ST भर्ती में 40% कटऑफ पर बवाल, चैतर वसावा ने दी आंदोलन की चेतावनी   

गुजरात में लगभग 2389 राजस्व तलाटी भर्ती प्रक्रिया में हर पेपर में 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक तय किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया हमेशा से ही युवाओं के लिए उम्मीद की किरण रही है.. लेकिन हाल ही में राजस्व तलाटी (तलाटी मंत्री क्लास-III) की भर्ती में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.. गुजरात गौण सेवा चयन मंडल ने इस भर्ती के लिए हर पेपर में 40 प्रतिशत न्यूनतम अंक अनिवार्य कर दिए हैं.. यह नियम अनुसूचित जनजाति (ST) उम्मीदवारों के लिए भी लागू है.. जिसे AAP विधायक चैतर वसावा ने संविधान के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया है.. और उन्होंने मंडल से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है.. और अगर मांग नहीं मानी गई तो राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है.. यह मुद्दा न सिर्फ गुजरात के आदिवासी समाज को प्रभावित कर रहा है.. बल्कि पूरे देश में आरक्षण नीति पर बहस छेड़ रहा है..

गुजरात में राजस्व तलाटी की भर्ती ग्रामीण इलाकों में राजस्व संबंधी कामों के लिए होती है.. यह पद गांव स्तर पर महत्वपूर्ण है.. जहां तलाटी भूमि रिकॉर्ड, कर वसूली और अन्य प्रशासनिक काम संभालते हैं.. GSSSB ने 2025 में लगभग 2389 पदों के लिए भर्ती निकाली थी.. इसमें प्रारंभिक परीक्षा (प्रेलिम्स) और मुख्य परीक्षा (मेन्स) शामिल हैं.. प्रेलिम्स 200 अंकों की होती है.. जिसमें सामान्य ज्ञान, गणित, अंग्रेजी आदि विषय होते हैं.. मेन्स में भी कई पेपर हैं.. और हर पेपर में कम से कम 40% अंक लाना जरूरी है.. यह भर्ती ST, SC, OBC और सामान्य वर्गों के लिए आरक्षित पदों पर आधारित है.. लेकिन न्यूनतम अंक सभी के लिए समान रखे गए हैं..

पिछले वर्षों में गुजरात में तलाटी भर्ती काफी चर्चित रही है.. उदाहरण के लिए, 2022 में 3400 पदों के लिए 18 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे.. जिसमें इंजीनियर जैसे उच्च शिक्षित युवा भी शामिल थे.. जो यह दिखाता है कि सरकारी नौकरियों की मांग कितनी ज्यादा है.. लेकिन इस बार का विवाद न्यूनतम अंकों पर है.. GSSSB का कहना है कि यह नियम परीक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए है.. लेकिन विपक्षी नेता इसे ST उम्मीदवारों के खिलाफ बताते हैं.. भर्ती की अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि उम्मीदवारों को हर स्टेज में 40% अंक लाने होंगे.. वरना वे आगे नहीं बढ़ सकेंगे.. परीक्षा शुल्क भी 40% से ज्यादा अंक वाले उम्मीदवारों को रिफंड किया जाता है.. जो सामान्य प्रक्रिया है..

आपको बता दें कि विवाद की जड़ में ST उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंकों में कोई छूट न देना है.. AAP विधायक चैतर वसावा, जो देदियापाड़ा विधानसभा से चुनकर आए हैं.. उन्होंने 20 जनवरी 2026 को GSSSB अध्यक्ष को एक आवेदन दिया.. इसमें उन्होंने कहा कि 40% का नियम संविधान के अनुच्छेद 16(4) और 335 का उल्लंघन करता है.. वसावा का तर्क है कि आरक्षित और गैर-आरक्षित वर्गों के लिए समान मानदंड नहीं हो सकते.. क्योंकि ST समुदाय की सामाजिक-शैक्षणिक स्थिति अलग है.. और उन्होंने गुजरात लोक रक्षक भर्ती का उदाहरण दिया.. जहां पहले भी ST उम्मीदवारों को उनके अधिकारों से वंचित किया गया था..

वसावा ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया.. जिसमें उन्होंने पूरे मुद्दे को विस्तार से समझाया.. और उन्होंने लिखा कि देश भर में भर्तियों में SC/ST को न्यूनतम अंकों में छूट दी जाती है.. लेकिन गुजरात में ऐसा नहीं हो रहा है.. अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आदिवासी समाज आंदोलन करेगा.. जानकारी के मुताबिक ये मुद्दा आदिवासी समुदाय में गूंज रहा है.. रेप्लाइज में कुछ लोगों ने समर्थन किया.. जैसे एक यूजर ने कहा कि यह मूल अधिकारों का हनन है.. जबकि कुछ ने विरोध किया, कहते हुए कि 40% सभी के लिए जरूरी है.. ताकि योग्य उम्मीदवार आएं.. वसावा गुजरात के सबसे युवा विधायकों में से एक हैं.. और आदिवासी मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं.. उनके इस कदम से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है..

भारत का संविधान आरक्षण को सामाजिक न्याय का आधार बनाता है.. अनुच्छेद 16(4) कहता है कि राज्य पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण दे सकता है.. अगर वे पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हैं.. यह ST/SC को अवसर देने के लिए है.. अनुच्छेद 335 कहता है कि SC/ST के दावों को ध्यान में रखते हुए.. प्रशासन की दक्षता बनाए रखनी चाहिए.. लेकिन इसमें परीक्षाओं में छूट देने की अनुमति है..

सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि SC/ST को न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स में छूट दी जा सकती है.. 5 से 10 प्रतिशत की छूट सामान्य है.. DoPT (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) की गाइडलाइंस में SC/ST के लिए आयु में 5 साल की छूट.. और क्वालिफाइंग मार्क्स में कमी का प्रावधान है.. लेकिन अगर कोई ST उम्मीदवार जनरल कटऑफ पार करता है.. तो वह जनरल कैटेगरी में माइग्रेट कर सकता है.. लेकिन अगर रिलैक्सेशन लिया है तो नहीं.. वसावा का तर्क यही है कि 40% का सख्त नियम ST की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करता है.. जैसे शिक्षा की कमी और सामाजिक पिछड़ापन..

देश भर में सरकारी भर्तियों में SC/ST को छूट दी जाती है.. UPSC सिविल सर्विसेज में जनरल के लिए 50% क्वालिफाइंग.. लेकिन SC/ST के लिए 45% या कम.. SSC में भी 5-10% रिलैक्सेशन.. मध्य प्रदेश में TET परीक्षा में 10-20% छूट दी गई.. गुजरात में ही पहले लोक रक्षक भर्ती में ST को छूट दी गई थी.. लेकिन अब तलाटी में नहीं है.. 2015 में गुजरात हाईकोर्ट ने एक केस में कहा कि SC महिलाओं के लिए 10% कटऑफ छूट दी जा सकती है.. अगर पर्याप्त उम्मीदवार न हों..

 

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