गुजरात में नकली दूध का बड़ा खुलासा! डिटर्जेंट-यूरिया से बन रहा था दूध, ‘डेथ फैक्ट्री’ पकड़ी गई
गुजरात के मेहसाणा में नकली दूध बनाने वाली कथित ‘डेथ फैक्ट्री’ का खुलासा हुआ है... डिटर्जेंट और यूरिया से दूध तैयार कर...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर इलाके में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है.. यहां एक फैक्ट्री में डिटर्जेंट पाउडर, यूरिया खाद.. और अन्य हानिकारक रसायनों से नकली दूध, मक्खन और छाछ बनाया जा रहा था.. वहीं यह कारोबार पिछले पांच सालों से चल रहा था.. और स्थानीय गांवों के साथ-साथ आसपास के इलाकों में सप्लाई हो रहा था.. साबरकांठा की स्थानीय अपराध शाखा ने 6 फरवरी 2026 को श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की फैक्ट्री पर छापा मारा.. इस छापे में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल थे.. छापे के दौरान फैक्ट्री में बड़े-बड़े बर्तनों में सफेद तरल पदार्थ भरा मिला.. और चारों तरफ डिटर्जेंट के पैकेट, यूरिया के बोरे और अन्य रसायन बिखरे पड़े थे..
जांच में पता चला कि 300 लीटर असली दूध में रसायन मिलाकर हर दिन 1700 से 1800 लीटर नकली दूध तैयार किया जा रहा था.. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फैक्ट्री को तुरंत बंद कर दिया.. और 1370 लीटर खतरनाक दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया.. इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है.. जबकि फैक्ट्री का मालिक फरार है.. यह घटना लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा साबित हो रही है.. क्योंकि ऐसे दूध का सेवन किडनी, लीवर और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है.. साथ ही, हाल ही में अमूल, मदर डेयरी और कंट्री डिलाइट जैसे ब्रांडेड दूधों में भी बैक्टीरिया की ज्यादा मात्रा पाई गई है.. जिससे पूरे देश में दूध की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं..
आपको बता दें कि हिम्मतनगर इलाका गुजरात के साबरकांठा जिले में आता है.. यह जगह अहमदाबाद से करीब 80 किलोमीटर दूर है.. और यहां की आबादी मुख्य रूप से किसान.. और छोटे व्यापारियों से बनी है.. साबरकांठा जिला दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है.. जहां कई छोटी-बड़ी डेयरी चलती हैं.. लेकिन यहां का यह नकली दूध का कारोबार पिछले पांच सालों से फलफूल रहा था.. फैक्ट्री सलाल गांव के पास प्रांतीज तालुका में थी.. स्थानीय लोग बताते हैं कि वे रोजाना इस डेयरी से दूध खरीदते थे.. क्योंकि यह सस्ता था और आसानी से उपलब्ध था.. लेकिन उन्हें पता नहीं था कि यह दूध रसायनों से बना है.. इस दूध को साबरकांठा और मेहसाणा जिलों के गांवों में सप्लाई किया जाता था.. लोग इसे पीकर बीमार पड़ रहे थे.. लेकिन वजह समझ नहीं पा रहे थे.. अब छापे के बाद लोगों में डर और गुस्सा है.. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि सरकार को पहले ही कार्रवाई करनी चाहिए थी..
जानकारी के अनुसार साबरकांठा LCB को गुप्त सूचना मिली कि श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स में नकली दूध बनाया जा रहा है.. 6 फरवरी 2026 को टीम ने छापा मारा.. टीम में LCB के इंस्पेक्टर, FSL के विशेषज्ञ और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी शामिल थे.. जैसे ही वे फैक्ट्री में घुसे, तो दंग रह गए.. बड़े एल्यूमीनियम के बर्तनों में सफेद तरल भरा था.. जो दूध जैसा लग रहा था.. लेकिन पास जाकर पता चला कि यह रसायनों से बना है.. चारों तरफ डिटर्जेंट पाउडर के पैकेट, यूरिया खाद के बोरे, कास्टिक सोडा की बोतलें.. और तेल के कैन बिखरे पड़े थे.. फैक्ट्री में काम कर रहे लोग भागने की कोशिश कर रहे थे.. लेकिन टीम ने उन्हें पकड़ लिया.. यह छापा करीब 4 घंटे चला.. जिसमें हर चीज की जांच की गई.. FSSAI के अधिकारियों ने सैंपल लिए और फैक्ट्री को सील कर दिया..
जांच में पता चला कि फैक्ट्री में बहुत कम असली दूध इस्तेमाल होता था.. 300 लीटर असली दूध में डिटर्जेंट, यूरिया, कास्टिक सोडा, सोयाबीन तेल.. और पाम ऑयल मिलाकर 1700 से 1800 लीटर नकली दूध तैयार किया जाता था.. दूध को गाढ़ा और झागदार बनाने के लिए कास्टिक सोडा.. और डिटर्जेंट का इस्तेमाल होता था.. यूरिया से दूध में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जाती थी.. ताकि जांच में असली लगे.. साथ ही, 450 किलो प्रोटीन पाउडर, 650 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर.. और 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर भी मिलाकर इस्तेमाल होता था.. यह सब मिलाकर दूध, मक्खन और छाछ बनाई जाती थी.. फैक्ट्री में रोजाना हजारों लीटर उत्पादन होता था, जो सस्ते दाम पर बेचा जाता था। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे रसायन शरीर में जहर की तरह काम करते हैं.. और लंबे समय में कैंसर, किडनी फेलियर और अन्य बीमारियां पैदा कर सकते हैं..
टीम ने फैक्ट्री से 1962 लीटर नकली दूध.. और 1180 लीटर नकली छाछ जब्त की.. जो पैक होकर बाजार में जाने वाली थी.. साथ ही, बड़ी मात्रा में रसायन मिले.. यूरिया खाद के बोरे, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पाम ऑयल.. कुल जब्त सामान की कीमत करीब 71 लाख रुपये बताई जा रही है.. FSSAI ने 1370 लीटर खतरनाक दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया.. ताकि यह किसी के हाथ न लगे.. बाकी सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं.. पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क बड़ा हो सकता है.. और सप्लाई चेन की जांच की जा रही है..
वहीं छापे के दौरान फैक्ट्री के ऑपरेटर जितेंद्र पटेल, सचिन मकवाना, कर्ण परमार.. और अजयसिंह परमार को गिरफ्तार कर लिया गया.. एक नाबालिग कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है.. फैक्ट्री का मालिक राकेश उर्फ धामो पटेल फरार है.. वह मूल रूप से सलाल गांव का रहने वाला है.. और अब हिम्मतनगर में रहता था.. पुलिस उसकी तलाश में छापे मार रही है.. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.. इसमें मिलावट, धोखाधड़ी और स्वास्थ्य को खतरा पहुंचाने की धाराएं शामिल हैं.. पुलिस का कहना है कि पूछताछ में और नाम सामने आ सकते हैं.. FSSAI ने फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द कर दिया है..
आपको बता दें कि यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर तूफान आ गया.. लोग गुस्से में हैं.. और कह रहे हैं कि यह जहर बेचने वाले हैं.. इन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए.. इंस्टाग्राम और फेसबुक पर वीडियो शेयर हो रहे हैं.. जहां लोग पूछ रहे हैं कि अमूल जैसे ब्रांड भी सुरक्षित नहीं.. कई यूजर्स ने कहा कि सरकार को पहले जांच करनी चाहिए थी.. एक यूजर ने लिखा कि क्या मौत की सजा नहीं मिलनी चाहिए इनको.. यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई है.. क्योंकि दूध रोजमर्रा की जरूरत है..



