दिल्ली हो या मुजफ्फरपुर सिस्टम जस का तस, सब भगवान भरोसे

होटल के बाद अस्पताल में आग, 4 मरीजों की मौके पर मौत

  • 20 मरीजों की हालत अत्यंत दयनीय, आईसीयू में मरीज छोड़कर भागे डाक्टर
  • दिल्ली के होटल में आग लगने से कल ही हुई थी 21 लोगों की मौत
  • 6 कमरे के होटल को बना दिया था 26 कमरों का होटल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। चारों तरफ से आती मौत की खबरों ने आम आदमी को विचलित कर कर दिया है। कल दिल्ली के होटल में लगी आग के बाद आज खबर बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी भीषण आग से आधा दर्जन मरीजों की मौत की खबर आ रही है। हद तो तब हो गयी जब आग लगी तो हास्पिटल स्टाफ असहाय मरीजों को बेड पर तड़पता छोड़कर फरार हो गया। हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग तरह तरह के आरोप लगा रहे हैं। मौके पर मौजूद मरीजों के परिजनों ने हॉस्पिटल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि स्टाफ मरीजों को बचाने की जगह उन्हें तड़पता छोड़कर दुर्घटनास्थल से भाग खड़ा हुआ। बताया जा रहा है कि आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ। 20 मरीजों को तुरंत दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।

नियम पालन के लिए नहीं तोडऩे के लिए बने

सच्चाई यह है कि हमारे यहां नियम अक्सर पालन के लिए नहीं बल्कि तोडऩे के लिए बनाए जाते हैं। लाइसेंस लेने वाला रास्ता ढूंढ लेता है निरीक्षण करने वाला आंखें मूंद लेता है और सिस्टम तब तक चुप रहता है जब तक कोई त्रासदी सुर्खियां न बन जाए। मालवीय नगर की यह आग एक इमारत में नहीं लगी थी यह उस प्रशासनिक संस्कृति में लगी आग है जहां जवाबदेही हमेशा मरने वालों के साथ दफन हो जाती है। अगर इस बार भी जांच सिर्फ मालिक की गिरफ्तारी तक सिमट गई और उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं हुई जिन्होंने इस खेल को फलने-फूलने दिया तो समझ लीजिए कि अगली आग की उलटी गिनती आज से ही शुरू हो चुकी है।

दूसरे अस्पतालों में मरीजों को शिफ्ट कराया गया

मुजफ्फरपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया है कि कई मरीजों को सुरक्षित निकालकर दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि आईसीयू में आग लगने से भारी मात्रा में धुआं फैल गया। मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश की गई। लोगों के अनुसार, यूनिट के इंचार्ज को भी अन्य मरीजों के साथ गंभीर चोटें आई हैं। अब तक चार से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। आईसीयू और सीसीयू में भर्ती अन्य मरीजों को इलाज के लिए पास के अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। जिले के एसएसपी कान्तेश मिश्रा ने बताया कि यह घटना लगभग 3.30-3.45 बजे हुई। माना जा रहा है कि आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। हालांकि, भर्ती 12-13 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। वहां मौजूद एक शख्स ने बताया कि रात करीब 3 बजे अस्पताल का आईसीयू पूरी तरह से धुएं से भर गया था। स्थिति को संभालने के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भाग खड़े हुए। धुएं की वजह से आईसीयू में रुमाल बांधकर जाने पर भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच पर सवाल

हैरानी की बात यह है कि जिस इलाके में विदेशी मरीजों और मेडिकल टूरिस्ट्स का लगातार आना-जाना रहता है जहां हर दिन दर्जनों लोग ठहरते हैं वहां सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच आखिर किसने की? क्या फायर एनओसी सिर्फ एक कागज थी? क्या अधिकारियों ने कभी यह देखने की जरूरत नहीं समझी कि जिस भवन में लोग ठहर रहे हैं वहां आपदा की स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता भी है या नहीं? हर बड़े हादसे के बाद वही पुराना संवाद सुनाई देता है दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन असली सवाल यह है कि दोषी सिर्फ होटल मालिक है या फिर वह पूरी व्यवस्था भी कटघरे में खड़ी है जिसने वर्षों तक इस खेल को चलने दिया?

सीएम ने जताया दुख

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने एक्स पोक्ट में लिखा कि मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दु:खद है। शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें। सीएम सम्राट ने मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है तथा घायलों के उपचार हेतु सदर अस्पतालों में समुचित व्यवस्था की गई है।

दिल्ली अग्निकांड खुलासे पर खुलासे, कटघरे में रेखा सरकार

आग लगने से 21 लोगों की मौत की खबर से पूरे देश में सिहरन है और अब जांच के बाद खुलासे पर खुलासे हो रहे हैं और जो तथ्य सामने आ रहे हैं उसमे पूरी तरह से दिल्ली सरकार दोषी दिखायी दे रही है। दरअस्ल पकड़े गये लवकेश बाजाज का अस्ल चेहरा लाइसेंस के नाम पर लाशों का कारोबार करने वाले कारोबारी के रूप में सामने आया है। दिल्ली के मालवीय नगर में 21 लोगों की मौत सिर्फ आग से नहीं हुई बल्कि उस व्यवस्था की वजह से हुई जिसने नियमों को फाइलों में कैद कर रखा है और जुगाड़ को कानून से ऊपर बैठा दिया है। होटल फ्लोरिश में लगी आग ने सिर्फ कमरों को नहीं जलाया उसने प्रशासनिक दावों निरीक्षण व्यवस्था और लाइसेंस सिस्टम की पोल भी राख कर दी। अब खुलासा हुआ है कि होटल मालिक लवकेश बजाज ने पूरा खेल ही नियमों की आंख में धूल झोंककर रचा था। प्रॉपर्टी अपने अकाउंटेंट के नाम पर खरीद ली ताकि सरकारी नियमों की शर्तें भी पूरी दिखें और कारोबार भी चलता रहे। सवाल यह है कि अगर यह चालाकी आज पुलिस की जांच में पकड़ में आ गई तो वर्षों तक लाइसेंस देने वाले विभागों को यह दिखाई क्यों नहीं दी? यही तो इस देश की सबसे बड़ी त्रासदी है। हादसे के बाद प्रशासन शेर बन जाता है लेकिन हादसे से पहले उसकी आंखों पर पट्टी बंधी रहती है। जब तक लोग जिंदा होते हैं फाइलें सोती रहती हैं। जैसे ही मौतें होती हैं अचानक जांच गिरफ्तारी और कार्रवाई का मौसम शुरू हो जाता है।

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