गुरुवार को शेयर बाजार में कोहराम, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार की चाल बिगाड़ दी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार की चाल बिगाड़ दी।

सप्ताह के कारोबार के दौरान गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलने के बाद से ही निवेशकों के बीच दबाव बना रहा और कारोबार आगे बढ़ने के साथ बिकवाली और तेज होती चली गई। चौतरफा बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के दौरान निफ्टी 50 ने इंट्रा-डे में 22,179.90 का स्तर छू लिया, जो 2026 में अब तक का उसका सबसे निचला स्तर बताया गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ी कमी देखने को मिली।

सेंसेक्स में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट

कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

शुरुआती कारोबार से ही बाजार पर बिकवाली का दबाव रहा और बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल समेत कई प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में कमजोरी दिखाई दी। सेंसेक्स में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ा। बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली बढ़ने के कारण बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ और निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाना शुरू कर दिया।

निफ्टी 50 भी 22,200 के करीब पहुंचा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 भी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 22,231.80 के स्तर पर बंद हुआ। इंट्रा-डे कारोबार के दौरान निफ्टी 22,179.90 के स्तर तक फिसल गया। यह 2026 में अब तक का इसका सबसे निचला स्तर रहा। निफ्टी में लगातार दूसरे प्रमुख इंडेक्स की तुलना में भी तेज दबाव दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी में कमजोरी का प्रमुख कारण विदेशी बाजारों से मिले नकारात्मक संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली रही।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बढ़ाई चिंता

भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी शामिल रही। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने से देश के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता रहती है।

तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और चालू खाते के मोर्चे पर भी बाजार की चिंता बढ़ सकती है। यही वजह है कि जब क्रूड में तेज उछाल आता है तो भारतीय बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है। गुरुवार को भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी रही और इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दिया।

भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का कारोबारी सत्र बेहद कमजोर रहा। सेंसेक्स में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट और निफ्टी के 2026 के निचले स्तर पर पहुंचने से बाजार में चिंता बढ़ी है। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सत्र पर रहेगी कि बाजार इस तेज गिरावट के बाद संभलता है या बिकवाली का दबाव आगे भी बना रहता है। बाजार की अगली दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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