गोरखपुर में काली मिर्च का बड़ा खेल! 4.77 क्विंटल माल सीज, जांच में सामने आएगा असली राज
गोरखपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापा मारकर 4.77 क्विंटल काली मिर्च सीज की। बिना लाइसेंस कारोबार और हानिकारक रंग मिलाने की आशंका पर नमूना जांच के लिए भेजा गया है।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: गोरखपुर में मिलावटखोरी के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने सवाल खड़े कर दिए हैं। तिवारीपुर क्षेत्र के एक गोदाम में छापेमारी के दौरान 4.77 क्विंटल साबुत काली मिर्च बरामद हुई। विभाग ने इसे सीज कर दिया है। प्राथमिक जांच में काली मिर्च में हानिकारक रंग मिलाए जाने की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसकी पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही होगी।
गोदाम में मिली 477 किलो काली मिर्च, लाइसेंस भी नहीं मिला
खाद्य सुरक्षा विभाग को तिवारीपुर क्षेत्र में मिलावटखोरी की सूचना मिली थी। इसके बाद मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुधीर कुमार राय के नेतृत्व में टीम ने मोहनलालपुर नाले के पास स्थित गोदाम पर औचक छापा मारा।
जांच के दौरान वहां 477 किलोग्राम साबुत काली मिर्च मिली, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.40 लाख रुपये बताई गई है। मौके पर मौजूद विक्रेता नीरज कुमार मद्धेशिया से खाद्य कारोबार का लाइसेंस मांगा गया, लेकिन वह लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके।
काली मिर्च में हानिकारक रंग की आशंका, सैंपल जांच को भेजा
प्राथमिक जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम को काली मिर्च में हानिकारक रंग मिलाए जाने की आशंका हुई। इसके बाद विभाग ने उसका नमूना लेकर प्रयोगशाला भेज दिया। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खाद्य पदार्थ में वास्तव में किसी प्रतिबंधित या हानिकारक पदार्थ की मिलावट थी या नहीं।
अधिकारियों ने बरामद पूरी काली मिर्च को सीज कर दिया है। बिना लाइसेंस कारोबार और संभावित मिलावट के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
रिपोर्ट आने के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर गोदाम की जांच की गई थी। बड़ी मात्रा में काली मिर्च मिलने के बाद उसे सीज किया गया है और नमूना जांच के लिए भेजा गया है।
अब विभाग की कार्रवाई की अगली कड़ी प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
रिपोर्ट – अमरेंद्र पांडेय, गोरखपुर
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