बरेली PWD में 1.28 करोड़ का कथित घोटाला, चार कर्मचारियों का वेतन रोका; आरोपी अधिशासी अभियंता पर कार्रवाई क्यों नहीं?
लोक निर्माण विभाग (PWD) के भवन खंड में वेतन और एरियर भुगतान के नाम पर 1.28 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 अक्टूबर को प्रस्तावित बरेली दौरे से पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) के भवन खंड में 1.28 करोड़ रुपये से अधिक के कथित फर्जी भुगतान का मामला चर्चा में है।
वेतन और एरियर के नाम पर फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए सरकारी धन निकाले जाने के आरोपों ने विभाग की भुगतान व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में चार कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है और एक कर्मचारी के निलंबन की संस्तुति की गई है, लेकिन पुलिस में तहरीर दिए जाने के करीब एक सप्ताह बाद भी FIR दर्ज न होने की बात सामने आई है।
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले इस मामले में कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल यह है कि जब जांच में 11 में से 10 कर्मचारियों के नाम पर किए गए भुगतान फर्जी बताए जा रहे हैं, तो कथित अनियमितता के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी? भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच और सरकारी धन जारी करने की प्रक्रिया में किसकी भूमिका थी, इसका स्पष्ट जवाब अभी सामने आना बाकी है।
दो भुगतान प्रकरणों में निकले 1.28 करोड़ रुपये
मामला 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के बकाया वेतन तथा एरियर भुगतान से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक प्रकरण में 67.57 लाख रुपये और दूसरे में 61.04 लाख रुपये निकाले गए। दोनों की कुल रकम 1 करोड़ 28 लाख 61 हजार रुपये है। जांच में 11 में से केवल एक अवर अभियंता के 94,589 रुपये के बिल को सही पाया गया, जबकि शेष 10 के नाम पर किए गए भुगतान फर्जी बताए गए हैं। बताया गया है कि संबंधित कर्मचारी अब विभाग में तैनात नहीं हैं।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भुगतान के लिए प्रस्तुत बिलों और हस्ताक्षरों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी थी, तो भुगतान की मंजूरी कैसे मिली और सरकारी धन की निकासी को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका? इन सवालों का जवाब जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई की दिशा तय करेगा।
चार कर्मचारियों पर कार्रवाई
अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार ने प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र पाल, खंडीय लेखाधिकारी राहुल शर्मा, तत्कालीन आहरण-वितरण सहायक रितेश आनंद और पटल सहायक अभिषेक चंदन कुमार का वेतन रोकने की कार्रवाई की है। जांच पूरी होने और वेतन बिल मिलने तक वेतन रोकने का आदेश दिया गया है। अभिषेक चंदन कुमार के निलंबन की संस्तुति भी अधीक्षण अभियंता को भेजी गई है।
वहीं, तहरीर में तत्कालीन अधिशासी अभियंता वीणा कुमार और वर्तमान अधिशासी अभियंता अब्दुल सत्तार के नाम भी शामिल बताए गए हैं। ऐसे में भुगतान की स्वीकृति, दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच अहम है। हालांकि, तहरीर में नाम शामिल होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
तहरीर के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं
अधिशासी अभियंता की ओर से कोतवाली में तहरीर दिए जाने के करीब एक सप्ताह बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। पुलिस ने संबंधित कर्मचारियों के हस्ताक्षरों के नमूने मांगे हैं। खबर के मुताबिक, नमूने उपलब्ध नहीं होने के कारण FIR की प्रक्रिया अटकी हुई है। अब सवाल है कि करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है और मुकदमा दर्ज करने पर निर्णय कब तक होगा। मामले में दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और हस्ताक्षरों की जांच के आधार पर तथ्य सामने लाना जरूरी है।
जांच में दोषी मिलने पर कार्रवाई का दावा
PWD के अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र के मुताबिक, मामले की जांच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक कर्मचारी के निलंबन संबंधी पत्र मिलने और चार कर्मचारियों का वेतन रोके जाने की जानकारी होने की बात कही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 12 अक्टूबर के बरेली दौरे से पहले इस प्रकरण में विभागीय जांच, पुलिस कार्रवाई और सरकारी धन की निकासी से जुड़े रिकॉर्ड पर नजर रहेगी। अब देखना होगा कि जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और कथित अनियमितता के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
रिपोर्ट –सुनील सक्सेना,बरेली



