Trump के लिए बुरी खबर ! 66 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक नाखुश, सड़कों पर उतरे
अमेरिका है जिसने 2024 में ट्रंप को दोबारा सत्ता में बैठाया था...तब लोगों को उम्मीद थी कि वो महंगाई कम करेंगे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: चले तो थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप…इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर अटैक करके कब्जा करने, लेकिन ईरान के बैक-टू-बैक पलटवार से ट्रंप के सभी अरमानों पर पानी तो फिरा ही…
साथ ही साथ अब अमेरिका के अंदर ही ट्रंप के खिलाफ बगावती सुर सुनाई देने लगे हैं…वहीं खबर है कि ताजा सर्वे ने ऐसा खुलासा किया है…जिससे सुपरपावर देश के होश उड़ गए हैं और कहा जाने लगा है कि क्या अब सच में ट्रंप की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है ?…तो आखिर कैसे अपने ही जाल में बुरी तरह से फंसे ट्रंप और ताजा सर्वे में ऐसा कौन सा खुसाला हुआ है…जिससे बात अमेरिकी राष्ट्रपति की कुर्सी पर बन आई है..
यूं तो अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है…लेकिन इस वक्त वहीं सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही फैसलों में फंस गए हैं?…क्या ईरान के साथ बढ़ता तनाव उनके लिए सियासी मूसीबत बन गया है?…और क्या अब उनके ही अपने ही लोग उनके खिलाफ खड़े हो गए हैं?
इन्हीं सवालों के बीच सामने आया…एक ऐसा सर्वे…जिसने व्हाइट हाउस की नींव तक हिला दी…रिपोर्ट सामने आई और बताया गया कि ट्रंप की कुल लोकप्रियता गिरकर सिर्फ 37 प्रतिशत रह गई है…यानी आधे से ज्यादा अमेरिकी नागरिक अब ट्रंप से खुश नहीं है…ऐसे में सबसे बड़ा झटका उनकी आर्थिक नीतियों को लगा….जहां 66 प्रतिशत लोगों ने साफ कहा कि वो इससे संतुष्ट नहीं हैं…
ये वही अमेरिका है जिसने 2024 में ट्रंप को दोबारा सत्ता में बैठाया था…तब लोगों को उम्मीद थी कि वो महंगाई कम करेंगे…अर्थव्यवस्था मजबूत करेंगे और देश को स्थिरता देंगे…लेकिन 2026 आते-आते हालात बदल गए…महंगाई बढ़ी, रोजमर्रा की चीजें महंगी हुईं, और लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ा…वहीं लोगों की नाराजगी जहां इन चीजों को लेकर थी ही…इसी बीच ईरान के साथ जंग में ट्रंप के बौखलाहट भरे फैसलों से भी अमेरिका के अंगर भारी नाराजगी देखने को मिली…क्योंकि ईरान के साथ बढ़ती तनातनी ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाला….तेल की कीमतें बढ़ीं, बाजार अस्थिर हुआ और आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा…यही वजह है कि 66 प्रतिशत अमेरिकी ट्रंप के ईरान से निपटने के तरीके से नाराज हैं…
हालांकि, कहानी यहीं खत्म नहीं होती है…इसी बीच पूरे अमेरिका में एक नई हलचल शुरू होती है…और वो हलचल है विरोध की आवाजें…धीरे-धीरे ये आवाजें सड़कों पर उतरने लगती हैं और फिर एक दिन…पूरा देश एक बड़े आंदोलन का गवाह बनता है…जहां हमने पहले भी देखा है कि कैसे ट्रंप के खिलाफ बड़े आंदोलन के तहत No Kings आंदोलन चलाया गया था…
United States के अलग-अलग शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आते हैं और ये कोई छोटा-मोटा विरोध नहीं था…बल्कि एक संगठित राष्ट्रीय अभियान था…जहां 3,000 से ज्यादा कार्यक्रम…लाखों लोग और एक ही संदेश कि सरकार जनता की है…किसी एक व्यक्ति की नहीं…सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ मिनेसोटा स्टेट कैपिटल में…यहां करीब 2 लाख लोग जुटे…हाथों में तख्तियां, बैनर और नारों की गूंज थी…हर तरफ एक ही सवाल था कि क्या अमेरिका में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है?…
इस रैली में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े नेता और मशहूर हस्तियां भी शामिल हुईं…Tim Walz ने मंच संभाला और भीड़ को संबोधित किया…उनके साथ थे मशहूर गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन…जिन्होंने गीत गाकर माहौल को और भावुक बना दिया…वहीं, बर्नी सैंडर्स ने साफ शब्दों में कहा कि अब और कोई राजा नहीं चलेगा…उनके इस बयान ने भीड़ में जोश भर दिया… क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने भी सरकार पर हमला बोला और कहा कि राष्ट्रपति को जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि अपनी इमेज चमकाने पर…
अब सवाल ये है कि आखिर लोग इतने नाराज क्यों हैं?…तो इसका जवाब हमें उसी सर्वे में मिलता है…क्योंकि सर्वे के दौरान जब लोगों से पूछा गया कि क्या वो किसी भी राजनीतिक दल पर भरोसा करते हैं…तो जवाब चौंकाने वाला था….बड़ी संख्या में लोगों ने कहा नहीं…यानी सिर्फ ट्रंप ही नहीं, बल्कि पूरी राजनीति पर भरोसा कम हो रहा है…Immigration के मुद्दे पर भी लोगों की राय बंटी हुई है…ट्रंप की सख्त नीतियों को 45 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला…लेकिन 54 प्रतिशत ने इसका विरोध किया…यानी यहां भी देश दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है…
लेकिन सबसे ज्यादा असर पड़ा है…महंगाई और जीवन-यापन की लागत पर…जब लोगों से पूछा गया कि रोजमर्रा के खर्चों को लेकर वे क्या सोचते हैं…तो सिर्फ 23 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप का समर्थन किया…जबकि 76 प्रतिशत ने असहमति जताई…यही वो प्वाइंट है जहां से कहानी मोड़ लेती है….आर्थिक संकट और विदेशी तनाव से जनता का गुस्सा बढ़ा और यही गुस्सा सड़कों पर भी दिखाई दिया…
New York City, Washington, D.C., Los Angeles, Chicago और San Francisco जैसे बड़े शहरों में हजारों लोग जुटे…हर जगह एक जैसा ही माहौल दिखा…लोग मार्च कर रहे थे…नारे लगा रहे थे और सरकार से जवाब मांग रहे हैं…लॉस एंजिल्स में सिटी हॉल के बाहर प्रदर्शन हुआ…तो ह्यूस्टन में लोग अमेरिकी संविधान की बड़ी कॉपी लेकर सड़कों पर निकले…ये सिर्फ विरोध नहीं था…ये एक संदेश था कि लोकतंत्र की रक्षा करनी होगी…
इस बीच एक और दिलचस्प बात सामने आई…जहां लोग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर भी किसी पार्टी पर भरोसा नहीं कर रहे…करीब 51 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें रिपब्लिकन या डेमोक्रेट…किसी पर भरोसा नहीं है…यानी ये सिर्फ ट्रंप के खिलाफ गुस्सा नहीं है…बल्कि, ये पूरे सिस्टम के खिलाफ असंतोष है….ऐसे में सवाल उठता है कि ट्रंप के लिए सबसे बड़ी चिंता क्या है?…तो ट्रंप पर से आम जनता का भरोसा डगमगा रहा है…अब अगर हम दोनों ही मामलों को जोड़कर देखें तो…एक तरफ ईरान के साथ तनाव है…तो दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई…तीसरी तरफ गिरती लोकप्रियता और चौथी तरफ सड़कों पर उतरती जनता….यानी एक ऐसा जाल बन गया है…जिसमें ट्रंप बुरी तरीके से फंसते हुए नजर आ रहे हैं…
इसे लेकर कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यही हाल रहा…तो नवंबर में होने वाले चुनावों में इसका असर साफ दिख सकता है…क्योंकि इतिहास गवाह है कि अमेरिका में जब जेब पर असर पड़ता है…तो वोट भी बदल जाता है…और यही वजह है कि अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के साथ टकराव ट्रंप के लिए सियासी जाल बन गया है?…क्योंकि जो मुद्दा कभी उनकी ताकत था…यानी विदेश नीति…वही अब उनकी कमजोरी बनता दिखाई दे रहा है…
और तो और सबसे बड़ी बात ये है कि…ट्रंप को सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं…बल्कि अपने ही देश के लोगों से है…जब जनता सड़कों पर उतर आती है…जब लोग नो किंग्स जैसे नारे लगाने लगते हैं…जब भरोसा टूटने लगता है….तो किसी भी नेता के लिए ये सबसे बड़ा खतरा होता है और इस वक्त अमेरिका में यही हो रहा है…आखिर में बस एक सवाल बचता है कि क्या ट्रंप इस संकट से निकल पाएंगे?…या फिर ये विरोध और गिरती लोकप्रियता उनके राजनीतिक भविष्य को बदल देगी?



