ईरान हिंसा पर बड़ा खुलासा! अमेरिकी साजिश से जल रहा ईरान?
असली 56 इंची वाला लीडर किसे कहते हैं, ये आज ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है। ईरान में पिछले 13 दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज़ होते जा रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: असली 56 इंची वाला लीडर किसे कहते हैं, ये आज ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पूरी दुनिया को दिखा दिया है। ईरान में पिछले 13 दिनों से सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज़ होते जा रहे हैं।
शुरुआत में ये आंदोलन सिर्फ महंगाई और खराब आर्थिक हालात के खिलाफ थे, लेकिन अब ये बीते कई सालों का सबसे बड़ा जन आंदोलन बन चुके हैं। ऐसे माहौल में, जब ईरान की सड़कों पर गुस्से का सैलाब उमड़ रहा है, तब खुद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई कैमरे के सामने आए और उन्होंने जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने रोने के बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुली चेतावनी देते हुए ललकारा है।खामेनेई का ये संदेश ऐसे वक्त पर आया है जब वाइट हाउस और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के बीच भी तनाव चरम पर है। वजह है ईरान को लेकर एक गोपनीय रिपोर्ट, जिसने राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका दिया है।
अगर चीन और रूस को छोड़ दें, तो दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिन्होंने अमेरिका के सामने कभी घुटने नहीं टेके। ईरान उन्हीं देशों में से एक है, जिसने हमेशा अमेरिका को आंखों में आंखें डालकर जवाब दिया है। आज भी ईरान का वही तेवर देखने को मिल रहा है। जब देश की सड़कों पर लोग सरकार के खिलाफ उतर आए, तो खुद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सामने आए। उन्होंने सरकारी टीवी चैनल पर देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनता को शांति बनाए रखनी चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने साफ तौर पर आरोप लगाया कि ईरान में जो भी हिंसा हो रही है, उसके पीछे इजरायल और अमेरिका के आतंकी एजेंट हैं।
खामेनेई ने सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से रंगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप की नीतियों की वजह से ईरानी जनता का खून बहा है। खामेनेई ने दावा किया कि ट्रंप की सत्ता ज्यादा दिन नहीं टिकेगी और उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति पद से जाना ही होगा। यही नहीं, उन्होंने ट्रंप को नसीहत देते हुए कहा कि वह ईरान पर उंगली उठाने से पहले अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। इस बीच ईरान के प्रशासन ने आंदोलनकारियों को देश विरोधी करार दे दिया है और उन्हें सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जो लोग सोशल मीडिया के जरिए उपद्रव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाएगा।
खामेनेई ने कहा कि जो लोग विदेशी ताकतों के इशारों पर काम कर रहे हैं, उन्हें किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे पहले ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर एक कार्यक्रम में आंदोलनकारियों को इजरायल और अमेरिका के इशारे पर काम करने वाले आतंकी एजेंट बताया गया था। चैनल का कहना था कि आखिर ये लोग हिंसा क्यों फैला रहे हैं और किसके लिए ईरान की सड़कों पर आग लगा रहे हैं। खामेनेई ने भी इसी सुर में सवाल उठाया कि आखिर कुछ लोग दूसरे देशों के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपने ही देश की गलियों में तबाही क्यों मचा रहे हैं। ईरान में चल रहे आंदोलनों को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का भी बयान सामने आया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता की गई, तो अमेरिका उनकी रक्षा करेगा। यानी ट्रंप ने खुले तौर पर ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देने का संकेत दिया था।
इसी का जवाब देने के लिए खमेनेई सामने आए। वहीं सोशल मीडिया पर भी खामेनेई अमेरिका को बिना हिचक लताड़ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जैसे अतीत में था, वैसे ही आज भी अमेरिका ईरान को लेकर अपने आकलन में गलत है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका हमेशा से ईरान को समझने में चूक करता रहा है और आज भी वॉशिंगटन अपनी गणनाओं में गलत साबित हो रहा है। यानी उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि अमेरिका चाहे जितनी भी रणनीति बना ले, ईरान को झुकाना आसान नहीं है। अगर आप सोच रहे हैं कि ईरान में जो इस वक्त हालात हैं उसके लिए अमेरिका कैसे जिम्मेदार हो सकता है पूरे मामले में अब “डीप स्टेट” की भी चर्चा हो रही है। वजह है निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की अचानक बढ़ी हुई सक्रियता। उनके नाम से नारे लगाए जा रहे हैं। रजा पहलवी अमेरिका के काफी करीब माने जाते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि इस आंदोलन के पीछे अमेरिका का हाथ हो सकता है।
ईरान में महंगाई और खराब अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन अब एक हिंसक जन आंदोलन का रूप ले चुके हैं। इसी बीच वाइट हाउस और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के बीच एक रिपोर्ट को लेकर तनाव अपने चरम पर है। ये रिपोर्ट ईरान के भविष्य और अमेरिकी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सूत्रों के मुताबिक, सीआईए और अन्य अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक गोपनीय आकलन सौंपा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का सुरक्षा तंत्र अभी भी पूरी तरह से संगठित है और मौजूदा प्रदर्शनों में कोई ऐसा केंद्रीय नेतृत्व नहीं है, जो खामेनेई सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए जरूरी राजनीतिक ढांचा तैयार कर सके। जानकारों का मानना है कि इन प्रदर्शनों से ईरानी सरकार को झटका जरूर लगा है, लेकिन हालात अभी तख्ता पलट तक नहीं पहुंचे हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिका सीधे तौर पर प्रदर्शनकारियों को सैन्य मदद देता है, तो ईरानी जनता में राष्ट्रवाद की लहर उठ सकती है।
ऐसी स्थिति में लोग अपनी सरकार के साथ खड़े हो सकते हैं और अमेरिका की योजना पूरी तरह से फेल हो सकती है।यानी सीआईए की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में तख्ता पलट करना फिलहाल आसान नहीं है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का मानना है कि उनकी “मैक्सिमम प्रेशर” नीति और जून 2025 में ईरान के परमाणु केंद्रों पर किए गए हमलों ने ईरानी शासन की कमर तोड़ दी है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि जिस तरह हाल ही में वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन हुआ, वैसा ही ईरान में भी संभव है। ट्रंप ने सोशल पर लिखा कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को मारना बंद नहीं किया, तो अमेरिका मूकदर्शक नहीं रहेगा और हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह से तैयार है। अमेरिका और इजरायल ये मानकर चल रहे हैं कि वो बिना किसी सजा के ईरान पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन खुफिया एजेंसियां इसे एक खतरनाक गलतफहमी मान रही हैं।
उनका कहना है कि ईरान एक बेहद जटिल देश है और वहां अराजकता फैलने से पूरा मिडिल ईस्ट अस्थिर हो सकता है। जहां एक तरफ ट्रंप प्रशासन ईरान पर अंतिम प्रहार के मूड में नजर आ रहा है, वहीं सीआईए की रिपोर्ट संयम बरतने की सलाह दे रही है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप अपने खुफिया सलाहकारों की बात मानते हैं या फिर अपनी आक्रामक रणनीति पर आगे बढ़ते हैं।
इस वक्त पूरे ईरान में महंगाई और जीवन यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। सड़कों पर उतरे लोग अब सिर्फ सरकार से नहीं, बल्कि पूरे इस्लामिक रिपब्लिक सिस्टम से सवाल कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तो यहां तक कह रहे हैं कि ईरान में दोबारा राजशाही बहाल की जानी चाहिए। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक इन प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 48 प्रदर्शनकारियों और 14 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। ईरान की सड़कों पर जो आग जल रही है, उसका असर सिर्फ तेहरान तक सीमित नहीं है। मशहद, शिराज़ और ग्रामीण इलाकों में भी लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कुल मिलाकर 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। हर तरफ गुस्सा, नाराज़गी और असंतोष का माहौल है। ईरान में हालात 2022 के “महिला, जीवन और स्वतंत्रता” आंदोलन से भी ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।
ईरान की मुद्रा रियाल की हालत बेहद खराब हो चुकी है। एक डॉलर की कीमत अब करीब 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है। यानी रियाल 1.4 मिलियन प्रति डॉलर तक गिर चुका है। पिछले दो हफ्तों में 38 से ज्यादा लोगों की मौत और 200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की खबर है। कुछ न्यूज़ सोर्स तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि अब तक 217 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ये आग अमेरिका, इजरायल और पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को झुलसा सकती है। और इस आग के बीच खड़े हैं अयातुल्ला अली खामेनेई, जो खुले तौर पर अमेरिका को चुनौती दे रहे हैं और दुनिया को दिखा रहे हैं कि असली 56 इंची वाला लीडर किसे कहते हैं।


