कांग्रेस, AIMIM, BJP ने मिलाया हाथ, महाराष्ट्र से सामने आई चौंकाने वाली सियासी तस्वीर

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हैरान करने वाला घटनाक्रम सामने आया है... जहां कांग्रेस, AIMIM और BJP के साथ आने की तस्वीरों...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर अनोखे गठजोड़ देखने को मिलते हैं.. लेकिन हाल ही में अमरावती जिले की अचलपुर नगर परिषद में BJP, AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) और कांग्रेस के बीच हुआ तालमेल सबको हैरान कर गया है.. ये तीनों दल, जो राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं.. स्थानीय स्तर पर विभिन्न समितियों के अध्यक्षों के निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आपस में समझौता कर लिया.. यह घटना 21-22 जनवरी 2026 के आसपास हुई.. जब नगर परिषद की विषय समितियों के सभापतियों का चुनाव हुआ..

आपको बता दें यह तालमेल ऐसे समय हुआ जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही ऐसे गठजोड़ों की कड़ी निंदा की थी.. और चेतावनी दी थी.. इससे कुछ दिन पहले अकोट नगर परिषद में BJP-AIMIM.. और अंबरनाथ में BJP-कांग्रेस के गठजोड़ विवादास्पद बने थे.. लेकिन अचलपुर में तीनों दलों ने मिलकर काम किया.. कांग्रेस ने 15 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.. फिर भी सत्ता बंटवारे में शामिल हुई.. यह घटना महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में व्यावहारिक राजनीति, सत्ता के गणित.. और विचारधारा के बीच टकराव को उजागर करती है..

बता दें अचलपुर नगर परिषद में कुल 41 पार्षद हैं.. हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को 15 सीटें, भाजपा को 9 सीटें, AIMIM को 3 सीटें, निर्दलीय को 10 सीटें, प्रहार जनशक्ति पार्टी को 2 सीटें.. NCP (अजित पवार गुट) को 2 सीटें मिली.. कोई भी दल अकेले बहुमत (21 सीटें) नहीं हासिल कर पाया.. इसलिए सत्ता या समितियों के नियंत्रण के लिए गठजोड़ जरूरी हो गया.. समितियों के अध्यक्षों के चुनाव में BJP, AIMIM और कांग्रेस ने तालमेल किया.. और मुख्य समितियां बंटीं.. जिसमें शिक्षा एवं खेल समिति का अध्यक्ष..  AIMIM के एक पार्षद को निर्विरोध चुना गया.. जलापूर्ति समिति का अध्यक्ष.. कांग्रेस के एक पार्षद को बनाया गया.. वहीं महिला एवं बाल कल्याण समिति का अध्यक्ष.. BJP के एक पार्षद को सौंपी गई..

वहीं ये चुनाव बिना विरोध के पूरे हुए.. जो दर्शाता है कि तीनों दलों ने एक-दूसरे का समर्थन किया.. नगर परिषद में आमतौर पर 5-7 विषय समितियां होती हैं.. (शिक्षा, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, निर्माण, महिला-बाल कल्याण आदि).. इन तीन प्रमुख समितियों पर तालमेल से स्थानीय प्रशासन में तीनों दलों की भागीदारी सुनिश्चित हुई.. निर्दलीय और छोटे दलों को भी शायद शामिल किया गया हो.. लेकिन मुख्य फोकस इन तीनों पर था..

जानकारी के अनुसार अचलपुर से BJP के विधायक प्रवीण तयाडे ने इस तालमेल पर नाराजगी जताई.. और उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें इस फैसले में विश्वास में नहीं लिया गया.. स्थानीय निकाय चुनावों में उन्हें सिर्फ वार्ड नंबर 1 की जिम्मेदारी दी गई थी.. AIMIM से गठजोड़ पर पूछे जाने पर उन्होंने साफ कहा कि मैं हिंदुत्व विचारधारा वाला विधायक हूं.. और हमारी पार्टी भी हिंदुत्व की विचारधारा पर काम करती है.. इसलिए मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता.. हालांकि, इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता जो भी निर्णय लेंगे.. हम उसे स्वीकार करेंगे..

वहीं यह बयान पार्टी के अंदर असंतोष को दिखाता है… तयाडे अमरावती क्षेत्र के प्रभावशाली नेता हैं.. और हिंदुत्व को अपना मुख्य एजेंडा मानते हैं.. अचलपुर की घटना अलग नहीं है.. इससे पहले दो और जगहों पर ऐसे ही विवादास्पद गठजोड़ हुए थे.. पहला मामला अकोला जिले की अकोट नगर परिषद का है.. स्थानीय निकाय चुनावों के बाद BJP ने AIMIM के साथ गठजोड़ किया ताकि सत्ता हासिल की जा सके.. यह खबर सामने आते ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त रुख अपनाया.. और उन्होंने कहा कि AIMIM जैसे दलों से गठजोड़ स्वीकार्य नहीं है.. फटकार के बाद गठजोड़ कुछ घंटों में ही टूट गया.. अकोट में BJP के स्थानीय नेताओं को शो-कॉज नोटिस भी जारी हुआ.. फडणवीस ने साफ चेतावनी दी कि स्थानीय इकाइयां बिना उच्च नेतृत्व की मंजूरी के ऐसे फैसले नहीं ले सकती..

दूसरा बड़ा मामला ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद का है.. यहां शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने सबसे ज्यादा 27 सीटें जीतीं.. (कुल सदस्य संख्या लगभग 60-70).. BJP को 14, कांग्रेस को 12 और NCP को 4 सीटें मिली.. शिवसेना को सत्ता से दूर रखने के लिए BJP ने कांग्रेस के 12 पार्षदों और NCP के साथ गठजोड़ कर लिया.. इसे ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (AVA) के जरिए BJP का पार्षद अध्यक्ष बना..

कांग्रेस हाईकमान ने इसे बर्दाश्त नहीं किया.. महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी 12 पार्षदों को तुरंत निलंबित कर दिया.. राज्य अध्यक्ष हर्षवर्धन सप्ता और उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने कहा कि बिना अनुमति के भाजपा से हाथ मिलाना पार्टी विरोधी है.. लेकिन इन 12 पार्षदों ने बाद में BJP में शामिल होने का फैसला कर लिया.. अंबरनाथ मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट भी शामिल हुआ.. अदालत ने ठाणे कलेक्टर को इस विवाद की जांच सौंपी.. और अस्थायी राहत दी.. कोर्ट ने पार्षदों को ‘ग्लोबट्रॉटर’ (बार-बार पक्ष बदलने वाले) कहा.. और स्थिरता पर जोर दिया..

इन दोनों घटनाओं के बाद फडणवीस ने पूरे राज्य में BJP इकाइयों को निर्देश दिए कि कांग्रेस या AIMIM से गठजोड़ न करें.. लेकिन अचलपुर में फिर ऐसा ही तालमेल देखने को मिला.. हालांकि यह पूरा सत्ता गठबंधन नहीं बल्कि सिर्फ समितियों के अध्यक्षों तक सीमित था.. महाराष्ट्र में 2024 विधानसभा चुनावों के बाद महायुति (BJP, शिवसेना शिंदे, NCP अजित पवार) सत्ता में है.. जबकि MVA (कांग्रेस, शिवसेना उद्धव, NCP शरद पवार) विपक्ष में है.. स्थानीय निकाय चुनावों में कई जगहों पर खंडित जनादेश आया है.. नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में बहुमत हासिल करना मुश्किल हो जाता है.. इसलिए छोटे-छोटे गठजोड़ आम हैं..

स्थानीय स्तर पर मुद्दे अलग होते हैं.. पार्षद सत्ता में हिस्सा चाहते हैं ताकि अपने वार्ड में विकास काम करा सकें.. विचारधारा से ज्यादा व्यावहारिक फायदा देखा जाता है.. लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर BJP AIMIM को ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का प्रतीक मानती है.. जबकि कांग्रेस BJP को ‘सांप्रदायिक’ कहती है.. अचलपुर में AIMIM को सिर्फ 3 सीटें मिली.. लेकिन उसे एक महत्वपूर्ण समिति मिल गई.. इससे AIMIM को मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूती मिल सकती है.. अचलपुर अमरावती डिवीजन में है.. जहां मुस्लिम आबादी भी है..

 

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