1550 करोड़ का साइबर फ्रॉड बेनकाब, 2 करोड़ नकद, सोना-चांदी और हीरे बरामद

गुजरात में साइबर क्राइम की बड़ी कार्रवाई सामने आई है... जांच एजेंसियों ने 1550 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए सूरत...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सूरत, गुजरात का एक व्यस्त शहर है.. जहां हीरे का कारोबार दुनिया भर में मशहूर है.. वहां हाल ही में एक बहुत बड़ा साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है.. यह घोटाला करीब 1550 करोड़ रुपये का है.. जो देश के सबसे बड़े साइबर अपराधों में से एक माना जा रहा है.. सूरत पुलिस ने इस मामले में बड़ी सफलता हासिल की है.. और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है.. यह घोटाला न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है.. जिसमें क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया.. पुलिस की जांच से पता चला है कि यह रैकेट आम लोगों को ठगकर.. उनके पैसे को विदेश भेजने का काम कर रहा था..

जानकारी के मुताबिक यह सब मई 2025 में शुरू हुआ.. जब सूरत की उदना पुलिस स्टेशन की टीम एक रूटीन वाहन चेकिंग कर रही थी.. 22 मई को, पुलिस ने एक दोपहिया वाहन सवार से कुछ संदिग्ध बैंक दस्तावेज जब्त किए.. वह व्यक्ति रोहन नाम का था.. जो दस्तावेज डिलीवर कर रहा था.. इन दस्तावेजों की जांच से पुलिस को एक बड़े रैकेट का पता चला.. यह रैकेट साइबर फ्रॉड से कमाए पैसे को फर्जी बैंक खातों के जरिए सफेद करने का काम कर रहा था.. पुलिस ने तुरंत एक 11 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई.. जिसकी अगुवाई डीसीपी चिराग पटेल और इंस्पेक्टर एस एन देसाई ने की..

जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह घोटाला 1550 करोड़ रुपये से ज्यादा का है.. कुछ स्रोतों में इसे 2050 करोड़ तक बताया गया है.. लेकिन पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट में 1550 करोड़ का आंकड़ा प्रमुख है.. पुलिस ने 164 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की.. जिनमें से ज्यादातर फर्जी थे.. इन खातों के जरिए पूरे देश से साइबर फ्रॉड के पैसे ट्रांसफर किए जा रहे थे.. जांच में 2500 से ज्यादा साइबर फ्रॉड की शिकायतें जुड़ी.. जिनमें से 265 गुजरात से और 37 सूरत से थी.. वहीं यह शिकायतें फिशिंग, निवेश घोटाले, ओटीपी चोरी, फर्जी ट्रेडिंग टिप्स और डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकियों से जुड़ी थी..

यह रैकेट बहुत चालाकी से चलाया जा रहा था.. मुख्य तरीका यह था कि आम लोगों को लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते थे.. ये खाते ज्यादातर करंट अकाउंट्स थे.. जो फर्जी टेक्सटाइल फर्मों के नाम पर रजिस्टर किए जाते थे.. रैकेट के सदस्य ‘वसुंधरा फर्म’ नाम की एक फ्रंट ऑफिस का इस्तेमाल करते थे.. जहां से खाते खोले जाते थे.. बैंक अधिकारियों की मदद से ये खाते खोले जाते थे.. जो दस्तावेजों की कमी को नजरअंदाज कर देते थे.. हर खाते के लिए लोकल लोगों को 1 से 7 लाख रुपये दिए जाते थे.. साथ ही बड़े ट्रांजेक्शन पर कमीशन भी दिए जाते थे..

एक बार पैसा इन खातों में आता, तो उसे कैश में निकाला जाता.. फिर यह कैश हवाला के जरिए या सीधे क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता.. मुख्य रूप से USDT (Tether) नाम की क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल होता था.. जो स्थिर मूल्य वाली है और ट्रेस करना मुश्किल है.. यह पैसा विदेश भेजा जाता.. जहां से रैकेट के मास्टरमाइंड ऑपरेट करते थे.. कमांड टेलीग्राम ऐप के जरिए आते थे.. और अकाउंट डिटेल्स Razor X ऐप से मैनेज होते थे.. कमीशन भी USDT में दिए जाते थे..

इसमें बैंकर्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी.. RBL बैंक के तीन ब्रांचों के अधिकारी फर्जी दस्तावेजों पर खाते खोलते थे.. वे ‘फेक शॉप’ का दौरा करने की बजाय कमीशन लेते थे.. अन्य बैंक जैसे Axis, Kotak Mahindra और Yes बैंक के खाते भी इस्तेमाल हुए.. कुल 62 म्यूल अकाउंट्स RBL बैंक से ही खुले थे..

पुलिस ने इस मामले में अब तक 25 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है.. मुख्य आरोपी किरत जदवानी हैं.. जो एक फेल वेयरहाउस ऑपरेटर थे.. और कर्ज में डूबे होने के कारण इस रैकेट में शामिल हुए.. वे दिल्ली में विनीत प्रसाद से मिले और रैकेट शुरू किया.. हाल ही में, जनवरी 2026 में, पुलिस ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया.. ये लोग महीधरपुरा हीरा बाजार में ऑफिस चलाते थे.. जहां ब्लैक मनी को USDT में बदलते थे.. पुलिस ने उनके ऑफिस और घर से 1.92 करोड़ कैश, 4 नोट गिनने की मशीनें, 289 ग्राम सोना, 10.8 किलो चांदी.. और 413.37 कैरेट रफ डायमंड जब्त किए.. कुल जब्ती 2.60 करोड़ से ज्यादा की है..

पुलिस ने जांच में बहुत सारा सामान जब्त किया.. शुरुआती जांच में 2.5 करोड़ कैश, 20 मोबाइल, 7 लैपटॉप/पीसी जब्त हुए.. 1.30 करोड़ बैंक अकाउंट्स में फ्रीज किए गए.. किरत जदवानी के पास 40 तोला सोना, लग्जरी कारें.. और 1.5 करोड़ कैश मिला.. क्रिप्टो में 2 लाख USDT ट्रेस हुए..

 

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