मोदी के सांसदों को राहुल का करारा जवाब, वीडियो जारी होते ही सरकार ने खींचे हाथ
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जमकर हमला बोला, कहा कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया, किसानों के हितों का सरेंडर कर दिया, तो बीजेपी को ऐसी तगड़ी मिर्ची लगी कि सदन में खलबली मच गई!

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर जमकर हमला बोला, कहा कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया, किसानों के हितों का सरेंडर कर दिया, तो बीजेपी को ऐसी तगड़ी मिर्ची लगी कि सदन में खलबली मच गई!
मोदी के मंत्री लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें रोक नहीं पाए, तो वो छटपटाने लगे। राहुल पर ताबड़तोड़ आरोप लगाने लगे, धमकियां देने लगे। खिसियाहट में चिल्लाने लगे कि सारे आरोपों का सबूत दो।
Authenticate करो वरना तुम्हारे खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएंगे, सदस्यता छीन लेंगे, एफआईआर दर्ज कर देंगे, तुम्हें कभी चुनाव लड़ने लायक नहीं छोड़ेंगे। निशिकांत दुबे जैसे बीजेपी सांसद तो सदन में खड़े होकर राहुल को जॉर्ज सोरोस का एजेंट तक बता डाले और प्रस्ताव पेश करने की धमकी देने लगे। लेकिन राहुल गांधी चुप बैठने के बजाय सीधे एक वीडियो जारी कर देते हैं और प्रधानमंत्री मोदी, निशिकांत दुबे और पूरी बीजेपी सरकार को मुंहतोड़ जवाब ठोकते हैं।
वो दुबक कर बैठने के बजाय साफ-साफ कह देते हैं कि चाहे एफआईआर कर लो, चाहे मुकदमा ठोक दो, चाहे प्रस्ताव ले आओ। मैं लड़ता रहूंगा! किसानों के लिए, देश के हितों के लिए मैं पीछे नहीं हटूंगा। तो कैसे बीजेपी वाले राहुल को डराते रहे, धमकियां देते रहे और कैसे राहुल गांधी ने वीडियो जारी करके सबके मुंह पर तमाचा जड़ दिया.
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कल कीचड़ उछालने के लिए बीजेपी ने भरसक प्रयास किया गया। उनपर आरोपों की बौछार की गई। उनके खिलाफ प्रस्ताव लाने की चर्चा चलती रही। बीजेपी नेताओं ने मीडिया में बयान देते रहे। लेकिन आखिर में सब टांय टांय फिस्स हो गया। अब देखिए पहले तो राहुल गांधी को सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा था। क्योंकि कहीं न कहीं बीजेपी जानती थी कि अगर अभी राहुल गांधी को बोलने का मौका दिया गया तो वो सदन में यूएस ट्रेड डील जैसे मुद्दों को लेकर मोदी सरकार की धज्जियां उड़ा देंगे। और जैसा कि उम्मीद थी राहुल गांधी ने कुछ किया भी वैसा ही। राहुल गांधी ने सदन में यूएस से हुए ट्रेड डील पर मोदी सरकार को बुरी तरह से तोड़ डाला।
केंद्रीय मंत्रियों के सामने उनके सुप्रीम लीडर की संसद में भारी बेइज्जती हुई थी तो वो कहां चुप बैठने वाले थे। निशिकांत दूबे जैसे सांसद जो दिन रात मंत्री बनने के ट्राई करते रहते हैं, उन्होंने अपनी वफादारी साबित करने के लिए राहुल गांधी पर बिना किसी आधार और authentication के बेबुनियाद आरोप लगाए और उनकी संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित कर दिया।
अब जहां एक तरफ संसद के अंदर निशिकांत दूबे राहुल गाँधी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर रहे थे तो वहीं संसद के बाहर किरेन रिजजू राहुल गांधी को संसद का पाठ पढ़ा रहे थे और नोटिस भेजने की धमकी दे रहे थे।
अगर कोई छप्पन इंची नेता होता तो इन प्रस्तावों और सदस्यती खोने के डर स चुप्पी मारकर बैठ जाता। लेकिन जिसके पास खोने को कुछ नहीं उसे डर कैसा। राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए एक पोस्ट लिखा। जिसमें उन्होंने साफ लिखा कि- “FIR हो, मुकदमा दर्ज हो या Privilege प्रस्ताव लाएं – मैं किसानों के लिए लड़ूंगा। यानि राहुल ने साफ कर दिया इन सब चीजों स् डरकर वो चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने आगे लिखा कि, जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है। राहुल ने आगे कहा कि, अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अब सियासत में सीधी भिड़ंत का दौर शुरू हो चुका है। एक तरफ सत्ता की ताकत, विशेषाधिकार प्रस्ताव और मुकदमों की चेतावनी है, तो दूसरी तरफ खुली चुनौती और टकराव की राजनीति। लेकिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस तेवर के साथ अपनी बात रखी, उसने यह संकेत दे दिया कि वो दबाव में आने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सांसद निशिकांत दुबे समेत कई नेताओं को ये साफ संदेश दे दिया है कि उन्हें जितना दबाने की कोशिश की जाएगी वो उतना उभरकर आएंगे। और अब चाहे जो हो लेकिन वो किसानों और देश के मुद्दों पर वो पीछे नहीं हटेंगे।



