चैतर वसावा ने उधेड़ दी BJP की बखिया | एकलव्य स्कूल उद्घाटन पर सवाल | नर्मदा भ्रष्टाचार बेनकाब

गुजरात के नर्मदा जिले में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के उद्घाटन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है... चैतर वसावा ने आरोप लगाया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के नर्मदा जिले के सागबारा तालुका में स्थित चोपाडवाव गांव में हाल ही में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय का उद्घाटन हुआ.. यह कार्यक्रम आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल के हाथों संपन्न हुआ.. लेकिन इसमें स्थानीय विधायक चैतर वसावा को आमंत्रित नहीं किया गया.. आपको बता दें कि चैतर वसावा आम आदमी पार्टी के विधायक हैं.. और डेडियापाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं.. उन्होंने इस घटना को राजनीतिक भ्रष्टाचार.. और सिस्टम की कमियों से जोड़ा है.. और उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता और प्रशासन उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं.. क्योंकि वे जनता के टैक्स के पैसे के दुरुपयोग पर सवाल उठाते हैं.. वहीं यह मामला गुजरात की राजनीति में एक नया विवाद पैदा कर रही है.. जहां आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर सवाल उठ रहे हैं..

जानकारी के मुताबिक यह स्कूल 28.56 करोड़ रुपये की लागत से बना है.. और आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.. उद्घाटन कार्यक्रम में कलेक्टर एस.के. मोदी.. पूर्व वन मंत्री मोतीलाल वसावा, जिला भाजपा अध्यक्ष नीलभाई राव और अन्य स्थानीय नेता मौजूद थे.. मंत्री नरेश पटेल ने कहा कि यह स्कूल आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा.. जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल होगा.. और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की दृष्टि का जिक्र करते हुए कहा कि.. शिक्षा से ही सच्चा विकास संभव है.. लेकिन इस कार्यक्रम की चमक के पीछे राजनीतिक तनाव छिपा है.. जो गुजरात के आदिवासी इलाकों में विकास.. और भ्रष्टाचार के मुद्दे को उजागर कर रहा है..

एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है.. जो आदिवासी बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की गई है.. आपको बता दें यह योजना 1997-98 में शुरू हुई थी.. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे.. और मजबूत किया गया.. नवंबर 2025 में पीएम मोदी ने गुजरात के डेडियापाड़ा में जनजातीय गौरव दिवस पर 42 EMRS का उद्घाटन किया.. जिनकी लागत करीब 1 हजार 900 करोड़ रुपये थी.. इसके अलावा 50 नए EMRS की आधारशिला रखी गई.. जिनकी लागत 2 हजार 320 करोड़ रुपये से ज्यादा है.. गुजरात में ये स्कूल आदिवासी बहुल जिलों जैसे नर्मदा, दांग, तापी और छोटा उदयपुर में बनाए जा रहे हैं..

जानकारी के अनुसार चोपाडवाव गांव का यह स्कूल भी इसी योजना का हिस्सा है.. यहां छात्रावास, आधुनिक क्लासरूम, लाइब्रेरी और खेल सुविधाएं हैं.. मंत्री पटेल ने उद्घाटन के दौरान कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा से गरीबी और पिछड़ापन दूर होगा.. लेकिन स्थानीय विधायक चैतर वसावा का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों में विपक्षी नेताओं को नजरअंदाज करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है.. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि मुझे राजनीतिक किन्नाखोरी के कारण आमंत्रित नहीं किया गया.. मैं जनता के टैक्स के पैसे के दुरुपयोग पर सवाल उठाता हूं.. जो भाजपा नेताओं को पसंद नहीं..

आपको बता दें कि चैतर वसावा गुजरात विधानसभा के सबसे युवा सदस्यों में से एक हैं.. उन्होंने इस घटना को भाजपा की राजनीतिक साजिश बताया.. और उन्होंने कहा कि पहले भी उनके निर्वाचन क्षेत्र के नव निर्माण चिकड़ा तालुका के उद्घाटन कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था.. वसावा के अनुसार भाजपा नेता विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं.. जैसे गुजरात मॉडल, विकसित भारत और विश्वगुरु, लेकिन हकीकत में आदिवासी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार व्याप्त है..

वसावा ने आरोप लगाया कि नर्मदा जिले में भाजपा नेताओं की मिलीभगत से भ्रष्टाचार हो रहा है.. उन्होंने 2022 में फर्जी वर्क ऑर्डर के जरिए 8 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र किया.. जहां कुओं, चेक डैम और लिफ्ट इरिगेशन स्कीमों के लिए फर्जी भुगतान किए गए.. इसके अलावा, आदर्श ग्राम योजना में 68 करोड़ रुपये में से सिर्फ 18 करोड़ गांवों तक पहुंचे.. बाकी 50 करोड़ अधिकारियों और एजेंसियों ने हड़प लिए.. जिसको लेकर वसावा ने विजिलेंस जांच की मांग की है..

गुजरात कांग्रेस ने भी इन आरोपों का समर्थन किया है.. कांग्रेस नेता अमित चावड़ा ने कहा कि भाजपा शासन में मनरेगा.. और नल से जल योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है.. और उन्होंने जन आक्रोश यात्रा में कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पानी, सड़क.. और बिजली की कमी है.. जबकि अवैध खनन चल रहा है.. कांग्रेस के अनुसार, भाजपा आदिवासियों की जमीन, जंगल और पानी छीन रही है..

आपको बता दें नर्मदा जिला आदिवासी बहुल है.. और यहां विकास योजनाओं पर अक्सर विवाद होते हैं.. दिसंबर 2025 में, भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने नर्मदा जिले में राजनीतिक नेतृत्व.. और प्रशासनिक सिस्टम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया.. और उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि भ्रष्टाचार से पार्टी की साख पर असर पड़ रहा है.. भाजपा विधायक दुष्यंत देशमुख ने इसका खंडन किया.. और मानहानि का नोटिस भेजा..

वहीं एक अन्य उदाहरण पार-तापी-नर्मदा नदी जोड़ो परियोजना है.. जिसे आदिवासियों के विरोध के कारण 2022 में रद्द कर दिया गया था.. आदिवासियों का कहना था कि इससे उनकी जमीनें डूब जाएंगी.. और वे विस्थापित हो जाएंगे.. कांग्रेस नेता अनंत पटेल ने भाजपा पर दोहरी बात करने का आरोप लगाया.. 2025 में यह प्रोजेक्ट फिर सुर्खियों में आया.. जब संसद में इसके डीपीआर का जिक्र हुआ.. जिससे आदिवासियों में गुस्सा फैल गया..

इसके अलावा, गुजरात में आदिवासी जिलों में कुपोषण की दर सबसे ऊंची है.. दाहोद, पंचमहल, छोटा उदयपुर, नर्मदा.. और डांग जिले देश के सबसे कुपोषित जिलों में शामिल हैं.. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार.. दाहोद में कुपोषण की दर 60 फीसदी से ज्यादा है.. चैतर वसावा ने कहा कि विश्व गुरु के दावों के बीच गुजरात भूखा है.. और भाजपा आदिवासियों के विकास पर ध्यान नहीं दे रही है..

गुजरात सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है.. मंत्री नरेश पटेल ने कहा कि EMRS जैसी योजनाएं आदिवासी सशक्तीकरण के लिए हैं.. और पिछले 6 वर्षों में 18 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए हैं.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी आदिवासी छात्रों से मुलाकात कर विकास पर जोर दिया.. लेकिन वसावा ने कलेक्टर से पूछा कि नर्मदा सिस्टम में क्या समस्या है.. किसके कहने पर हमें आमंत्रित नहीं किया गया..

 

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