सेक्स स्कैंडल केआरोपी हरि टेवरीवाल पर कौन है मेहरबान
महादेव एप से जुड़े सौरभ को तो ले आई सीबीआई, हरि व अक्षत की बारी कब

- 4PM की खबरों से हिला महादेव का साम्राज्य
- सालों तक कहां सोई थीं एजेंसियां? खबरें चलीं तो सौरभ याद आया
- 4PM पर लगातार डिजिटल हमले करवा रहा है हरि टेवरीवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित और सबसे बड़े घोटाले का जिन्न सोया हुआ था। आरोपी मस्त थे और जांच एजेंसिया भी आराम के मूड में। लेकिन 4PM अपनी जिम्मेदारी न तो कभी भूला है और न ही कभी चूका है। 4PM महादेव एप घोटाले को अपने सभी प्लेटफार्म से लगातार उठाता रहा, छापता रहा, दिखाता रहा जिसका नतीजा यह हुआ कि घोटाले का मास्टर मांइड जोकि ओमान में चैन की जिंदगी गुजार रहा था उसे भारतीय जांच एजेंसियां उठा लाई और अब अदालत में पेशी की तैयारी चल रही है।
देश के सबसे चर्चित महादेव ऑनलाइन बुक के सट्टा साम्राज्य का प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर आखिरकार भारतीय जांच एजेंसियों की गिरफ्त में है। लेकिन क्या इस कार्रवाई के साथ महादेव एप की पूरी कहानी का पर्दा उठ चुका है? बिल्कुल नहीं इस नेटवर्क की जांच में जिन दूसरे नामों और भूमिकाओं का उल्लेख सामने आया है उन पर कार्रवाई का हिसाब अभी बाकी है और देश जानना चाहता है कि हरि टेवरीवाल जांच एजेंसियों की गिरफ्त में कब होगा। अक्षय जाजू की प्रचार टीम से लेकर हरि शंकर टिबरेवाल के खिलाफ ईडी की अभियोजन शिकायत तक कई सवाल अभी भी बाकी है। हमारा सवाल सीधा है कि सौरभ को तो ओमान से सीबीआई टांग लायी लेकिन अक्षय और हरि टेवरीवाल को कब लाएगी?
4PM की आवाज को बंद करने के लिए हमले करवा रहा है हरि टेवरीवाल
4PM की खबरों से बेचैनी का एक और मोर्चा खुल गया है। 4PM की आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। हरि टेवरीवाल वर्चस्व मीडिया के जरिये स्ट्राइक अलग-अलग तरीकों से 4PM के डिजिटल संस्करणों पर स्ट्राइक करवा रहा है। वह 4PM यूट्यूब पर दो स्ट्राइक करवा चुका है यही नहीं उसने 4PM फेसबुक और 4PM इंस्टाग्राम पर भी स्ट्राइक की। आखिर यह कैसा संयोग है कि महादेव ऐप पर सवाल उठाओ और डिजिटल मंचों पर मुश्किलें खड़ी होने लगें? क्या खबरों का जवाब खबरों से देने के बजाय स्ट्राइक से दिया जाएगा? क्या मकसद 4PM को डराना, उसकी पहुंच रोकना और उसे खामोश करना है? अगर आरोप गलत हैं तो सामने आइए जवाब दीजिए सबूत रखिए। लेकिन सवाल पूछने वाले की आवाज पर ही चोट क्यों? 4PM न झुका है न चुप बैठने वाला है। महादेव ऐप के हर सवाल का जवाब चाहिए सौरभ के बाद अगला कौन? अक्षत और हरि टेवरीवाल पर कार्रवाई कब? और 4PM के डिजिटल मंचों पर हो रही घेराबंदी के पीछे कौन है?
लंदन के सेक्स स्कैंडल में भी टेवरीवाल का नाम
महादेव ऐप का मामला हो या लंदन में महिलाओं के यौन शोषण और शोषण के लिए यात्रा की व्यवस्था करने का प्रकरण। नामों की कडिय़ां जितनी खुल रही हैं सवाल उतने ही तीखे होते जा रहे हैं। भारतीय वकील विजय अग्रवाल लंदन में यौन अपराधों के आरोपों में गिरफ्तार हुए। ब्रिटिश अभियोजन पक्ष ने बाद में उन पर बलात्कार और महिलाओं के शोषण के उद्देश्य से यात्रा की व्यवस्था करने से जुड़े आरोप भी लगाए। और इसी प्रकरण में हरि टेवरीवाल का नाम भी अदालत तक पहुंचा। अब सवाल यह है कि विजय अग्रवाल को लंदन बुलाने की परिस्थितियां क्या थीं? इस मामले में अलग-अलग लोगों की भूमिका क्या थी? और क्या महादेव ऐप प्रकरण में सामने आए नामों तथा लंदन की जांच के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि हुई है? इन सवालों के जवाब दस्तावेज और जांच ही दे सकते हैं अटकलें नहीं। दूसरी एक भारतीय पासपोर्ट धारक अक्षत टेवरीवाल के नाम पर लंदन में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति एकदम से इक्टठा हो जाना अपने आप में कई सवाल पैदा कर रही है। सवाल है कि 22 साल के युवक के नाम पर इतनी बड़ी संपत्ति कहां से आई और कैसे आयी? महादेव ऐप से लेकर लंदन के इस मामले तक जांच एजेंसियों को हर सवाल का दस्तावेजी जवाब देना चाहिए। आखिर कौन-सी कडिय़ां जुड़ी हैं, कौन-सी नहीं? किसकी क्या भूमिका है? और जांच की आंच किन-किन तक पहुंची है?
छोटा मोटा घोटाला नहीं है
महादेव ऐप का मामला कोई छोटा मोटा आनलाइन सट्टे का खेल नहीं था। जांच एजेंसियों के मुताबिक क्रिकेट से लेकर फुटबॉल और दूसरे खेलों तक सट्टेबाजी का ऐसा नेटवर्क खड़ा किया गया जिसके तार देश के कई राज्यों से लेकर विदेशों तक फैले थे। पैनल और ब्रांच के जरिए लोगों को जोड़ा गया अवैध कमाई को अनेक बैंक खातों से घुमाया गया और फिर हवाला के रास्ते विदेश भेजे जाने के आरोप सामने आए। सीबीआई ने अपनी जांच में इस नेटवर्क को देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट में शामिल बताया है। इस कहानी का एक बड़ा चेहरा सौरभ चंद्राकर भारत लौट चुका है। 1 नवंबर को सीबीआई की विशेष टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई। उसके खिलाफ दो सीबीआई मामलों में आरोप-पत्र दाखिल हैं और ईडी के मामले में अभियोजन शिकायत दायर की जा चुकी है। 2 नवंबर को दिल्ली की अदालत ने उसे रायपुर ले जाने के लिए सीबीआई को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी। अदालत ने 4 नवंबर तक रायपुर की विशेष अदालत में पेश करने की अनुमति दी है। हालांकि, प्रत्यर्पण के दायरे और सीबीआई मामले में कार्रवाई को लेकर बचाव पक्ष ने आपत्ति उठाई है। इस कानूनी सवाल पर अंतिम निर्णय रायपुर की अदालत को करना है।




