महाराष्ट्र के किसानों और सूखा प्रभावितों को राहत की आस, हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्य में सूखा प्रभावित लोगों के लिए लागू सभी राहत योजनाओं की जानकारी अदालत के सामने पेश करे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाओं का पूरा ब्योरा बॉम्बे हाई कोर्ट ने मांगा है.

हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्य में सूखा प्रभावित लोगों के लिए लागू सभी राहत योजनाओं की जानकारी अदालत के सामने पेश करे.

मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने राज्य के महाधिवक्ता डॉ. मिलिंद साठे से इन योजनाओं का विवरण उपलब्ध कराने को कहा. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि योजनाओं की जानकारी मिलने से मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को स्पष्ट तस्वीर समझने में मदद मिलेगी.

खंडपीठ ने कहा, “ताकि जब हम मामले की सुनवाई करें, तो हमारे सामने इसकी स्पष्ट जानकारी हो.” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद निर्धारित की है.

भूमिहीन खेत मजदूरों को राहत नहीं मिलने का मुद्दा

यह मामला महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित भूमिहीन खेत मजदूरों, सीमांत किसानों और ग्रामीण श्रमिकों को राहत एवं सामाजिक सुरक्षा देने की मांग से जुड़ा है.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार की मौजूदा राहत योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से जमीन के मालिक किसानों तक सीमित है, जबकि भूमिहीन कृषि मजदूरों को पर्याप्त सहायता नहीं मिल रही है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड और औपचारिक बैंक कर्ज से जुड़ी शर्तों के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद मजदूर सरकारी राहत से वंचित रह जाते हैं.

राहत पैकेज पर उठे सवाल

महाराष्ट्र में इस साल सूखे की गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता बढ़ी है. स्वाभिमानी मजदूर संगठन की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि राज्य के 358 तालुकों में से 305 तालुकों में सूखे की घोषणा की गई है. याचिका में कहा गया है कि मौजूदा राहत उपायों में भूमिहीन खेत मजदूरों और सीमांत श्रमिकों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है.

याचिकाकर्ताओं ने सूखा प्रभावित श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी के आधार पर आर्थिक सहायता, मुफ्त अनाज और भोजन, पीने के पानी की व्यवस्था और पशुओं के लिए चारे की मांग की है. इसके अलावा, सूखे से निपटने के लिए तीन साल की समयबद्ध योजना तैयार करने और उसके क्रियान्वयन की निगरानी अदालत से करने की मांग भी की गई है.

दिवाली के बाद अगली सुनवाई

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को सूखा प्रभावित लोगों के लिए लागू योजनाओं की विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि राहत योजनाओं का लाभ किन वर्गों को मिल रहा है और क्या भूमिहीन मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों तक सहायता पहुंच रही है. मामले की अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद होगी.

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