बागियों के लिए अखिलेश का नया फरमान, BJP परेशान!
सूबे की सियासत इन दिनों नए समीकरण बना रही है। भले ही विधानसभा चुनाव में अभी वक़्त हो लेकिन राज्य में चुनाव को लेकर तैयारियां अभी से ही तेज हो गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सूबे की सियासत इन दिनों नए समीकरण बना रही है। भले ही विधानसभा चुनाव में अभी वक़्त हो लेकिन राज्य में चुनाव को लेकर तैयारियां अभी से ही तेज हो गई है।
सभी दल अपने खेमों में मजबूती दिलाने में जुट गए हैं। बात की जाए सपा की तो भले ही सत्ता में न हो लेकिन पार्टी के कार्यकर्त्ता से लेकर नेता तक चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। लेकिन बीच बागी विधायकों को लेकर सपा की तरफ से बड़ा बयान दिया गया है। बता दें सपा ने अपने बागी विधायकों की वापसी का फॉर्मूला तय कर दिया है। जिस रास्ते पार्टी से बाहर गए थे, उसी रास्ते से होकर अंदर आ सकते हैं। यानी, पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में उन्होंने क्रॉस वोटिंग की थी और इसी साल होने वाले राज्यसभा चुनाव में वोट देकर वे पार्टी में पुनः प्रवेश कर सकते हैं।
सपा के कई बागी विधायक इन दिनों सत्ताधारी दल में अपेक्षित महत्व न मिलने से असहज चल रहे हैं। उनमें से एक-दो विधायक सपा नेतृत्व के संपर्क में भी आए हैं। सूत्रों के मुताबिक सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन बागी विधायकों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। वहीं बात की जाए नेताओं के बगावत की तो फरवरी 2024 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों का चुनाव हुआ था। यूपी में भाजपा के पास बहुमत था, इसलिए उसे 8 सीटें मिलनी तय थी। सपा को 2 सीटें मिलनी थीं। लेकिन यहां खेल बिगड़ा। सपा के 7 विधायकों ने पार्टी की लाइन तोड़ी और भाजपा के उम्मीदवार संजय सेठ को वोट दे दिया। इन बागियों के नाम थे – मनोज पांडे, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, राकेश पांडे, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी और अशुतोष मौर्य।
इस क्रॉस वोटिंग की वजह से भाजपा को फायदा हुआ। उसने 8 सीटें जीत लीं। सपा का तीसरा उम्मीदवार, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, हार गए। सपा को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। यह बड़ा उलटफेर था। सपा ने गुस्सा दिखाया और 4 बागी विधायकों – मनोज पांडे, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और पूजा पाल को पार्टी से निकाल दिया। बाकी पर भी पार्टी नाराज थी।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं। यूपी की 403 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 2022 से सरकार चला रही है। अखिलेश यादव की सपा विपक्ष में है और 2024 लोकसभा में कुछ अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन अंदरूनी कलह खत्म नहीं हुई। अब राज्यसभा में नया दौर शुरू होने वाला है। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें 25 नवंबर 2026 को खाली होने वाली हैं। इनके चुनाव उससे पहले होंगे। सपा ने इन चुनावों को लेकर एक साफ रणनीति बना ली है। पार्टी कह रही है कि बागी विधायक उसी रास्ते से लौटें जिस रास्ते से गए थे। मतलब, पिछले चुनाव में जो क्रॉस वोटिंग की थी, उसकी भरपाई अब सपा के उम्मीदवारों को वोट देकर करो।
अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि वापसी का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन शर्तें हैं। अगर बागी नेता संपर्क करें और इस बार सपा के उम्मीदवार को वोट दें तो बिना लिखित माफी के भी वापस लिया जा सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन व्यावहारिक तरीके से भी काम करना है। यानी बागी अगर सपा को मजबूत करने में मदद करें तो उन्हें मौका मिल सकता है। यह ‘खेला’ शुरू हो गया है। अब हर कोई देख रहा है कि ये 7 बागी क्या करते हैं। अगर वे सपा के पक्ष में वोट देते हैं तो वापस आ सकते हैं। अगर नहीं तो बाहर ही रहेंगे।
क्योंकि 2027 के चुनाव में हर वोट और हर विधायक मायने रखता है। यूपी में मुस्लिम-यादव वोट बैंक सपा का आधार है, लेकिन पिछड़े और दलित वोट बंटे हुए हैं। अगर बागी लौट आए तो सपा की ताकत बढ़ेगी। ज्यादा सीटें लड़ने और जीतने में मदद मिलेगी। दूसरी तरफ भाजपा भी इन बागियों को अपने पास रखना चाहती है ताकि सपा कमजोर रहे। राजनीति में ऐसे बागी अक्सर ‘घोड़ा व्यापार’ का हिस्सा बन जाते हैं। पैसे, मंत्रिपद या अन्य लालच दिए जाते हैं। लेकिन सपा इस बार सख्त दिख रही है।
अगर सपा के बागी इस बार सही वोट देते हैं तो यह संदेश जाएगा कि पार्टी मजबूत है और बागी वापस आ सकते हैं। इससे अन्य नाराज नेताओं को भी लगेगा कि सपा में रहना फायदेमंद है। वहीं अगर क्रॉस वोटिंग फिर हुई तो भाजपा और मजबूत हो जाएगी। यूपी में भाजपा के पास अभी भी विधानसभा में बहुमत है, इसलिए राज्यसभा में भी उसे फायदा हो सकता है। लेकिन 2027 से पहले यह उलटफेर समीकरण बदल देगा।



