सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान,इसी हफ्ते होगी सुनवाई
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ED की कार्रवाई को चुनौती दी है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय की गिरफ्तारी के खिलाफ कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ED की कार्रवाई को चुनौती दी है। अब इस मामले में सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से उनके वकील अपना पक्ष रखेंगे। वहीं, इस मामले में ED का पक्ष भी सामने आ सकता है।
इसी हफ्ते हो सकती है सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाए जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने इसी हफ्ते याचिका सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। ऐसे में जल्द ही इस मामले पर अदालत में सुनवाई हो सकती है। हालांकि, सुनवाई की निश्चित तारीख और अदालत का अंतिम फैसला सामने आना अभी बाकी है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
आजम खान ने अपनी याचिका में 29 अक्टूबर को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के बाद 31 अक्टूबर को रामपुर जेल से रिहाई के महज 40 मिनट बाद ED की ओर से की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है. उनका कहना है कि रिहाई के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. इसके साथ ही आजम खान ने गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत की ओर से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश को भी रद्द करने की मांग की है.
क्या है पूरा मामला?
आजम खान को ईडी ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है. यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसके संस्थापक आजम खान हैं. ईडी का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने ठेके की रकम का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया. इसके बाद ट्रस्ट को दान के रूप में पैसा दिया गया.
क्या है पूरा मामला?
आजम खान को ईडी ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है. यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ा है, जिसके संस्थापक आजम खान हैं. ईडी का आरोप है कि सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने ठेके की रकम का एक हिस्सा यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाया. इसके बाद ट्रस्ट को दान के रूप में पैसा दिया गया.



