UPI पेमेंट करने पर लगेगा 0.4% शुल्क? बांदा के व्यापारियों ने PM मोदी से की बड़ी मांग

Banda News: यूपीआई पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% MDR शुल्क के विरोध में बांदा के व्यापारियों ने पीएम मोदी को ज्ञापन भेजा। छोटे कारोबारियों पर आर्थिक बोझ न डालने की मांग की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: डिजिटल पेमेंट ने छोटी दुकानों से लेकर बड़े कारोबार तक लेन-देन का तरीका बदल दिया है। अब इसी यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को लेकर व्यापारियों की चिंता बढ़ने लगी है। उत्तर प्रदेश के बांदा में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रस्तावित शुल्क के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। व्यापारियों ने मांग की है कि सामान्य यूपीआई लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क न लगाया जाए।

UPI पर शुल्क से बढ़ सकती है व्यापारियों की लागत

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का कहना है कि यूपीआई ने डिजिटल भुगतान को तेज, आसान और सुविधाजनक बनाया है। किराना, कपड़ा, दवा, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और होटल-रेस्टोरेंट जैसे कारोबार में बड़ी संख्या में व्यापारी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्यापार मंडल के मुताबिक, यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लागू होने से कम मुनाफे पर कारोबार करने वाले छोटे और मध्यम व्यापारियों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, यह शुल्क प्रस्तावित व्यवस्था के संदर्भ में व्यापारियों की ओर से जताई गई चिंता है।

महंगाई के बीच मुनाफे पर असर की आशंका

व्यापारियों का कहना है कि दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन, महंगाई और अन्य व्यावसायिक खर्च पहले से ही कारोबार पर दबाव डाल रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से मुनाफा प्रभावित हो सकता है।

व्यापार मंडल ने आशंका जताई कि भुगतान महंगा होने की स्थिति में कुछ कारोबारी नकद लेन-देन को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

प्रधानमंत्री से शुल्क नहीं लगाने की मांग

ज्ञापन में व्यापारियों ने सामान्य यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित एमडीआर शुल्क लागू नहीं करने की मांग की है। साथ ही छोटे और मध्यम कारोबारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही है।

व्यापार मंडल ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), एनपीसीआई, बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और व्यापारी संगठनों के बीच नियमित विचार-विमर्श की व्यवस्था बनाने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के विरोध में नहीं हैं, बल्कि इसे सस्ता और व्यापारियों के अनुकूल बनाए रखना चाहते हैं।

रिपोर्ट – इक़बाल खान, बांदा

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