कागजों में सफाई अभियान, गांव में गंदगी का राज: लाखों के खर्च पर उठे सवाल

सीतापुर जनपद के बाढ़ और कटान से सर्वाधिक प्रभावित विकासखंड रामपुर मथुरा की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर कदीम एक बार फिर विकास कार्यों को लेकर सवालों के घेरे में है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सीतापुर जनपद के बाढ़ और कटान से सर्वाधिक प्रभावित विकासखंड रामपुर मथुरा की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर कदीम एक बार फिर विकास कार्यों को लेकर सवालों के घेरे में है।

जहां सरकारी दस्तावेजों में गांव को साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सुविधायुक्त दिखाया गया है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में विकास और स्वच्छता के नाम पर तीन लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई, लेकिन न तो नालियों की स्थिति सुधरी और न ही पेयजल व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं ठीक हो सकीं।

गांव में बदहाल व्यवस्था, नालियां टूटी, हैंडपंप खराब

स्थानीय लोगों के अनुसार मोहम्मदपुर कदीम के मजरा मेडिया में हालात बेहद खराब हैं। घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए बनी नालियां लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं और उनमें गंदगी जमा रहती है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे जलभराव और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं, जिनकी मरम्मत के लिए बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

कई हैंडपंप वर्षों से बंद, ग्रामीण परेशान

मेडिया निवासी सुरेश का कहना है कि उनके घर के सामने लगा हैंडपंप कई वर्षों से खराब है। उन्होंने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद भी इसे ठीक नहीं कराया गया। वहीं एक अन्य ग्रामीण मुर्तजा ने भी यही शिकायत दोहराई। उन्होंने बताया कि गांव में कुछ हैंडपंप ऐसे भी हैं जो चलते तो हैं, लेकिन पानी बहुत देर बाद निकलता है और उसकी गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है।

सफाई और ब्लीचिंग कार्यों पर ग्रामीणों के सवाल

गांव के कई निवासियों—राजेश, मैनुद्दीन, रामचंद्र, शीलू, रिजवान और मेराज—ने आरोप लगाया कि गांव में नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में नियमित सफाई नहीं होती,नालियों की सफाई लंबे समय से नहीं की गई
चूना और ब्लीचिंग का छिड़काव कागजों तक सीमित है,तालाबों की सफाई और भराई का कार्य भी धरातल पर दिखाई नहीं देता,सार्वजनिक शौचालय बदहाल स्थिति में

ग्राम पंचायत के खुर्द गांव निवासी परशुराम ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय कई वर्षों से खराब हालत में है। शौचालय के आसपास झाड़ियां उग आई हैं और वहां लगा हैंडपंप भी लंबे समय से बंद पड़ा है, जिससे यह सुविधा पूरी तरह अनुपयोगी हो चुकी है।

विकास कार्यों के नाम पर खर्च का विवरण

सूचना के अनुसार ग्राम पंचायत में विभिन्न मदों में सरकारी धन का व्यय दिखाया गया है:

सफाई कार्य: रू25,128
नल मरम्मत व रीबोर: रू80,720
चूना व ब्लीचिंग: रू 51,320
तालाब भराई: रू25,350
मिट्टी पटाई: रू70,440
फोटोकॉपी: रू11,124
स्टेशनरी: रू8,780
उद्देश्य मद: रू45,986

कुल मिलाकर इन कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इनका प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आता।

ग्राम प्रधान का पक्ष

इस मामले पर ग्राम प्रधान श्रवण कुमार ने कहा कि गांव में नियमित सफाई कराई गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि खराब हैंडपंपों की मरम्मत के लिए मिस्त्री को निर्देश दे दिए गए हैं।

पूर्व पंचायत सचिव का बयान

पूर्व पंचायत सचिव संजीव गुप्ता ने बताया कि उनका अब यहां से स्थानांतरण हो चुका है और वर्तमान स्थिति से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

खंड विकास अधिकारी प्रतिभा जायसवाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ग्रामीणों की शिकायत की जांच कराई जाएगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

मोहम्मदपुर कदीम में सामने आया यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बीच बढ़ते अंतर को उजागर करता है। एक ओर कागजों में विकास की तस्वीर चमकदार दिखाई जाती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीण आज भी संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की जांच में क्या सामने आता है और क्या वास्तव में जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हो पाती है या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबकर रह जाता है।

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