भोपाल में कांग्रेस की महाचौपाल

राहुल गांधी ने किसानों के समर्थन में भरी हुंकार

खरगे भी हुए शामिल, ट्रेड डील का सबसे ज्यादा असर भोपाल के किसानों पर
वैश्विक साझेदारी या आत्मनिर्भरता पर हमला?

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
भोपाल। भोपाल में कांग्रेस की किसान महाचौपाल को लेकर आज बड़ा राजनीतिक जमावड़ा देखने को मिल रहा है। यह कार्यक्रम भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किया गया है और इसे कांग्रेस ने राष्ट्रीय किसान आंदोलन की शुरुआत का मंच बनाया है। कार्यक्रम भोपाल के जवाहर चौक पर आयोजित किया जा रहा है जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ट्रेड डील की बखिया उधेड़ते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को सरकार ऐतिहासिक उपलब्धि और आर्थिक मजबूती का प्रतीक बता रही है लेकिन इसके समानांतर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक तूफान आकार ले रहा है। विपक्ष खासकर कांग्रेस इसे भारत के किसानों छोटे उद्यमियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बता रही है। कांग्रेस का आरोप है कि यह डील भारत के बाजार को अमेरिकी कॉर्पोरेट और कृषि उत्पादों के लिए खोल देगी, जिससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसान असमान प्रतिस्पर्धा में फंस जाएंगे। इसी खतरे को केंद्र में रखते हुए कांग्रेस ने आज भोपाल से राष्ट्रव्यापी किसान आंदोलन की शुरुआत का बिगुल बजा दिया है। जिसमें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किसानों के बीच पहुंचकर अपनी बता रखी।

छोटे किसानों पर सबसे बड़ा खतरा : असमान प्रतिस्पर्धा की चुनौती

भारत के कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता और छोटे किसानों की संख्या है, लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन सकती है। अमेरिका में खेती बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे होती है। वहां के किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकते हैं, जबकि भारत के किसान सीमित संसाधनों और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। अगर ट्रेड डील के तहत अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दामों पर आने लगे, तो भारतीय किसानों की फसल की कीमत गिर सकती है। इससे उनकी आय में भारी गिरावट आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। कांग्रेस का दावा है कि यह स्थिति लाखों किसानों को कर्ज और आर्थिक संकट की ओर धकेल सकती है।

किसान महाचौपाल बनेगी राष्ट्रीय मंच

कांग्रेस भोपाल में आयोजित होने वाली किसान महाचौपाल को सिर्फ एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम नहीं बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।मध्य प्रदेश को इस अभियान के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां करीब 80 लाख किसान परिवार हैं जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत सीमांत किसान हैं। और यह वह किसान हैं जिनके पास
1 हेक्टेयर से भी कम जमीन है और जिनकी आजीविका पूरी तरह स्थानीय बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर निर्भर करती है। कांग्रेस का मानना है कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में कम शुल्क पर आने लगे तो स्थानीय किसानों के लिए अपनी उपज बेचना लगभग असंभव हो जाएगा। महाचौपाल के जरिए कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनाना चाहती है और यह संदेश देना चाहती है कि यह डील सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संकट भी पैदा कर सकती है।

छोटे उद्योग और स्थानीय बाजार पर भी संकट के बादल

यह डील सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है। छोटे और मध्यम उद्योग भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। भारत के लाखों छोटे उद्योग स्थानीय बाजार पर निर्भर हैं। अगर अमेरिकी कंपनियों को भारत में अधिक छूट मिलती है, तो वे सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पाद बेचकर स्थानीय उद्योगों को पीछे छोड़ सकती हैं। इससे रोजगार पर भी गंभीर असर पड़ेगा। छोटे उद्योग बंद होंगे तो बेरोजगारी बढ़ेगी और इसका सीधा असर ग्रामीण और शहरी गरीबों पर पड़ेगा। कांग्रेस का कहना है कि यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दावों के विपरीत है।

8 लाख की उड़ान फिर भी बुझ गई जिंदगी

रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस क्रैश सात की मौत डीजीसीए ने दिये जांच के आदेश

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
रायपुर। झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली इलाज के लिए ले जाए जा रहे 41 वर्षीय संजय कुमार के लिए एयर एंबुलेंस सिर्फ एक उड़ान नहीं थी, बल्कि जीवन और मौत के बीच आखिरी पुल थी।
लातेहार जिले के चंदवा निवासी संजय पिछले 6-7 दिनों से गंभीर हालत में अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे थे। 65 प्रतिशत तक जल चुके संजय का इलाज रांची के देवकमल अस्पताल में चल रहा था, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि उनकी जान बचाने की एकमात्र उम्मीद बेहतर सुविधाओं वाले दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट करना है।
परिजनों ने तुरंत रेडबर्ड एयरवेज की एयर एंबुलेंस बुक की। कुल खर्च 8 लाख रुपये तय हुआ। परिवार ने किसी तरह 5.5 लाख रुपये एडवांस जमा कर दिए लेकिन उड़ान से ठीक पहले कंपनी ने शेष ढाई लाख रुपये की मांग करते हुए साफ कह दिया कि पूरी रकम के बिना एयर एंबुलेंस उड़ान नहीं भरेगी। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
एक तरफ संजय की बिगड़ती हालत दूसरी तरफ पैसों की व्यवस्था का असहनीय दबाव। हर सेकंड भारी होता जा रहा था। मजबूरी में परिजन गांव लौटे रिश्तेदारों और परिचितों के सामने हाथ फैलाए और किसी तरह ढाई लाख रुपये का इंतजाम किया। जब तक पैसे जुटे और वापस रांची पहुंचकर जमा किए गए तब तक जिंदगी की घड़ी काफी आगे बढ़ चुकी थी।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरहमी का प्रतीक बना

संजय के परिवार के लिए यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरहमी का प्रतीक बन गया। एक ऐसा सिस्टम, जहां इलाज की उम्मीद भी पैसों की शर्तों में बंधी होती है। जहां एक मरीज की सांसें भी बैंक बैलेंस से तय होती हैं। आज चंदवा का वह घर मातम में डूबा है जहां से एक बेटा पति और पिता जिंदगी की उम्मीद लेकर निकला था। लेकिन वह उम्मीद आसमान में ही बुझ गई। पीछे रह गया है सिर्फ एक सवाल अगर उड़ान वक्त पर भर जाती अगर पैसे की शर्त रास्ता न रोकती तो क्या संजय आज जिंदा होते?
्रह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस कठोर सच्चाई का आईना है, जहां जिंदगी और मौत के बीच सबसे बड़ी दीवार इंसानियत नहीं, बल्कि पैसा बन गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर एफआईआर भाजपा को पड़ेगी भारी: अजय राय

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संतों और धार्मिक गुरुओं के खिलाफ कार्रवाई कर भाजपा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का राजनीतिक नुकसान भाजपा को आने वाले समय में जरूर उठाना पड़ेगा।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए अजय राय ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार संवैधानिक संस्थाओं और धार्मिक परंपराओं को निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई संत या सामाजिक व्यक्ति सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार आलोचना सहन करने की स्थिति में नहीं है। अजय राय ने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनके सम्मान की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष की भावना से काम कर रही है और विरोध करने वालों को डराने और दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आम जनता में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ेगा और भाजपा की छवि को नुकसान होगा।

धर्मगुरूओं को नियंत्रित करने की कोशिश

अजय राय के मुताबिक भाजपा सरकार धार्मिक संस्थाओं का सम्मान करने के बजाय उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। राय ने आरोप लगाया कि सरकार प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक हितों को साधने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है और किसी भी व्यक्ति या संत के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवाद पैदा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है, लेकिन इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार विरोधियों पर कार्रवाई करने में व्यस्त है।

जनता सबकुछ देख रही है

अजय राय ने कहा कि प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी। उन्होंने दावा किया कि जनता अब भाजपा की नीतियों और कार्यशैली से निराश हो चुकी है और बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि संत समाज और आम जनता का अपमान भाजपा को राजनीतिक रूप से महंगा पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी। राय ने कहा कि कांग्रेस संत समाज और आम जनता के सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे का असर आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों पर पड़ सकता है। फिलहाल भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

मेरठ में दर्दनाक हादसा, 5 बच्चों समेत 6 लोगों की जलकर मौत

कपड़ा कारोबारी के घर में लगी भीषण आग से पसरा मातम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
मेरठ । उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक बेहद ही दुखद खबर सामने आई है। मेरठ में एक कप?ा कारोबारी के घर में भीषण आग लगने से उसके परिवार के 6 लोग जिंदा जल गए। मृतकों में जुड़वां बेटियों समेत 5 मासूम बच्चे शामिल हैं।
यूपी पुलिस ने बताया कि मेरठ जिले में सोमवार रात एक रिहायशी घर में आग लगने से पांच बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई। आग लगने पर घर के अंदर फंसने से दो महिलाएं और पांच बच्चे बुरी तरह झुलस गए। सभी घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान पांच बच्चों और एक महिला की बाद में मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि कारोबारी सोमवार की देर शाम नमाज प?ने गया था, तभी दो मंजिला मकान में भीषण आग लग गई। उस वक्त उसके घर में 2 महिलाएं और 5 बच्चे मौजूद थे। सभी आग की तेज लपटों में फंस गए। अधिकारियों के मुताबिक, बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर का इस्तेमाल कपड़ों के गोदाम के तौर पर किया जा रहा था। जबकि परिवार ऊपरी फ्लोर पर रहता था। मेरठ पुलिस ने बताया कि घटना के समय इकबाल नाम का एक रहने वाला अपने भाई के साथ शाम की नमाज के लिए बाहर गया था। जबकि दो औरतों और बच्चों को घर पर छोड़ गया था। पड़ोसियों ने घर से आग और धुआं निकलता देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस और फायर डिपार्टमेंट को बताया। फायरफाइटर्स और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने काफी कोशिश के बाद आग पर काबू पाया।

उदय भानु गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा 4 दिन की पुलिस कस्टडी में

एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पार कर शर्टलेस होकर किया था विरोध प्रदर्शन
इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष है उदय भानु चिब
राहुल गांधी ने चिब की गिरफ्तारी पर उठाये सवाल कहां यह तानाशाही का प्रमाण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली की सियासी हलचल के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को आ सुबह गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट मे पेश किया गया। पटियाला हाउस कोर्ट ने चिब को चार दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे एआई समिट के दौरान हुए विवादित प्रदर्शन को अदालत ने गंभीर मानते हुए दिल्ली पुलिस को विस्तृत पूछताछ की अनुमति दी है।
कोर्ट के इस फैसले ने न केवल कांग्रेस के युवा नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं बल्कि इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक विरोध, सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को लेकर नई बहस भी छेड़ दी है। अब आने वाले चार दिन इस मामले की दिशा और सियासी असर दोनों तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। राहुल गांधी ने चिब की गिरफ्तारी पर कड़ी प्रक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार पूरी तरह निरंकुश हो चुकी है। चिब की गिरफ्तारी तानाशाही का परिणाम हैं।

गिरफ्तार कर पेश किया गया अदालत में

भारतीय यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को आज दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया। इस दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से उदय भानु चिब की सात दिनों की पुलिस कस्टडी की मांग की। पुलिस की ओर से दलील दी गई कि चिब कथित साजिश में शामिल रहे हैं और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को सहायता मुहैया कराई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे जिनसे जुड़े तथ्यों की जांच के लिए आरोपी को विभिन्न स्थानों पर ले जाना आवश्यक है। इसी आधार पर विस्तृत पूछताछ के लिए सात दिन की कस्टडी की मांग की गई।

टी शर्ट बरामद करना चाहती है पुलिस

दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत को बताया कि चिब प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियों की मॉनिटरिंग कर रहे थे। उनका कहना था कि जो लोग मंडपम में पहुंचे थे, वे चिब के निर्देश पर गए थे और लगातार उनके संपर्क में थे। पुलिस के अनुसार, उस समय वहां बड़ी संख्या में विदेशी डेलीगेट मौजूद थे और इस घटनाक्रम से वैश्विक मंच पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। पुलिस ने तर्क दिया कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और एकता जैसे गंभीर मुद्दे प्रभावित हुए हैं। वहीं चिब के वकील ने पुलिस कस्टडी की मांग का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल ने हमेशा जांच में सहयोग किया है। वकील ने गिरफ्तारी को अनावश्यक बताते हुए कहा कि केवल टी-शर्ट की बरामदगी के लिए पुलिस कस्टडी की मांग करना हास्यास्पद है।

शांतिपूर्ण हो रहा था प्रदर्शन

चिब के वकील के मुताबिक प्रदर्शनकारी निहत्थे थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। बचाव पक्ष के अनुसार, सात-आठ टी-शर्ट पहले ही बरामद की जा चुकी हैं और टी-शर्ट कहीं भी छप सकती हैं, ऐसे में पूरी फैक्ट्री की जांच का तर्क बेबुनियाद है। दिल्ली पुलिस ने उदय भानु चिब को मंगलवार सुबह हिरासत में लिया था। इसके पहले उनसे पूछताछ की गई और उसके बाद औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।

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