रिश्वतखोर बाबू ने किया नए KDA VC का स्वागत, तस्वीरों से मचा बवाल

कानपुर KDA में नए VC अंकुर कौशिक के स्वागत कार्यक्रम के बाद विवाद खड़ा हो गया। विजिलेंस द्वारा रिश्वत लेते पकड़े गए कर्मचारी की मौजूदगी ने विभाग की कार्यसंस्कृति और भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: कानपुर विकास प्राधिकरण यानी KDA एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला किसी नई योजना या निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि विभाग की कार्यसंस्कृति और नैतिकता से जुड़ा हुआ है। KDA में नए उपाध्यक्ष के तौर पर आईएएस अधिकारी अंकुर कौशिक के स्वागत कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें सामने आने के बाद विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दरअसल, स्वागत समारोह में वह कर्मचारी भी सक्रिय भूमिका निभाते दिखाई दिया, जिस पर कुछ समय पहले 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा था और जिसे विजिलेंस टीम ने रंगे हाथ पकड़कर जेल भेजा था। अब उसी कर्मचारी का नए वीसी को बुके देकर सम्मान करना सवालों के घेरे में आ गया है।

स्वागत समारोह बना चर्चा का विषय

KDA में नए वीसी अंकुर कौशिक के आगमन पर कर्मचारी संघ की ओर से स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम को सामान्य शिष्टाचार मुलाकात और औपचारिक स्वागत बताया गया, लेकिन समारोह में शामिल चेहरों ने पूरे आयोजन को विवादों में ला दिया। जानकारी के मुताबिक सहायक लिपिक नीरज मेहरोत्रा भी स्वागत कार्यक्रम में मौजूद रहे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नीरज वही कर्मचारी हैं जिन्हें कुछ समय पहले विजिलेंस टीम ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अब उनकी मौजूदगी और सक्रियता को लेकर विभाग के भीतर फुसफुसाहट शुरू हो गई है।

विभाग की छवि पर उठने लगे सवाल

KDA पहले भी भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर सवालों में रहा है। ऐसे में रिश्वत के आरोप झेल चुके कर्मचारी का सार्वजनिक रूप से वरिष्ठ अधिकारी के स्वागत में आगे दिखाई देना कई लोगों को असहज कर रहा है। विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी संस्थानों की अपनी गरिमा और नैतिक मर्यादा होती है। ऐसे मामलों में आरोपित कर्मचारियों को संवेदनशील और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा जाना चाहिए, ताकि विभाग की छवि पर गलत असर न पड़े। हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाता है। लेकिन सार्वजनिक मंचों पर उनकी सक्रिय उपस्थिति को लेकर बहस जरूर तेज हो गई है।

कर्मचारी नेताओं के प्रभाव की भी चर्चा

सूत्र बताते हैं कि KDA में लंबे समय से कर्मचारी नेताओं और बाबुओं का प्रभाव रहा है। कई बार विभागीय फैसलों और माहौल पर भी इनका असर देखने को मिलता रहा है। यही वजह है कि नए वीसी अंकुर कौशिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ विकास परियोजनाओं को गति देना नहीं, बल्कि विभाग की कार्यसंस्कृति और छवि को सुधारना भी माना जा रहा है। स्वागत कार्यक्रम में कर्मचारी संघ के अध्यक्ष धीरज वाल्मीकि समेत कई अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। लेकिन अब पूरा फोकस उस चेहरे पर आ गया है जिसकी विजिलेंस कार्रवाई से जुड़ी पुरानी फाइलें फिर चर्चा में आ गई हैं।

क्या सरकारी कार्यक्रमों में तय होनी चाहिए नैतिक सीमा?

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है,  क्या भ्रष्टाचार के आरोप झेल चुके कर्मचारियों को सरकारी गरिमा वाले आयोजनों में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए? कानपुर के प्रशासनिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि अगर विभाग अपनी साख मजबूत करना चाहता है, तो उसे सिर्फ कार्रवाई ही नहीं बल्कि सार्वजनिक संदेश पर भी ध्यान देना होगा। क्योंकि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता केवल आदेशों से नहीं, बल्कि वहां दिखने वाली कार्यसंस्कृति से भी तय होती है।

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा 

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