मोबाइल रिचार्ज ऐप ने 15 लाख लोगों को कैसे लूटा? हजारों परिवार बर्बाद!

एक मोबाइल रिचार्ज ऐप और डिजिटल वॉलेट के नाम पर ऐसा जाल बिछाया गया कि 15 लाख लोग कथित तौर पर ठगी का शिकार हो गए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के वडोदरा से शुरू हुए डिजिटल वॉलेट ऐप एसडी पे ने देशभर में एक विशाल मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटाले का रूप ले लिया.. भारी रिटर्न का लालच देकर अलग-अलग राज्यों के करीब पंद्रह लाख लोगों को इस जाल में फंसाया गया.. अब तक बारह सौ करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हो चुकी है.. वडोदरा की अड़तालीस साल की एक सिंगल मदर टीचर की कहानी इस दर्दनाक सच को बयां करती है.. दो हजार पच्चीस में उन्होंने अपना एक बीएचके फ्लैट बेचकर मिले साढ़े नौ लाख रुपये एसडी पे में लगा दिए.. नेटवर्क चलाने वालों ने भरोसा जीतने के लिए उन्हें एस्क्रो वॉलेट के दस्तावेज.. और एक साइन किया हुआ खाली चेक तक थमा दिया था.. दो हजार छब्बीस के बीच तक उनके वॉलेट का बैलेंस बढ़कर पचास लाख रुपये दिख रहा था.. लेकिन वह एक रुपया भी नहीं निकाल पाईं.. क्योंकि ऐप अचानक पूरी तरह बंद हो गया..

वहीं ठगी की मार सुरेंद्रनगर के एक व्यक्ति पर भी पड़ी.. उसने नया घर बनाने की चाह में खुद के नाम पर बीस लाख, पत्नी के नाम पर बीस लाख का पर्सनल लोन.. और बीस लाख रुपये का गोल्ड लोन लेकर पूरी रकम एसडी पे में लगा दी.. आज वह अपना मूलधन वापस पाने के लिए भी दर-दर भटक रहा है.. मुख्य आरोपी धवल पटेल ने दो हजार चौबीस में इस ऐप को बिल पेमेंट और मोबाइल रिचार्ज आसान बनाने के वादे के साथ लॉन्च किया था.. बाद में इसे रोजाना शून्य दशमलव पंद्रह से शून्य दशमलव तीस प्रतिशत ब्याज देने वाली योजना में बदल दिया गया.. आरोपियों ने खुद को स्वदेशी बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर लोगों की भावनाएं भुनाईं.. पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी का अपना कोई वास्तविक कारोबार या राजस्व नहीं था.. यह पूरी तरह पोंजी मॉडल था, जहां नए जुड़े लोगों के पैसों से पुराने लोगों को रिटर्न दिया जाता था..

सितंबर दो हजार छब्बीस में अमरेली जिले में मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी.. अब तक अठारह एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं.. और एक दर्जन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है.. नॉर्थ गुजरात में पैर पसारने के बाद करोड़ों के पोंजी घोटाले के मुख्य आरोपी धवल पटेल ने गांधीनगर का रुख किया.. वहां उसने एक दुकान खोली, जहां उसकी मुलाकात मार्केटर नरेंद्रसिंह झाला से हुई.. दोनों ने मिलकर लोगों को फंसाने के लिए बड़े पैमाने पर मार्केटिंग का नेटवर्क खड़ा किया.. पुलिस के मुताबिक पूरे खेल का मकसद एसडी पे एप्लिकेशन के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना.. और उन्हें भारी मुनाफे का झांसा देकर निवेश के लिए राजी करना था.. जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपियों ने कुल सात कंपनियां रजिस्टर्ड कराई थीं..

हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी भी कंपनी ने न तो कोई उत्पादन किया.. और न ही कोई वास्तविक सेवा दी.. यह पूरी तरह से एक पोंजी योजना थी.. जिसमें नए निवेशकों से आने वाले पैसों का इस्तेमाल पहले से जुड़े लोगों को भुगतान करने के लिए किया जाता था.. सेमिनार, जूम कॉल और आक्रामक मार्केटिंग के जरिए लोगों का भरोसा जीता गया.. और उनकी जिंदगी भर की बचत हड़प ली गई.. शुरुआत में भारी कैशबैक देने के बावजूद जब ऐप को मनमुताबिक रिस्पॉन्स नहीं मिला तो आरोपियों ने रेफरल कैशबैक का दांव चला.. इसके तहत लेवल एक पर तीस प्रतिशत तक और नीचे लेवल दस से पंद्रह तक के लोगों को तीन प्रतिशत तक कमीशन का वादा किया गया.. इस भारी कमीशन के लालच में कई शुरुआती निवेशकों ने इसे फुल-टाइम काम बना लिया.. और आगे नए लोगों को जोड़ने लगे..

इसका सबसे बड़ा उदाहरण सूरत का एक व्यक्ति है.. जिसने शुरुआत में महज एक हजार रुपये लगाए, एक करोड़ रुपये कमाए.. और अपने नीचे एक लाख साठ हजार निवेशकों की एक विशाल चेन खड़ी कर दी.. तीन महीने की लंबी जांच के बाद भी पुलिस के सामने असली गुनहगारों.. और शिकार बने लोगों को अलग-अलग पहचानने की चुनौती बनी हुई है.. ठगी के इस विशाल चक्रव्यूह में आम किसान, स्कूल टीचर.. और बैंक कर्मचारियों से लेकर पूर्व आईएएस अधिकारी तक अपनी मेहनत की पूंजी गंवा चुके हैं.. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.. वडोदरा की पीड़ित टीचर ने बताया कि शुरुआत में मुनाफे से खुश होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाली थी.. उनकी सत्तर साल की बुजुर्ग मां, विधवा बहन.. और भाई समेत परिवार के ग्यारह लोगों ने तीस लाख रुपये.. और बीस सहकर्मियों ने बारह लाख रुपये लगा दिए..

 

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