राहुल ने लगाए गंभीर आरोप, बीजेपी कर रही महारैली को बदनाम करने की साजिश!

राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका समेत कई नेता एक ही बस में सवार हैं. गठबंधन का काफिला मिंटो रोड से रामलीला मैदान की ओर बढ़ चुका है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपाई किस तरह से राहुल गांधी और विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश करते हैं ये बात आप बखूबी समझते हैं। जब-जब बीजेपी सवालों में घिरती है तब-तब विपक्ष को बदनाम करने के लिए साजिशें करने लगती है। वहीं इसी बीच वोट चोरी के खिलाफ चल रही महारैली को बदनाम करने की भाजपा ने पूरी कोशिश की लेकिन उसकी यह कोशिश नाकाम नजर आई।

इंडिया गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रैली कर रहा है. राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका समेत कई नेता एक ही बस में सवार हैं. गठबंधन का काफिला मिंटो रोड से रामलीला मैदान की ओर बढ़ चुका है. गठबंधन के नेता सबसे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर जुटे थे. इसके बाद वे खुली बसों के जरिए रवाना हुए. और इस रैली को कामयाब बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

गठबंधन की रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. रैली में विपक्षी दलों की भागीदारी, चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे के साथ-साथ कारोबारियों की चिंताओं को लेकर अलग-अलग नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं. एआईएमआईएम ने स्पष्ट किया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उसे रैली के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया है. वहीं, भाजपा और जदयू के नेताओं ने रैली को सत्ता हासिल करने के लिए विपक्ष की बेचैनी करार दिया है।

दरअसल रैली को लेकर दिल्ली के व्यापार संगठनों और बीजेपी ने कारोबार प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए। वहीं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी करते हुए भाजपा के सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया है। राहुल गांधी ने रामलीला मार्च के दौरान कहा कि हमने रैली में आने वालों से यहां शॉपिंग करने की अपील की थी, जिससे दुकानदारों का फायदा हो सके। लेकिन कनॉट प्लेस आते समय पता चला है कि भाजपा ने जबरदस्ती सारी दुकानें बंद करवा दी हैं। देश देख रहा है कि भाजपा दुकानदारों का नुकसान कर रही है।

इससे पहले भी राहुल गांधी लोगों से अपील कर चुके हैं। जिससे की दुकानदारों को नुक्सान का हो सके। रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की विशाल रैली में शामिल होने वालों से अपील करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वे दिल्ली के बाजारों में जाकर त्योहारों की खरीदारी करें और स्थानीय दुकानदारों का समर्थन करें।

व्यापार संघों ने आर्थिक कामकाज में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता जताई थी, जिस पर राहुल गांधी ने कहा कि इस बड़े प्रदर्शन से व्यापारियों को नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें आर्थिक फायदा ही होगा और उनकी त्योहारों की बिक्री बढ़ेगी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “लाखों लोग रामलीला मार्च के लिए दिल्ली आ रहे हैं। त्यौहारों का मौसम है। दिवाली, छठ, भाईदूज का समय है। मैं चाहता हूं जो लाखों लोग बाहर से दिल्ली आ रहे हैं, वो यहां के व्यापारियों की मदद करें।”

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आगे कहा, “प्रोटेस्ट, मार्च, रैली कीजिए, साथ में थोड़ी सी खरीदारी भी कीजिए – व्यापारियों का फायदा हो जाएगा। मैं जानता हूं व्यापारियों को रैली नुकसान नहीं पहुंचाएगी। बीजेपी डरी हुई है इसलिए अफवाह फैला रही है। मगर, दोनों काम करते हैं। मार्च होगा, रैली होगी और लाखों लोग हमारे व्यापारियों की छोटी-छोटी दुकानों में से सामान खरीदेंगे। आप सबको बहुत-बहुत प्यार।”

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने पहले ही इस प्रदर्शन के समय और जगह को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग और चावड़ी बाजार जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस कारोबारी संगठन ने आशंका जताई कि इतने बड़े पैमाने पर होने वाली राजनीतिक भीड़ से स्थानीय आवाजाही ठप हो सकती है और त्योहारों की खरीदारी के पीक सीजन में व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

व्यापारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को लाने वाली हजारों बसें और निजी गाड़ियां पुरानी दिल्ली की तंग गलियों को पूरी तरह जाम कर सकती हैं। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से आग्रह किया कि वे या तो इस प्रदर्शन को टाल दें या फिर इसे व्यापारिक केंद्रों से दूर किसी दूसरी जगह पर आयोजित करें।

दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने शुक्रवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली पार्टी की प्रस्तावित मेगा रैली को टाल दें। सीटीआई ने चेतावनी दी कि इस रैली के कारण राजधानी के 20 बाजारों में 10000 से 12000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। सीटीआई ने पत्र में कहा, “दिल्ली के 20 लाख व्यापारियों की ओर से मांग है कि इस रैली को दिवाली बाद 10-11 नवंबर के बाद कर दिया जाए।

सीटीआई ने कहा, “हम रैली का विरोध नहीं कर रहे, हम दिवाली के पीक सीजन में अपनी रोजी रोटी बचाने के लिए हाथ जोड़कर विनती कर रहे हैं। 6 नवंबर को धनतेरस है और 8 नवंबर को दिवाली है, 1 नवंबर उसकी तैयारी का सबसे पीक दिन है, अगर 1 नवंबर को 10 लाख लोग और 15-20 हजार वाहन सेंट्रल दिल्ली में आए तो 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोजाना होने वाला 10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप हो जाएगा।”

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने सोनिया गांधी से दो मांगे की थी। उन्होंने कहा, “1 नवंबर की रैली को दिवाली बाद – 10-11 नवंबर के बाद कर दिया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली पर कारोबार में कोई भी विघ्न ना पड़े। अगर रैली करनी ही है तो रामलीला मैदान से हटाकर बुराड़ी मैदान में की जाए जहां 15000 गाड़ियों की पार्किंग की जगह हो।”

कांग्रेस की रैली से जहां व्यापारियों को नुकसान की बात कही गई है, वहीं इसका दूसरा पहलू भी सामने आता है। जब भी कोई शख्स किसी दूसरे राज्य से दिल्ली आता है, तो वह अमूमन कुछ-न-कुछ खरीदकर ही जाता है। चूंकि रैली में 10 लाख लोगों के आने की बात कही गई है। राहुल गांधी की अपील का असर रैली के आए लोगों पर पड़ता है, तो व्यापारियों को अच्छा मुनाफा हो सकता है। अगर मान लें कि एक शख्स खरीदारी, खाने-पीने आदि में औसतन 500 रुपये खर्च करता है, तो ऐसे में 10 लाख लोग करीब 50 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। यानी यह रकम दिल्ली के कारोबारियों की जेब में जाएगी।

कारोबारी संगठनों का यह कहना कि रैली से करीब 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हो सकता है, रविवार को यह आंकड़ा काफी कम हो सकता है। दिल्ली के बड़े बाजारों में सोमवार से शनिवार के दिनों में ज्यादा कारोबार होता है। रविवार को बाजार बंद होने के कारण कारोबार कम होता है। ऐसे में रविवार को बाजार बंद होने के दौरान रैली में आए लोगों की खरीदारी की वजह से व्यापारियों को फायदा हो सकता है। यानी रविवार को बाजार बंद होने से रैली के कारण कारोबार पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

हालांकि एक तरफ जहां व्यापारियों को आगे किया जा रहा है वहीँ दूसरी तरफ भाजपाइयों ने अलग ही रोना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में आपको बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं से एक अपील की है। उन्होंने कहा, ”आज ही के दिन 1984 में दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में सिख समुदाय का नरसंहार हुआ था। ऐसे दिन दिल्ली में इतना हंगामा करना सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

आप यह रैली किसी दूसरे दिन भी कर सकते थे, लेकिन शायद सिख समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता आपके डीएनए में है। खैर, जब आप सभी इस समय एक ही जगह पर जुटे हैं, तो कम से कम मंच से देश के सिख समुदाय से माफी मांगिए और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखिए। आपकी दादी की हत्या का बदला लेने की आग में आपके पिता और उनके सहयोगियों के नेतृत्व में 3,000 से अधिक सिखों का कत्लेआम किया गया था। एक बार माफी मांग लीजिए और फिर अपना कार्यक्रम जारी रखिए।”

इसी बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “मुझे यह देखकर हंसी आती है कि क्या वे देश के मतदाताओं को मूर्ख समझते हैं? अगर उनका दावा है कि 13 करोड़ नाम प्रभावित हुए हैं, तो वे इसका पूरा ब्योरा क्यों नहीं देते? इनमें से कितने नाम मृत लोगों के हैं? कितने नाम मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों के हैं? कितने ऐसे लोगों के नाम हैं, जिनका पता सत्यापित नहीं किया जा सका? अगर उनमें हिम्मत है, तो उन्हें गांव-गांव जाकर लोगों से पूछना चाहिए कि उनके परिवारों के कितने नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। जनता को मूर्ख मत समझिए। कोई वोट चोरी नहीं हुई है, लोगों ने चोरों को वोट देना बंद कर दिया है।

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