अखिलेश यादव का CEC ज्ञानेश कुमार पर निशाना, बोले- ‘अब चुनाव मुचुआ आ गए’

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र संस्थाएं स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पातीं तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि स्वतंत्र संस्थाएं स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पातीं तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है.

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है. अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, ‘मुंह नुचुआ’ तो सुना था अब ‘चुनाव मुचुआ’ आ गए हैं. अब एक देश का एक मत…भ्रष्ट ‘मुचुआ’ दें त्यागपत्र! बाकी मतलब समझने के लिए Gen-Z और जागरूक हो चुकी जनता बहुत समझदार है.

जब से अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग में अनबन और दो चुनाव आयुक्तों की अनदेखी को लेकर खुलासा किया है, तब से ज्ञानेश कुमार निशाने पर आ गए हैं. यह मुद्दा देश की सियासत में पूरी तरह से गरमा गया है. चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्षी लगातार निशाना साध रहे हैं. उनके हटाए जाने की मांग कर रहे हैं.

अखिलेश का यह ट्वीट भी एक तरह से चुनाव आयोग और सीईसी की साख पर सीधा हमला है. अखिलेश ने कल यानी बुधावार को भी चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधा था. अखिलेश ने कहा कि 10 महीनों में 14 बार कई अधिकारियों ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई. चुनाव आयोग किसके खिलाफ अपना काम कर रहा था? जो निष्पक्ष संस्था है वो भी निष्पक्ष नहीं रही.

‘सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना अपराध’
अखिलेश ने कहा कि इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं. एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं. सपा चीफ ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है. ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है. अखिलेश ने ये भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय इस पर स्वत: संज्ञान ले.

‘मुंहनोचवा’ शब्द कहां से आया?
अब ‘मुंहनोचवा’ को भी जान लीजिए. दरअसल, ये शब्द 1990 और 2000 के दशक में काफी प्रचलित था, खासकर बिहार और यूपी में. उस समय लोगों के बीच एक अजीब दहशत फैल गई थी कि कोई ऐसा आएगा जो मुंह नोच लेगा. शाम होते-होते लोग अपने घरों में कैद हो जाते थे.

Related Articles

Back to top button