अहमदाबाद में चौंकाने वाला खुलासा! सरकारी स्कूलों के 360 बच्चों का दिल कमजोर
गुजरात के अहमदाबाद में सरकारी स्कूलों के सैकड़ों बच्चों की स्वास्थ्य जांच के दौरान चौंकाने वाला मामला सामने आया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात विधानसभा के बजट सत्र 2026 में एक ऐसा मामला सामने आया है.. जो हर मां-बाप के दिल को छू लेगा.. अहमदाबाद जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों में दिल की गंभीर बीमारी के 360 मामले मिले हैं.. राज्य सरकार के स्कूल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम के तहत सिर्फ पिछले दो साल में 5 लाख 17 हजार 164 बच्चों की जांच हुई.. और इनमें से 360 बच्चों को हृदय रोग पाया गया.. इनमें से 191 बच्चों की सफल सर्जरी हो चुकी है.. और बाकी बच्चों का इलाज जारी है.. सबसे ज्यादा मामले दसक्रोई तालुका में हैं.. जहां 78 बच्चे प्रभावित पाए गए.. यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं.. बल्कि उन मासूम चेहरों की कहानी है.. जो स्कूल जाते समय भी नहीं जानते कि उनका दिल कमजोर चल रहा है..
आपको बता दें कि यह पूरा मामला गुजरात विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्नकाल के दौरान सामने आया.. जब स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को विस्तार से जानकारी दी.. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार का स्कूल स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम पिछले कई सालों से चल रहा है.. और इसका मुख्य मकसद बच्चों में छिपी गंभीर बीमारियों को समय रहते पकड़ना.. और उन्हें मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है.. जानकारी के मुताबिक इस कार्यक्रम के तहत अहमदाबाद जिले के 9 तालुकों बावला, दसक्रोई, देत्रोज, धंधुका, धोलेरा, धोलका, मंडल, साणंद और विरमगाम में विशेष अभियान चलाया गया.. इन तालुकों में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के बच्चे शामिल थे.. बता दें कि कुल 5 लाख 17 हजार 164 बच्चों की जांच पिछले दो वर्षों में पूरी की गई..
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इन 360 बच्चों में हृदय रोग की समस्या पाई गई.. इनमें से 191 बच्चों का पिछले एक साल में सफल ऑपरेशन या इलाज हो चुका है.. दसक्रोई तालुका में सबसे ज्यादा 78 मामले सामने आए.. बाकी तालुकों में भी मामले हैं.. लेकिन दसक्रोई में औद्योगिक इलाका होने.. और प्रदूषण की वजह से शायद ज्यादा प्रभावित बच्चे मिले.. स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में जोर देकर कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है.. बल्कि इलाज तक पहुंचाता है.. जिन बच्चों को गंभीर समस्या मिली.. उन्हें तुरंत उच्च स्तर के अस्पतालों में भेजा गया.. और वहां सरकार की योजनाओं के तहत मुफ्त सर्जरी, दवाइयां.. और इलाज उपलब्ध कराया गया..
जांच में सिर्फ दिल की बीमारी ही नहीं मिली.. कैंसर, किडनी की समस्या और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां भी सामने आईं.. साल 2025-26 के आंकड़ों में करीब 5 हजार 285 बच्चों को एनीमिया, आंखों की समस्या, त्वचा रोग, दांतों की समस्या.. और कान-नाक-गले की बीमारियों का इलाज स्कूल में ही या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर दिया गया.. विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर उम्र की लड़कियों में एनीमिया की समस्या ज्यादा है.. स्कूलों में आयरन की गोलियां बांटी गईं और पोषण की सलाह दी गई.. ताकि वे स्वस्थ रहें और पढ़ाई में पीछे न रहें..
वहीं जिन बच्चों को ज्यादा अच्छे इलाज की जरूरत थी.. उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया.. पिछले एक साल में अकेले 30 हजार 295 बच्चों को ऐसे बड़े अस्पतालों में भेजा गया.. वहां मुख्यमंत्री अमृतम योजना, आयुष्मान भारत.. और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त ऑपरेशन और दवाइयां दी गईं.. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में मोबाइल हेल्थ टीमें लगातार काम कर रही हैं.. ये टीमें स्कूलों में जाती हैं.. विशेषज्ञ डॉक्टर जांच करते हैं.. और जरूरत पड़ने पर बच्चे को तुरंत रेफर कर देते हैं.. इस कार्यक्रम की वजह से महंगी बीमारियों जैसे हृदय रोग.. और किडनी की समस्या का इलाज गरीब.. और मध्यम वर्ग के बच्चों को बिना एक पैसा खर्च किए मिल रहा है..
यह कार्यक्रम असल में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का हिस्सा है.. आरबीएसके भारत सरकार की योजना है.. जो 2013 में शुरू हुई.. इसका लक्ष्य 0 से 18 साल तक के बच्चों को 4 डी की समस्या से बचाना है.. जिसमें डिफेक्ट्स एट बर्थ (जन्मजात दोष), डिफिशिएंसी (पोषण की कमी), डिजीज (बीमारियां) और डेवलपमेंट डिले (विकास में देरी) शामिल हैं.. गुजरात इस योजना को बहुत अच्छे तरीके से लागू कर रहा है.. राज्य में हर साल लाखों बच्चों की जांच होती है.. अहमदाबाद जैसे जिले में तो विशेष फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर है.. क्योंकि यहां डॉक्टर कम पहुंचते हैं.. और लोग जागरूक भी कम हैं..
गुजरात सरकार ने स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रम को और मजबूत किया है.. मोबाइल वैन, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें.. और स्कूल स्तर पर नियमित जांच से अब बीमारियां जल्दी पकड़ी जा रही हैं.. पहले कई बच्चे बड़े हो जाने के बाद ही बीमारी का पता चलता था.. और तब इलाज महंगा और मुश्किल हो जाता था.. वहीं अब छोटी उम्र में ही सर्जरी हो रही है.. और बच्चे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं.. उदाहरण के लिए, कई बच्चों को जन्मजात दिल की छेद वाली समस्या मिली.. जो ऑपरेशन से ठीक हो जाती है.. 191 बच्चों की सर्जरी सफल हुई है.. इसका मतलब है कि इतने मासूम अब सामान्य जीवन जी सकते हैं.. स्कूल जा सकते हैं और भविष्य बना सकते हैं..



