बंग्लादेश के रहमान बने तारिक

  • ढाका का फैसला भारत के लिए नई परीक्षा
  • तारिक रहमान की वापसी से बदला बंग्लादेश का सियासी नक्शा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बंग्लादेश की जनता ने फैसला सुना दिया है। वर्षों से विपक्षी भूमिका निभा रही बीएनपी को जनता ने चुन लिया है। खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बंग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। बंग्लादेश की जनता का यह फैसला सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं हैं बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। बांग्लादेश के आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने 200 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। लंबे समय से विपक्ष में रही पार्टी अब सत्ता के दरवाज़े पर दस्तक दे चुकी है और इस जीत का चेहरा बने हैं तारिक रहमान वही नेता जिन्हें कभी निर्वासन, मुकदमों और राजनीतिक अनिश्चितता का प्रतीक माना जाता था। यह चुनाव सिर्फ सीटों का गणित नहीं था यह सत्ता बनाम असंतोष की लड़ाई बन चुका था। विकास बनाम लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और भारत निकट नीति बनाम राष्ट्रवादी पुनर्संतुलन की लड़ाई भी था। मतदाताओं ने जिस तरह से बदलाव की ओर झुकाव दिखाया है उसने पूरे क्षेत्र की कूटनीतिक दिशा पर असर डाला है।

तारिक रहमान कौन हैं और उनका उदय क्यों अहम है?

तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के कार्यकारी चेयरमैन है। वह लंबे समय तक लंदन में निर्वासन में रहे। भ्रष्टाचार के मामलों और राजनीतिक मुकदमों के बीच उनका करियर ठहर सा गया था। लेकिन हाल के वर्षों में उन्होंने पार्टी संगठन को पुनर्जीवित किया युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया और सरकार विरोधी असंतोष को संगठित रूप दिया। इस चुनाव में उनका अभियान राष्ट्रीय गरिमा और संस्थागत संतुलन के मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने अवामी लीग के केंद्रीकृत शासन माडल के खिलाफ लोकतांत्रिक स्पेस, प्रेस स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनाव की मांग को राजनीतिक एजेंडा बना कर चुनाव लड़ा और यही नैरेटिव जनता के एक बड़े वर्ग में गूंजता दिखा।

भारत के लिए क्या मायने?

बंग्लादेश से आये चुनावी नतीजों से कहानी दिलचस्प और जटिल हो जाती है। शेख हसीना के दौर में भारत-बांग्लादेश संबंध अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए थे। सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी, सुरक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी में नई ऊंचाइयां देखी गयी। अब सवाल है क्या तारिक रहमान के नेतृत्व में ढाका नई दिल्ली से दूरी बनाएगा? बीएनपी का ऐतिहासिक रुख अपेक्षाकृत अधिक राष्ट्रवादी और चीन ओरिएंटेड माना जाता रहा है। हालांकि चुनावी भाषणों में तारिक ने भारत-विरोधी तीखा रुख नहीं अपनाया लेकिन संतुलित विदेश नीति की बात जरूर की। इसका मतलब यह हो सकता है कि ढाका बीजिंग, वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश करे। भारत के लिए यह कूटनीतिक परीक्षा का क्षण है और बड़ा सवाल जिसका उत्तर मिलना बाकी है कि क्या वह बीएनपी सरकार के साथ उसी सहजता से तालमेल बैठा पाएगा जैसा अवामी लीग के साथ था?

पीएम मोदी ने दी बधाई

पीएम मोदी ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने पर बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता के उनके नेतृत्व पर भरोसे को दर्शाती है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री चुनावों में बीएनपी को बड़ी जीत दिलाने के लिए मैं तारिक रहमान को दिल से बधाई देता हूं। यह जीत बांग्लादेश के लोगों का आपके लीडरशिप पर भरोसा दिखाती है। भारत एक डेमोक्रेटिक, प्रोग्रेसिव और सबको साथ लेकर चलने वाले बांग्लादेश के सपोर्ट में खड़ा रहेगा। पीएम मोदी ने पोस्ट में आगे लिखा है कि मैं हमारे कई तरह के रिश्तों को मजबूत करने और हमारे कॉमन डेवलपमेंट गोल्स को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ काम करने का इंतजार कर रहा हूं।

हिंदुओं पर अत्याचार बंद हों

भाजपा नेता आरपी सिंह ने बांग्लादेश के संसदीय चुनाव को लेकर कहा है कि वहां की अगली सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हिंदुओं पर अत्याचार न हो। भाजपा नेता ने कहा कि हमें उम्मीद है कि चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुए हैं। जो भी सरकार सत्ता में आएगी वह यह पक्का करेगी कि हिंदुओं पर अत्याचार जारी न रहें। एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने कहा है कि बांग्लादेश में डेमोक्रेसी वापस आना भारत के नजरिए से भी जरूरी है। एनसीपी नेता आनंद परांजपे के मुताबिक सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हमारे पड़ोसी देश में लोकतंत्र बहाल हो। आज बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार के लिए चुनाव हो रहे हैं जो एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा कि यह भी ध्यान देने योग्य है कि वहां अल्पसंख्यक हिंदू लगातार हमलों का सामना कर रहे हैं। केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। फिर भी बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी भारत के हित में भी है।

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