SC का दीपक सिंगला की याचिका पर ED को नोटिस, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दी चुनौती
दीपक सिंगला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत की उम्मीद जगी है।
देश की सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दीपक सिंगला ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद अब मामले में प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष भी सामने आएगा। हालांकि, अदालत की ओर से ईडी को नोटिस जारी किए जाने का मतलब यह नहीं है कि दीपक सिंगला को जमानत मिल गई है। फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंचा है और अब सभी की नजरें ईडी के जवाब तथा सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने ED से मांगा जवाब
24 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दीपक सिंगला की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी किया इस पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।
दीपक सिंगला की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 9 सितंबर 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।
दरअसल, हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दीपक सिंगला की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब शीर्ष अदालत ने ईडी से इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
18 मई को ED ने किया था दीपक सिंगला को गिरफ्तार
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने दीपक सिंगला को 18 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई कथित बैंक धोखाधड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई थी।
जांच का संबंध महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन से है। इस मामले की शुरुआती जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शुरू की थी। बाद में कथित अपराध से अर्जित धन की जांच के लिए ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई शुरू की।
दीपक सिंगला को ईडी की दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में आरोपी बनाया गया था। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर मुख्य आरोपियों को अपराध से अर्जित धन को छिपाने, अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने और विभिन्न खातों एवं संस्थाओं के माध्यम से उसका लेन-देन करने में मदद की। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष के दावों पर आधारित हैं। मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
2018 में CBI ने दर्ज की थी FIR
इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2018 में हुई थी। तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के एक सहायक महाप्रबंधक की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सिंगापुर स्थित सहयोगी कंपनी के माध्यम से कुछ निजी व्यक्तियों और बैंक के एक अधिकारी के साथ कथित मिलीभगत कर विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट (Letter of Credit) में धोखाधड़ी से बदलाव किए।
आरोप के मुताबिक, विदेशी साख पत्रों की रकम को कथित तौर पर अनधिकृत SWIFT संशोधनों के जरिए बढ़ाया गया। इन बदलावों की संबंधित प्रविष्टियां बैंक के फिनैकल (Finacle) सिस्टम में दर्ज नहीं की गई थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित वित्तीय गड़बड़ी के कारण बैंक को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बाद में कंपनी के खिलाफ मूल बकाया राशि लगभग 239.46 करोड़ रुपये बताई गई। सीबीआई ने इस मामले में 10 अगस्त 2020 को आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच आगे बढ़ाई।
21.47 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट को 173.03 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का आरोप
जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट की मूल राशि लगभग 21.47 करोड़ रुपये थी, जिसे कथित तौर पर बढ़ाकर 173.03 करोड़ रुपये कर दिया गया। ईडी की जांच में आरोप लगाया गया कि इस कथित वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए आयात से संबंधित दस्तावेजों में भी गड़बड़ी की गई। इन दस्तावेजों में बिल ऑफ एंट्री, बिल ऑफ लैडिंग और अन्य आयात संबंधी कागजात शामिल बताए गए हैं।
एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों के माध्यम से कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन को वास्तविक दिखाने और धन को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने की कोशिश की गई। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बैंकिंग व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के कई पहलू शामिल हैं।
ED ने दीपक सिंगला की भूमिका पर क्या आरोप लगाए?
प्रवर्तन निदेशालय की दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत में दीपक सिंगला को आरोपी बनाया गया था।हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज अभियोजन पक्ष के आरोपों के अनुसार, दीपक सिंगला की भूमिका महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं के साथ उनके कथित संबंधों के संदर्भ में जांच के दायरे में आई।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि सौरभ एंटरप्राइजेज और जय दुर्गा एंटरप्राइजेज जैसी संस्थाओं के माध्यम से कथित तौर पर धन का लेन-देन किया गया। ईडी का आरोप है कि इन वित्तीय गतिविधियों का उद्देश्य अपराध से अर्जित धन को छिपाना और उसे अलग-अलग खातों तथा कारोबारी संस्थाओं के जरिए आगे बढ़ाना था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका को व्यापक साजिश और अपराध से अर्जित धन के शोधन के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत याचिका?
दीपक सिंगला ने इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2026 को उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
हाईकोर्ट के अनुसार, ईडी की ओर से पेश की गई सामग्री में दीपक सिंगला की भूमिका की जांच व्यापक कथित वित्तीय साजिश के संदर्भ में किए जाने की आवश्यकता बताई गई थी।
अदालत ने यह भी माना था कि केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि याचिकाकर्ता को मूल सीबीआई मामले या पहले की अभियोजन शिकायत में आरोपी नहीं बनाया गया था।इसके बाद दीपक सिंगला ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।



