हजारों करोड़ के कारोबार की परतें कब खुलेंगी?
एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाता था

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सीबीआई की जांच में सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को अनेक बैंक खातों के जरिए घुमाने कई स्तरों पर लेनदेन करने और हवाला के माध्यम से विदेश भेजने के आरोप सामने आए हैं। एजेंसी ने यह भी कहा है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था। इन आरोपों की जांच के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम आपराधिक साजिश धोखाधड़ी जालसाजी और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध कानून के तहत कार्रवाई हुई है। जुलाई 2026 में सीबीआई ने छह और आरोपियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल करने की जानकारी दी थी।
एजेंसी ने यह भी कहा था कि महादेव ऐप के सिंडिकेट की पूरी पहुंच और उसके राजनीतिक तथा प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है। यानी जांच एजेंसियां खुद मान चुकी हैं कि कहानी में अभी कई परतें खुलनी बाकी हैं। फिर सवाल उठता है कि कार्रवाई की अगली कड़ी क्या होगी? केवल पैनल चलाने वालों और छोटे संचालकों तक जांच पहुंचेगी या प्रचार, वित्तीय लेनदेन, विदेशी नेटवर्क और लाभार्थियों की पूरी श्रृंखला भी सामने आएगी?

जांच एजेंसियों से पांच सीधे सवाल
प्रश्न नम्बर एक: सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद महादेव ऐप के दूसरे प्रमुख आरोपियों और सहयोगियों की तलाश किस चरण में है?
प्रश्न नम्बर दो : हरि शंकर टिबरेवाल के खिलाफ ईडी की अभियोजन शिकायत के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
प्रश्न नम्बर तीन : क्या हरि शंकर टिबरेवाल के संबंध में कोई प्रत्यर्पण प्रस्ताव या अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई लंबित है?
प्रश्न नम्बर चार : अक्षय जाजू की प्रचार भूमिका की जांच किस एजेंसी ने की और उनकी मौजूदा कानूनी स्थिति क्या है?
प्रश्न नम्बर पांच : सट्टेबाजी से कमाई, हवाला लेनदेन और संरक्षण राशि के आरोपों में शामिल सभी लोगों की पहचान और जवाबदेही कब तय होगी?
एक गिरफ्तारी से पूरी जांच खत्म नहीं होती
सौरभ चंद्राकर का ओमान से भारत आना निश्चित रूप से महादेव ऐप मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। लेकिन किसी बड़े नेटवर्क की जांच केवल उसके एक प्रमुख चेहरे की वापसी से पूरी नहीं होती। यह भी जरूरी है कि उसके सहयोगियों, वित्तीय रास्तों, प्रचार तंत्र, विदेशी संपर्कों और संरक्षण देने वालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच भी हो। देश यह जानना चाहता है कि महादेव ऐप के साम्राज्य में किसकी क्या भूमिका थी किसने पैसा बनाया किसने पैसा घुमाया और किसने इस पूरे कारोबार को चलाने में मदद की? जिन नामों का उल्लेख जांच और सार्वजनिक रिपोर्टों में हुआ है उनकी कानूनी स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। सौरभ चंद्राकर भारत आ गया। अब जांच की अगली कड़ी किसके दरवाजे तक पहुंचेगी? अक्षय और हरि टेवरीवाल को लेकर जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं? यही वह सवाल है जिसका जवाब अब टाला नहीं जाना चाहिए।
सौरभ आया बाकी नामों पर जवाब कौन देगा?
महादेव ऐप की जांच के दौरान ऐसे कई नाम सार्वजनिक हुए जिनकी भूमिका अलग अलग स्तरों पर इस घोटाले से जुड़ी बताई गई। इनमें हरि शंकर टिबरेवाल का नाम भी मुख्य रूप से शामिल है। ईडी ने मार्च 2024 में उनके कोलकाता स्थित परिसरों पर तलाशी की कार्रवाई की थी। एजेंसी के मुताबिक जांच में उनके महादेव ऐप के प्रमोटरों के साथ साझेदारी और स्काईएक्सचेंज नाम के सट्टेबाजी मंच से जुड़े होने के सबूत सामने आए। अप्रैल 2024 में ईडी ने अपनी अभियोजन शिकायत में उन्हें आरोपी के रूप में नामित भी किया और अवैध धन के लेन देन की बात भी समाने आयी। अब सवाल यह है कि ईडी की अभियोजन शिकायत में नाम आने के बाद इस मामले में आगे क्या कार्रवाई हुई? क्या उनकी मौजूदा लोकेशन और जांच की स्थिति स्पष्ट है? क्या किसी प्रत्यर्पण प्रस्ताव पर काम चल रहा है? अगर नहीं तो इसकी वजह क्या है? जांच एजेंसियों को इन सवालों पर स्थिति साफ करनी चाहिए।
अक्षय जाजू की भूमिका पर भी हो जवाब
महादेव ऐप के नेटवर्क की चर्चा केवल सट्टेबाजी के पैनल और पैसों के लेनदेन तक सीमित नहीं रही। इस पूरे कारोबार को फैलाने के लिए प्रचार और विज्ञापन की कथित मशीनरी भी जांच के दायरे में आई। कुछ मीडिया रिपोर्टों में अक्षय जाजू और यश चौहान को महादेव ऐप तथा उससे जुड़े मंचों की प्रचार टीम से जुड़ा बताया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोशल मीडिया टेलीग्राम गूगल विज्ञापन और इन्फ्लुएंसर प्रचार के जरिए नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने का काम किया जाता था।ऐसे में जांच एजेंसियों से सवाल बनता है कि क्या प्रचार तंत्र की भूमिका की जांच पूरी हुई? क्या इस नेटवर्क के संचालकों और वित्तीय लाभार्थियों की पहचान कर ली गई? क्या अक्षय जाजू से पूछताछ हुई है? यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आई है तो अब तक की कार्रवाई क्या है?
शाह महाराष्ट्र को कमजोर कर रहे: राउत
एनसीपी में खटास की खबरों पर बोले शिवसेना यूबीटी नेता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेताओं की मुलाकात पर शिवसेना नेता संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह ने महाराष्ट्र को कमजोर करने के लिए एनसीपी के दो गुट बनाए हैं। राउत ने दावा किया कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों का राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि अजित पवार के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अनाथ हो गई है और अब यह केवल शरद पवार की पार्टी है। राउत ने शिवसेना को लेकर भी कहा कि असली शिवसेना केवल उद्धव ठाकरे की है। उनके मुताबिक, दोनों दलों के नेता भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं। शिवसेना नेता संजय राउत ने एक अन्य बयान में दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तिहाड़ जेल पहुंचेंगे। उनका यह बयान सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इन बयानों के जरिए शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने भाजपा, केंद्र सरकार और एनसीपी के दोनों गुटों पर निशाना साधा। संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी चर्चा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा चाहता है। राउत ने तेलंगाना में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ रैली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले ही उसे बचाने की बात कर रहे हैं। राउत ने कहा, हम चर्चा की मांग नहीं कर रहे हैं, हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कल तेलंगाना में लोकतंत्र बचाने के नाम पर रैली की गई। यह रैली उन लोगों ने आयोजित की थी, जो लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। सवाल यह है कि वे आखिर किससे लोकतंत्र को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?
बॉम्बे हाईकोर्ट की बीजेपी को फटकार
दीया मिर्जा का वीडियो फिर से अपलोड करे बीएमसी
पटाखे न जलाने की अपील वाला वीडियो दोबारा शेयर करने केनिर्देश
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई। दिवाली के त्योहार के बीच एक्टर दीया मिर्जा के वीडियो पर छिड़े विवाद को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खत्म कर दिया है। हाई कोर्ट ने उन बीजेपी नेताओं की आलोचना की है, जिन्होंने दीया मिर्जा के वीडियो क्लिप पर सवाल खड़े किए थे। साथ ही, बीएमसी को आदेश दिया है कि एक्टर का वीडियो दोबारा से शेयर करे। आलोचना का सामना करने वाले इस वीडियो में दीया मिर्जा ने नागरिकों से अपील की थी कि वे हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार सार्वजनिक सडक़ों पर पटाखे न जलाएं।
बीएमसी ने इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने के लिए दीया मिर्जा को शामिल किया था, लेकिन बीजेपी नेताओं के विरोध के बाद, इस वीडियो को बीएमसी के सोशल मीडिया हैंडल से हटा दिया गया। इन्हें दीया से इतनी मुहब्बत नहीं जितनी मिर्जा से नफरत है, जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की बेंच ने कहा, कुछ राजनेताओं की बेतुकी टिप्पणियों से वे परेशान हैं और उन्हें याद दिलाया कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। जजों ने बीएमसी को आदेश दिया है कि वह हटाए गए वीडियो को वापस बहाल करे। पर्यावरण के अनुकूल दिवाली पहल के लिए दीया मिर्जा ने एक वीडियो बनाया था, जिसपर सियासी विवाद छिड़ गया। बीएमसी ने मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद इसे हटा दिया था। वहीं, मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने भी इस वीडियो को लेकर दीया को हिंदू-विरोधी करार दे दिया था। पहल खुद बीएमसी की ही थी, जिसका दीया मिर्जा ने समर्थन किया था।
संगरूर में कल राहुल गांधी भरेंगे हुंकार
कांग्रेस की इंसाफ रैली में जुटेंगे कार्यकर्ता
नेता प्रतिपक्ष एकजुटता से आगे नेताओं को जीत का देंगे लक्ष्य, रखेंगे नया रोडमैप
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विस चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी कमर कसना शुरू कर दिया है। अभी हाल में कांग्रेस की ओर से अब तक पंजाब में कराए गए चुनावी सर्वेक्षणों में पार्टी को 62 से 65 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व भी पंजाब में चुनावी तैयारियों को लेकर खासा गंभीर नजर आ रहा है।
राहुल गांधी चार नवंबर को संगरूर की रैली में पार्टी नेताओं के सामने नया रोडमैप रखेंगे। इस रैली से वे पंजाब कांग्रेस को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का लक्ष्य हासिल करने का संदेश देंगे।
28 फरवरी को बरनाला में हुई रैली के दौरान राहुल गांधी ने मंच से ही पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को गुटबाजी छोडक़र एकजुट होने की सख्त नसीहत दी थी। उस समय पार्टी की अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई बड़ी चुनौती थी। अब प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी दोनों बदल चुके हैं। ऐसे में संगरूर रैली में राहुल का संदेश केवल एकजुटता तक सीमित रहने के बजाय चुनावी जीत के लिए सामूहिक प्रयास और संगठन को सक्रिय करने पर केंद्रित रहेगा।
चार महीनों में पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर रही उथल-पुथल
पिछले चार महीनों में पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर काफी उथल-पुथल रही है। अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग की जगह परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष और भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी बनाया गया। इसके बाद हाईकमान ने वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए बैठकों का सिलसिला तेज किया। 26 अक्तूबर को चंडीगढ़ में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और जिला प्रधानों के साथ बैठक कर संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता पर जोर दिया था। इसके बाद 31 अक्तूबर को नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक की। इसमें सचिन पायलट, परगट सिंह, प्रताप सिंह बाजवा, राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठनात्मक तालमेल और चुनावी तैयारियों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने कुछ वरिष्ठ नेताओं से अलग-अलग बातचीत भी की। पार्टी की रणनीति सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडऩे की है।
संगरूर में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
रैली को सफल बनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह और वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला सहित पार्टी के अन्य नेता आयोजन स्थल का निरीक्षण कर चुके हैं। दो नवंबर को भी कांग्रेस नेताओं ने रैली स्थल का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया। पार्टी ने रैली में एक लाख लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है। इसके जरिये मालवा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ कार्यकर्ताओं में चुनावी जोश भरने की कोशिश होगी। राहुल की रैली के मद्देनजर सचिन पायलट भी पंजाब दौरे पर हैं।
संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है। ऐसे में कांग्रेस ने रैली के लिए इस क्षेत्र को चुनकर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति बनाई है। राहुल गांधी के संबोधन में नशे, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर आप सरकार को घेरने के साथ पंजाब के युवाओं और आम लोगों से जुड़े सवाल प्रमुख रह सकते हैं।
पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम चिंता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली में खुलेआम हर तरह के पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने सरकार से इस पर तत्काल ध्यान देने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि उसने सिर्फ लाइसेंस वाले ग्रीन कै्रकर को मंजूरी दी है।
उनके डिब्बे पर पुष्टि के लिए क्यूआर कोड भी छापने के लिए कहा है, लेकिन यह सामने आ रहा है कि सभी तरह के पटाखे बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। जस्टिस एमएम सुंदरेश ने सरकार के वकील एएसजी ऐश्वर्या भाटी से कहा कि रिपोर्ट में एक तस्वीर छपी है। इसमें कहा गया है कि कल के आदेश के बावजूद दुकानों में अब सब कुछ मिल रहा है। कृपया इस पर ध्यान दें। जस्टिस ने कहा कि बताया गया है कि बाजार में हर तरह के पटाखे, चाहे वे लाइसेंस वाले हों या बिना लाइसेंस वाले, क्यूआर कोड वाले हों या बिना क्यूआर कोड वाले, सब कुछ उपलब्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक-7 और 8 नवंबर को सुबह छह से सात बजे और रात आठ से दस बजे तक पटाखे चला सकते हैं। अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और साइलेंस जोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर रोक। 9 नवंबर से पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखे जलाने की इजाजत दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर) को दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दीपावली का त्योहार धार्मिक, सामाजिक और भावनात्मक महत्व रखता है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना इस उत्सव के मूल उद्देश्य को ही निष्फल कर देता है।



