Market Crash का बड़ा झटका! ₹49 लाख करोड़ साफ, इन कंपनियों ने डुबोया पैसा

शेयर की कीमत गिरने से कंपनी की कुल बाजार वैल्यू कितनी कम हुई, उसका हिसाब है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शेयर बाजार से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है… दरअसल, Nifty 50 की 47 कंपनियों ने मिलकर अपने रिकॉर्ड हाई से करीब ₹48.77 लाख करोड़ की market value गंवा दी है…

यानी ₹49 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए हैं… जिसके बाद निवेशक डरे हुए हैं… बड़ी बात ये है कि बड़ा नुकसान छोटी-मोटी कंपनियों को नहीं, बल्कि देश की बड़ी और जानी-मानी कंपनियां को हुआ है, जिसमें —TCS, HDFC Bank, Reliance Industries, Infosys, ITC, HUL, Wipro, SBI और Bharti Airtel जैसों का नाम शामिल है…

लेकिन, यहां एक बात सबसे पहले समझना जरूरी है कि, क्या सच में ₹49 लाख करोड़ निवेशकों की जेब से निकल गया? तो, इसका जवाब है कि, मामला थोड़ा अलग है। क्योंकि, ये रकम इन कंपनियों के market capitalisation में आई गिरावट है। यानी शेयर की कीमत गिरने से कंपनी की कुल बाजार वैल्यू कितनी कम हुई, उसका हिसाब है।

 

और क्या इतनी बड़ी गिरावट के बाद इन शेयरों में खरीदारी का मौका बन गया है या फिर ये Value Trap साबित हो सकते हैं? चलिए, आज की इस पूरी कहानी को आसान भाषा में समझते हैं।

सबसे पहले समझिए ₹49 लाख करोड़ का मतलब—

दरअसल, जब ये कहा जाता है कि ₹48.77 लाख करोड़ की market value खत्म हो गई, तो इसका मतलब ये नहीं है कि कंपनियों के बैंक अकाउंट से ₹49 लाख करोड़ निकल गए या निवेशकों ने मिलकर इतना पैसा cash में गंवा दिया। ये market capitalisation का erosion यानि क़ि कटाव है।

Market Cap यानी कंपनी के सभी शेयरों की बाजार कीमत। मान लीजिए किसी कंपनी के 100 शेयर हैं और हर शेयर की कीमत ₹100 है। तो कंपनी की market value हुई—100× ₹100 = ₹10,000

अब अगर शेयर की कीमत गिरकर ₹70 हो जाए, तो market value हो जाएगी ₹7,000। यानी market cap में ₹3,000 की कमी। इसी तरह जब किसी बड़ी कंपनी के करोड़ों शेयरों की कीमत गिरती है, तो उसकी market value में हजारों करोड़ या लाखों करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। और Nifty की इन 47 कंपनियों में यही हुआ है। ACE Equity के आंकड़ों के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपने-अपने record high market capitalisation से कुल ₹48.77 लाख करोड़ गंवाए हैं।

अब, आते हैं सबसे बड़े नुकसान पर—इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा झटका लगा है TCS यानी Tata Consultancy Services को। TCS का शेयर अपने all-time high से करीब 49 फीसदी नीचे है। कंपनी की market cap उसके record-high वाले दिन करीब ₹16.48 लाख करोड़ थी। अब ये घटकर करीब ₹8.47 लाख करोड़ रह गई है। यानी TCS की market value में ₹8 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आई है। और, यही इस पूरी लिस्ट में सबसे बड़ा absolute नुकसान है।

सोचिए, एक कंपनी की market value में ₹8 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी! लेकिन TCS अकेली नहीं है।

नंबर 2- पर HDFC Bank है। देश के सबसे बड़े private sector banks में शामिल HDFC Bank का शेयर अपने peak से करीब 29.4 फीसदी नीचे आया है।इस गिरावट के चलते बैंक की market capitalisation में करीब ₹4.40 लाख करोड़ की कमी हुई है। यानी सिर्फ TCS और HDFC Bank को जोड़ दें तो करीब ₹12.4 लाख करोड़ की market value erosion हो चुकी है।

HDFC के साथ-साथ Reliance और Infosys को भी बड़ा झटका लगा है। Reliance की market capitalisation में record high से करीब ₹3.94 लाख करोड़ की कमी आई है। वहीं, IT कंपनी Infosys ने करीब ₹3.66 लाख करोड़ की market value गंवाई है। अब अगर TCS, HDFC Bank, Reliance और Infosys—इन चारों को जोड़ें तो कुल नुकसान करीब ₹20 लाख करोड़ बैठता है। यानी इन चार कंपनियों ने अकेले ही पूरी ₹48.77 लाख करोड़ की गिरावट का लगभग 41 फीसदी हिस्सा अपने ऊपर लिया है।

इससे ITC का भी बड़ा नुकसान हुआ है। ITC का शेयर अपने record high से करीब 50 फीसदी नीचे है। इसके कारण कंपनी की market value में करीब ₹3.20 लाख करोड़ की कमी आई है। तो, अगर हम TCS, HDFC Bank, Reliance, Infosys और ITC को जोड़ें, तो इन पांच कंपनियों का कुल market-cap erosion करीब ₹23.21 लाख करोड़ है।

मतलब—पूरे ₹48.77 लाख करोड़ के नुकसान का लगभग आधा हिस्सा सिर्फ पांच कंपनियों से आया है।

आप, अब टेक कंपनियों की पूरी तस्वीर समझिए। इस गिरावट में IT sector की भूमिका भी काफी बड़ी है। TCS, Infosys, Wipro, HCL Technologies और Tech Mahindra—इन 5 IT कंपनियों की market value में मिलाकर करीब ₹15.65 लाख करोड़ की कमी आई है। इनमें Wipro का शेयर अपने peak से करीब 51.1 फीसदी नीचे है। वहीं, HCL Technologies करीब 34.6 फीसदी नीचे है और उसकी market value में करीब ₹1.83 लाख करोड़ की कमी आई है।

यानी IT sector में सवाल सिर्फ शेयर की कीमत का नहीं है। बाजार इस समय बड़ी IT कंपनियों की future growth, earnings और valuation को लेकर ज्यादा सावधान नजर आ रहा है।

आइए जानते हैं कि, बाकी कंपनियों का क्या हाल है? इस लिस्ट में सिर्फ IT और बैंकिंग कंपनियां ही नहीं हैं। Hindustan Unilever की market value में करीब ₹2.39 लाख करोड़ की कमी आई। Wipro ने करीब ₹2.09 लाख करोड़ गंवाए। SBI की market value में करीब ₹1.62 लाख करोड़ की कमी हुई।
Bharti Airtel को करीब ₹1.43 लाख करोड़ का market-cap erosion हुआ।

इसके अलावा, Trent, ONGC, Maruti Suzuki और NTPC जैसी कंपनियों की market value में भी एक-एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई है।कुल मिलाकर Nifty की 14 कंपनियों की market capitalisation में एक-एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी हुई है।

हालांकि यहां बड़ा सवाल ये है क़ि, जब Nifty इतना कमजोर है तो Index पूरी तरह क्यों नहीं टूटा? यहीं पर कहानी थोड़ी बदल जाती है। 28 अगस्त को Nifty 50 करीब 24,175 पर बंद हुआ, जबकि Sensex करीब 77,265 पर बंद हुआ। उस दिन Nifty में 0.35 फीसदी और Sensex में 0.43 फीसदी की तेजी भी आई थी।

तो, फिर सवाल उठता है—अगर इतनी बड़ी कंपनियों की market value में इतनी बड़ी गिरावट हुई है, तो Index इतना ज्यादा क्यों नहीं टूटा?इसका एक बड़ा कारण है कि बाजार के अलग-अलग हिस्सों में performance एक जैसा नहीं है। कुछ बड़े और पुराने mega-cap stocks कमजोर रहे हैं, जबकि market के दूसरे हिस्सों—खासकर कुछ mid-cap और small-cap कंपनियों—में activity और growth ज्यादा दिखाई दे रही है।यानी ऊपर से देखने पर Nifty एक जगह खड़ा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके अंदर अलग-अलग कंपनियों की कहानी बिल्कुल अलग हो सकती है।

ये भी जानते हैं कि आखिर, इन बड़ी कंपनियों के शेयर क्यों दबाव में हैं?TCS, Infosys, HDFC Bank, Reliance, ITC जैसी बड़ी कंपनियों में इतनी गिरावट आखिर क्यों आई? तो, इसका कोई एक कारण नहीं है।

पहला कारण है- valuation और earnings growth का gap….जब बाजार किसी कंपनी से बहुत ज्यादा growth की उम्मीद करता है और बाद में earnings उसी रफ्तार से नहीं बढ़तीं, तो शेयर की valuation पर दबाव आता है।

दूसरा कारण है- नए buyers की कमी। कुछ analysts का कहना है कि बहुत से बड़े mega-cap stocks पहले से ही बड़े institutional investors और funds के portfolio में हैं।

यानी जो लोग इन कंपनियों को खरीदना चाहते थे, उनमें से काफी लोग पहले ही खरीद चुके हैं। ऐसे में, अगर नए buyers की संख्या कम हो जाए और sellers बढ़ जाएं, तो शेयर पर दबाव आ सकता है।

तीसरा factor है global uncertainty। Interest rates, geopolitical tension, crude oil और global growth को लेकर uncertainty का असर इंडियन बाजार पर भी पड़ता है। हाल के sessions में बाजार में volatility भी देखने को मिली है। 27 अगस्त को Nifty करीब आधा फीसदी गिरा था, जबकि 28 अगस्त को IT stocks में खरीदारी से बाजार ने कुछ recovery दिखाई।

तो, क्या ₹49 लाख करोड़ का नुकसान एक मौका है? जवाब है—कुछ कंपनियों में हां, लेकिन पूरी Nifty में नहीं। यही सबसे important बात है।इतनी बड़ी गिरावट के बाद कुछ stocks valuation के लिहाज से attractive हो सकते हैं।लेकिन सिर्फ इस वजह से कि कोई stock अपने high से 40 या 50 फीसदी गिर चुका है, उसे blindly खरीदना सही strategy नहीं होगी।

ऐसे में, अगर आप इस समय market में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ ये मत देखिए कि—“शेयर कितना गिर गया?” इसके बजाय ये देखिए—कंपनी की कमाई कितनी बढ़ रही है?Profit margin कैसा है?कर्ज कितना है?Business में competition कितना है?Management का track record कैसा है?

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