठाने का अधिकार छीनने की कोशिश

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता की आवाज होती है लेकिन जब यही आवाज सत्ता के लिए असुविधाजनक होने लगे तो सवाल उठना लाजिमी है। दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की कल होने वाली रैली अभी हुई भी नहीं है मगर उसके इर्द गिर्द सियासी संग्राम तेज हो चुका है। कांग्रेस इसे केवल एक राजनीतिक सभा नहीं बल्कि मताधिकार की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया की जवाबदेही से जुड़ी निर्णायक लड़ाई बता रही है। पार्टी ने नारा दिया है ‘चलो दिल्ली, वोट बचाओ, देश बचाओ।’
निशाने पर हैं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार है। विपक्ष की मांग है कि चुनाव आयोग से जुड़े उसके सवालों का जवाब दिया जाए और ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। दूसरी तरफ रैली के आयोजन दिल्ली के कारोबार पर उसके संभावित असर और उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों से संबंधित आदेश को लेकर बहस ने इस आंदोलन को और राजनीतिक बना दिया है।


कांग्रेस का आरोप है कि रैली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना से सरकार असहज है और उसे कमजोर करने के लिए अलग अलग रास्ते अपनाए जा रहे हैं। कहीं कारोबार प्रभावित होने की दलील सामने रखी जा रही है कहीं कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुंचने में बाधाएं पैदा किए जाने का आरोप है तो कहीं सरकारी नौकरी से जुड़े आदेश को आंदोलनकारियों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने उत्तर प्रदेश के आदेश को तुगलकी फरमान बताते हुए दावा किया कि सरकार रैली से घबरा गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के सामने बाधाएं खड़ी किए जाने का आरोप लगाया है। इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प सवाल व्यापार को लेकर है। रैली से दिल्ली के कारोबार को नुकसान होगा या फायदा? विपक्ष का तर्क है कि हजारों नहीं बल्कि लाखों की संख्या में लोग राजधानी पहुंचेंगे तो होटल, भोजनालय, चाय-नाश्ते की दुकानों, टैक्सी सेवाओं और कपड़ा बाजार को बहुत लाभ मिलेगा। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने हर भारतीय से रैली में शामिल होने की अपील की है। राहुल गांधी के नेतृत्व में एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहा है।

यूपी में सरकारी नौकरी का आदेश आंदोलनकारियों पर दबाव का आरोप

रैली से पहले उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों और सरकारी नौकरी से जुड़े आदेश ने राजनीतिक विवाद को और तीखा कर दिया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस आदेश को ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार एक नवंबर की रैली से घबराकर ऐसे कदम उठा रही है। उनका कहना है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। ऐसे में सरकारी नौकरी से जुड़े प्रावधानों को लेकर उठे सवालों पर सरकार को स्पष्टता देनी चाहिए। इस आदेश के जरिए आंदोलन करने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक सरकार चाहे जितनी कोशिश कर ले युवा छात्र और कार्यकर्ता रैली में शामिल होंगे। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार से जोड़ दिया है। पार्टी की नजर में यह आदेश केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि ऐसे समय में आया कदम है जब विपक्ष सरकार और चुनाव आयोग को घेरने के लिए बड़े प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।

वोट का सवाल, जवाबदेही की मांग और ज्ञानेश कुमार पर निशाना

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी वीडियो संदेश में देशवासियों से एक नवंबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की। उन्होंने रैली को ‘चलो दिल्ली, वोट बचाओ, देश बचाओ’ का नाम देते हुए कहा कि लोकतंत्र पर हमला हो रहा है और अब आवाज उठाने का समय आ गया है। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए हैं और अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस ने इन्हें अपने आंदोलन का प्रमुख आधार बनाया है।वेणुगोपाल का कहना है कि जब विपक्ष सवाल पूछता है तो उसे लाठीचार्ज और हिरासत जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस न चुप होगी और न डरेगी। उनके मुताबिक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं और सत्ता से जवाब मांग रहे हैं। वेणुगोपाल ने देशवासियों से इस संघर्ष में साथ खड़े होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र का भविष्य दांव पर है।

इंडिया गठबंधन की रैली तय कार्यक्रम के अनुसार होगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भी स्पष्ट किया है कि इंडिया गठबंधन की रैली तय कार्यक्रम के अनुसार होगी। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने और मतदाता अधिकारों की रक्षा की मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने संसद से सडक़ तक विपक्ष की आवाज दबाए जाने का आरोप लगाया। वहीं, सांसद मनीष तिवारी ने भाजपा के लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ मार्च पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि छीने गए मताधिकार वापस मिल जाएं तो ऐसे राजनीतिक टकराव की जरूरत ही नहीं रह जाएगी।

प्रियंका गांधी ने रामलीला मैदान पहुंचकर तैयारियों का लिया जायजा

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने रामलीला मैदान पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। इससे पार्टी की ओर से आयोजन को बड़े स्तर पर व्यवस्थित करने की कोशिश का संकेत मिलता है। पवन खेड़ा ने उम्मीद से अधिक लोगों के आने का दावा किया है। दूसरी ओर, रैली में वास्तव में कितने लोग पहुंचेंगे, इसका आकलन आयोजन के दिन ही संभव होगा। फिलहाल कांग्रेस इसे बड़े जनसमर्थन के प्रदर्शन में बदलने की तैयारी कर रही है।

कारोबार के नाम पर विरोध की राजनीति? कांग्रेस ने पूछा- नुकसान किसका होगा

रैली को लेकर एक बड़ा विवाद दिल्ली के व्यापारियों के हितों का भी खड़ा किया जा रहा है। जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े पक्षों की ओर से रैली को व्यापारियों के हितों के खिलाफ बताए जाने के बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध को कारोबार के लिए खतरा बताना अधूरी तस्वीर पेश करना है। यदि देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग राजधानी पहुंचते हैं तो उनके ठहरने भोजन करने स्थानीय परिवहन इस्तेमाल करने और खरीदारी करने से व्यापार को गति मिलेगी। कांग्रेस का यह तर्क राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। किसी बड़े आयोजन से स्थानीय कारोबार पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव संभव हैं। यातायात में बदलाव मार्ग बंद होने या सुरक्षा व्यवस्था से कुछ दुकानों को असुविधा हो सकती है जबकि होटल, भोजनालय, परिवहन और खुदरा बाजार को अतिरिक्त ग्राहक मिल सकते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस व्यापारियों से टकराव के बजाय उनके साथ खड़े होने का संदेश दे रही है। उसका तर्क है कि मताधिकार की रक्षा और व्यापारिक हितों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी हो सकता है और कारोबार भी चल सकता है बशर्ते प्रशासनिक प्रबंध प्रभावी हों और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। विपक्ष अब इसी सवाल के जरिए रैली के विरोध को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।

रैली से मिलेगा व्यापार को फायदा

1- चाय/नाश्ते की दुकानों को ग्राहक मिलेंगे बड़ी संख्या में लोगों के दिल्ली पहुंचने से स्थानीय खानपान कारोबार को अतिरिक्त ग्राहक मिल सकने का कांग्रेस का दावा।
2- होटल और परिवहन क्षेत्र को काम मिलेगा बाहर से आने वाले लोगों की जरूरतों से होटल, टैक्सी, ऑटो और अन्य स्थानीय परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ेगी
3- कपड़ा बाजार को मिलेगा लाभ दीपावली के आसपास खरीदारी करने वाले लोगों से खुदरा बाजार को फायदा होने की संभावना है।
4- असुविधा का समाधान प्रशासन की जिम्मेदारी यातायात, सुरक्षा और मार्ग परिवर्तन से कुछ कारोबार प्रभावित हो सकते हैं। इसका समाधान बेहतर व्यवस्था है न कि लोकतांत्रिक विरोध को स्वत: व्यापार विरोधी घोषित करना।
5- कांग्रेस का सवाल कि यदि रैली में आने वाले लोग स्थानीय बाजारों में खर्च करेंगे तो पूरे आयोजन को व्यापारियों के हितों के खिलाफ बताने का आधार क्या है?

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