हरदीप पुरी मामले पर फंसी बीजेपी, खुद को बचाने के लिए लाएगी एक और मोशन
एपस्टीन फाइल और हरदीप पुरी मामले को लेकर मोदी सरकार जहां एक ओर कांग्रेस के आरोपों में बुरी तरह फंस गई है

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एपस्टीन फाइल और हरदीप पुरी मामले को लेकर मोदी सरकार जहां एक ओर कांग्रेस के आरोपों में बुरी तरह फंस गई है तो वहीं दूसरी बीजेपी राहुल गांधी को चुप कराने के लिए अपने मोशन मोशन के खेल को और स्पीड देने में जुट गई है।
कल जहां बीजेपी सांसद निशिकांत दूबे सब्सटेंटिव मोशन लाए थे तो वहीं दूसरी ओर अब संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने फिर ऐलान किया है कि वो राहुल गांधी के खिलाफ एक और नया मोशन ला सकते हैं। ऐसे में टकराव खत्म होने के बजाए बढ़ता हुआ दिख रहा है। एक ओर जहां बीजेपी मोशन-मोशन खेल रही है तो वहीं कांग्रेस सांसदों ने संसद परिसर में हरदीप पुरी मामले को लेकर प्रदर्शन करते हुए इस्तीफे की मांग की है। संसदीय कार्य मंत्री कौन सा नया मोशन लाने जा रहे है, क्या सच में निशिकांत दूबे के सब्सटेंटिव मोशन से राहुल गांधी की सदस्यता खत्म हो जाएगी.
कहानी शुरू होती है बजट सत्र के उस दिन से, जब राहुल गांधी सदन में की बजट परिचर्चा में भाग लेने के लिए पहुंचे। राहुल ने सीधे सरकार की दुखती रग पर हाथ रख कर दो बड़े मुद्दे उठाए। पहला मुद्दा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील। राहुल ने साफ लफ़्ज़ों में कहा कि यह डील भारत के फायदे के लिए नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में की गई है। उन्होंने इसे ट्रंप प्रेशर पीएम कम्प्रोमाइजड का नाम दिया और कहा कि मोदी सरकार ने देश के किसानों और व्यापारियों के हितों को अमेरिका के कदमों में रख दिया है।
राहुल गांधी ने दूसरा मुद्दा उठाया एपस्टीन फाइल्स। राहुल ने दावा किया कि इस विवादित फाइल में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आ रहा है। जैसे ही यह नाम गूंजा, सदन में सन्नाटा पसर गया और फिर शुरू हुआ भारी हंगामा। राहुल गांधी ने नैतिकता के आधार पर हरदीप पुरी के तुरंत इस्तीफे की मांग कर दी। उन्होंने पूछा कि जिस व्यक्ति का नाम ऐसी संदिग्ध फाइलों में हो, वो देश का कैबिनेट मंत्री कैसे बना रह सकता है? इस पर सदन में हंगामा हो। पहले तो संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में खड़े होकर राहुल गांधी से कहा कि आप सदन में जो आरोप मंत्री पर लगा रहे हैं उसका आपको प्रूव देना होगा हालांकि राहुल गांधी ने तुरंत कुछ कागज सदन निकाले लेकिन बाद में स्पीकर के बीच बचाव के बीच राहुल गांधी ने अपना भाषण पूरा किया।
हालांकि सदन खत्म होने के कुछ देर बार संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू का बयान आया कि राहुल गांधी के खिलाफ वो प्रिविलेज लाएंगे और उनसे इस बात का सबूत मांगेंगे कि उन्होंने कैसे हरदीप पुरी का एपस्टीन का आरोपी बता दिया। हालांकि यह बात पूरी तरह साफ है कि राहुल गांधी ने कहीं पर हरदीप पुरी को आरोपी नहीं बताया बल्कि कहा कि अगर एपस्टीन फाइल में मंत्री का नाम है तो उनको इस्तीफा देना चाहिए। लेकिन जब दूसरा दिन आया तो बीजेपी को स्टैंड बदल गया। बीजेपी ने निशिकांत दूबे को आगे कर दिया है। निशिकांत दूबे ने संसद पहुंचते ही सब्सटेंटिव मोशन का प्रस्ताव दिया और राहुल गांधी के खिलाफ कुछ अमर्यादित शब्द भी कहे। उन्होंने राहुल गांधी पर नक्सल अर्बन का आरोप लगाया है। अब ये प्रस्ताव सदन में आ चुका है और उस पर कार्यवाही होनी है।
सब्सटेंटिव मोशन एक कड़ी प्रक्रिया है। प्रस्ताव मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव की वैधता की जांच करते हैं और स्वीकार होने पर, इस पर सदन में बहस और अंततः मतदान कराया जा सकता है। चूँकि एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द की जा सकती है। निशिकांत दुबे ने प्रस्ताव में मांग की है कि राहुल गांधी को न केवल सदन से निकाला जाए, बल्कि उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने से भी आजीवन प्रतिबंधित कर दिया जाए। निशिकांत दूबे का आरोप है कि राहुल गांधी पर अर्बन नक्सल जैसा व्यवहार करने, देश को तोड़ने वाली ताकतों से संबंध रखने, विदेशी दौरों में संदिग्धों से मिलने और संवैधानिक संस्थाओं (सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग) का अपमान करने का आरोप लगाया है।
वैसे आज सदन का आखिरी दिन है अगले सेशन में जब सदन खुलेगा तो सबसे पहले इसी प्रस्ताव पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि राहुल गांधी सब्सटेंटिव मोशन के प्रस्ताव को सरकार चर्चा और वोटिंग करा सकती है। हालांकि कांग्रेस सांसदों को मानना है कि सब्सटेंटिव में कुछ बड़ा नहीं हो सकता है। क्योंकि जांच में ही सारा मामला खत्म हो जाएगा। प्रमोद तिवारी का कहना है कि जो संसदीय नियमों को जानता है ये उसके लिए हंसी जैसा है।
कांग्रेस का जहां एक ओर दावा है किया है कि राहुल गांधी सही कह रहे हैं तो विपक्ष समर्थन भी उनको मिला है। शिवसेना यूटीबी प्रवक्ता संजय राउत का कहना है कि राहुल गांधी की लड़ाई सही है वो जनता और लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं
हालाकि सरकार का मानना इसके उलट है। मोदी सरकार के मत्रियों का दावा है कि राहुल गांधी ने सदन को गुमराह किया है लेकिन सवाल बड़ा यह है कि आखिर क्या गुमराह किया है। यही कि राहुल गांधी ने सदन में कह दिया कि ट्रेड डील ट्रंप के दबाव है। एपस्पटीन में हरदीप पुरी का नाम है।
अगर ये दोनों बातें गलत है तो सरकार सदन में इसको बताए डेटा और तथ्यों के साथ। लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है बल्कि उल्टा वो राहुल गांधी को फंसाने के चक्कर में दिखाई दे रही है। इसके लिए मोशन पर मोशन लाए जा रहे है। खबर है कि निशिकांत दूबे के बाद अब संसदीय कार्य मंत्री जी भी नया मोशन लाने वाले हैं।
मंत्री जी का दावा है कि कल निशिकांत दूबे ले आए थे इस वजह से नहीं ला पाए लेकिन अब वो फिर से प्रिविलेज मोशन लाएंगे। कल जब प्रिविलेज मोशन लाने की बात पर सरकार ने यूटर्न ले लिया था तो चारों तरफ इस बात की चर्चा हुई थी कि शायद सरकार इसलिए प्रिविलेज मोशन नहीं लाना चाहती है कि अगर राहुल गांधी ने सदन में हरदीप पुरी के खिलाफ सबूत दे दिए तो क्या होगा। अब शायद सरकार इसी को कवर करती हुए प्रिविलेज मोशन लाने की बात दोबारा कर रही है।
ऐसे में साफ है कि एक ओर जहां सरकार मोशन-मोशन खेल रही है तो वहीं दूसरी ओर संसद में हरदीप पुरी के इस्तीफे की मांग कांग्रेस ने तेज कर दी है। वैसे आज बजट सत्र के पहले चार का आखिरी दिन है । अब दूसरा चरण नौ मार्च से शुरु होकर दो अप्रैल तक चलेगा। ऐसे में जिन दो मोशन की बात बीजेपी कर रही है, ऐसे में साफ है कि अगला चरण भी बहुत हंगामा खेज होने वाला है।
आपको क्या लगता है कि मोदी सरकार मोशन पर मोशन लाकर राहुल गांधी को चुप करा सकती है। सवाल यह भी है कि क्या मोदी सरकार हरदीप पुरी का इस्तीफा लेगी? या फिर एक बार फिर राहुल गांधी को ही निशाना बनाया जाएगा?



