योगी की नाक के नीचे बड़ा खेल,  255 करोड़ जनता के पैसे से फर्जी कंपनियों की जेब भरी

योगी सरकार 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' और औद्योगिक विकास का दावा करती है, लेकिन CAG रिपोर्ट कह रही है कि विकास का पैसा फर्जी कंपनियों की जेब में गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: यूं तो खुद को योगी सरकार पाक दामन बताती है, बड़े-बड़े मंचों से ये कहा जाता है कि हमारी सरकार में न तो भ्रष्टाचार है और न ही भ्रष्टाचारी।

लेकिन हकीकत क्या है ये हम आप बखूबी समझते हैं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार औद्योगिक विकास का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन CAG की नई रिपोर्ट ने सच्चाई उघाड़ दी है।

विधानसभा में हाल ही में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. आरोप है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों के बड़े ठेकों का आवंटन किया गया है.  विधानसभा में पेश CAG रिपोर्ट बताती है कि UPSIDA यानी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने फर्जी कागजों पर 255.75 करोड़ रुपये के ठेके दो कंपनियों को दे दिए। ये पैसा आम आदमी के टैक्स का है, जो विकास के नाम पर लुट गया। सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार की वजह से ये फर्जीवाड़ा हुआ।

पूरे मामले की अगर बात करें तो 2015-16 में मेसर्स बालाजी बिल्डर को 13 ठेके दिए गए – कुल 143.22 करोड़। जिसमें दो औद्योगिक सेक्टर विकसित करने थे। लेकिन कंपनी के अनुभव प्रमाण पत्र जाली थे। कोई जांच नहीं हुई। ठेका दे दिया गया। बाद में 2017 में पकड़ा गया तो ठेके रद्द कर दिए।

ठीक इसी तरह मेसर्स आकाश इंजीनियरिंग एंड बिल्डर्स को 2 ठेके दिए गए 112.53 करोड़ के। जिनके अनुभव सर्टिफिकेट और फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD के कागज भी फर्जी। 2018 में रद्द हुए। कुल 255.75 करोड़ का खेल। वहीं रिपोर्ट कहती है कि 27 और ठेके भी अपात्र कंपनियों को दिए गए। जबकि बोली लगाने वालों की क्षमता ही नहीं चेक की गई।

ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि इतने बड़े ठेके कैसे पास हो गए? UPSIDA के अधिकारी सोए हुए थे या मिले हुए थे? कागज जाली थे, लेकिन टेंडर पास। बाद में FIR हुई, लेकिन दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं। सिर्फ ठेकेदारों से 12.65 करोड़ वसूलने की कोशिश की। उसमें भी सिर्फ 1.39 करोड़ ही वसूला गया। बाकी 11 करोड़ से ज्यादा पानी में। 16 कामों में 13.71 करोड़ क्षतिपूर्ति नहीं ली गई। 34 कामों में क्वालिटी टेस्ट फीस 1.63 करोड़ नहीं वसूली गई। मतलब, सरकार का पैसा लुट गया और कोई जवाबदेही नहीं।

योगी सरकार ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ और औद्योगिक विकास का दावा करती है, लेकिन CAG रिपोर्ट कह रही है कि विकास का पैसा फर्जी कंपनियों की जेब में गया। रोजगार के नाम पर झूठ। 32,000 करोड़ निवेश और 35,000 नौकरियों का दावा भी गलत पाया गया। असल में पैसा बर्बाद, प्रोजेक्ट अटके, उद्योग नहीं लगे। अब सवाल ये उठता है कि सरकार क्या कहती है? तो जवाब है कुछ नहीं। रिपोर्ट पेश हुई, लेकिन मंत्री चुप रहे।

विपक्ष ने आवाज उठाई, लेकिन योगी सरकार की आदत है – CAG रिपोर्ट को नजरअंदाज करना वही इस बार भी हुआ। पहले भी कई CAG रिपोर्ट आईं – सड़कें, अस्पताल, लेकिन कार्रवाई शून्य रही। ये दिखाता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं, बल्कि सरकारी मशीनरी फर्जीवाड़े को बढ़ावा दे रही है। अधिकारी जानते हैं कि सजा नहीं मिलेगी, इसलिए फर्जी कागज पास कर देते हैं।

जनता के नजरिये से अगर देखें तो आम आदमी सोचे – 255 करोड़ से कितने स्कूल बन सकते थे? कितने गांवों में पानी-बिजली पहुंच सकती थी? कितनी नौकरियां सच्ची लग सकती थीं? लेकिन ये पैसा फर्जी बिल्डरों और लापरवाह अधिकारियों ने मिलकर लूट लिया। योगी सरकार ‘डबल इंजन’ की बात करती है, लेकिन ये रिपोर्ट दिखा रही है कि इंजन में भ्रष्टाचार का इंजन फिट है।

CAG ने साफ कहा – जांच करो, जवाबदेही तय करो, सिस्टम सुधारो। लेकिन क्या होगा? पिछले 9 साल में योगी राज में UPSIDA जैसी संस्थाएं लूट का अड्डा बन गई हैं। किसान की जमीन लेते हो, उद्योग के नाम पर देते हो फर्जीवालों को।

ये 255 करोड़ सिर्फ एक उदाहरण है। असली घोटाला है सिस्टम का घोटाला। सरकार को जवाब देना चाहिए – कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार? क्यों FIR के बाद भी कोई सजा नहीं? क्यों रिकवरी अधूरी? जनता का पैसा जनता के विकास में लगना चाहिए, फर्जीवाड़े में नहीं। लेकिन सरकार की चुप्पी बता रही है कि सरकार की आदत सी हो गई है। अगर ये फर्जीवाड़ा रुका नहीं तो उत्तर प्रदेश का औद्योगिक सपना हमेशा अधूरा रहेगा।

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