क्या योगी को निपटाने पर तुली गुजरात लॉबी? शंकराचार्य के 40 दिन के अल्टीमेटम से बढ़ी सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद उस वक्त खड़ा हो गया जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी आदित्यनाथ को...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी और वैचारिक टकराव सामने आ गया है.. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों के भीतर.. गोमांस निर्यात पर रोक लगाने की खुली चुनौती ने सत्ता के गलियारों से लेकर संत समाज और विपक्ष तक हलचल मचा दी है.. वहीं यह चुनौती अब केवल धार्मिक आग्रह नहीं रह गई.. बल्कि इसे योगी की हिंदुत्व राजनीति की निर्णायक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है.. वहीं सवाल उठने लगे हैं कि क्या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है.. और क्या तथाकथित गुजरात लॉबी इस पूरे घटनाक्रम में भूमिका निभा रही है.. विपक्ष इसे योगी सरकार को घेरने का बड़ा अवसर बता रहा है.. जबकि समर्थकों का दावा है कि यह सरकार पर दबाव बनाने की सोची-समझी कोशिश है.. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या योगी आदित्यनाथ इस अग्निपरीक्षा में खरे उतरेंगे.. या यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को और उथल-पुथल कर देगा..
उत्तर प्रदेश में धार्मिक और राजनीतिक माहौल में एक बड़ा विवाद छिड़ा हुआ है… ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया है.. और उन्होंने कहा है कि अगर योगी जी सच में हिंदू भावनाओं के प्रति संवेदनशील हैं.. तो गोमांस (बीफ) का निर्यात तुरंत रोक दें.. और गाय को ‘राज्य माता’ या राष्ट्र माता का दर्जा दें.. यह बयान प्रयागराज के माघ मेले 2026 में हुए विवाद के बाद आया है.. जहां स्वामी जी को संगम स्नान करने में कथित रूप से बाधा मिली.. स्वामी जी का आरोप है कि उनकी छवि खराब करने की कोशिश मुख्यमंत्री के करीबियों द्वारा की जा रही है.. और भैंस मांस निर्यात के नाम पर गोवंश की हत्या हो रही है.. साथ ही कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में गुजरात लॉबी के योगी को निशाना बनाने की बात कही जा रही है..
आपको बता दें कि यह विवाद 18 जनवरी 2026 से शुरू हुआ.. जब मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में बैठकर त्रिवेणी संगम जा रहे थे.. माघ मेले के दौरान भारी भीड़ का हवाला देकर प्रशासन और पुलिस ने उन्हें पालकी से उतरने.. और पैदल जाने को कहा.. इससे विवाद बढ़ गया.. मेला प्रशासन का आरोप था कि स्वामी जी.. और उनके समर्थकों ने पोंटून ब्रिज पर बैरिकेड तोड़ा.. और घाट की ओर बढ़े, जिससे स्थिति बिगड़ सकती थी.. और पुलिस को संभालने में दिक्कत हुई.. स्वामी जी ने इसे धार्मिक अपमान बताया.. और उन्होंने कहा कि संतों के साथ दुर्व्यवहार हुआ.. और उनके धार्मिक अधिकारों पर हमला हुआ..
स्वामी जी ने 18 जनवरी से ही शंकराचार्य कैंप के बाहर धरना शुरू किया.. और उन्होंने 11 दिनों तक धरना दिया.. लेकिन कोई अधिकारी उन्हें स्नान कराने नहीं आया.. आखिरकार 28 जनवरी को वे बिना संगम स्नान किए भारी मन से मेला छोड़कर वाराणसी लौट गए.. उन्होंने कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है.. मैं अगले साल माघ मेले में जाऊंगा और सम्मान से स्नान करूंगा.. विवाद बढ़ने पर मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया.. और पूछा कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का पद कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं.. नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक पुराने केस का जिक्र था.. जिसमें कोर्ट ने कहा है कि अपील निपटने तक किसी को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नहीं बनाया जा सकता.. स्वामी जी ने नोटिस का जवाब दिया.. और कहा कि उन्होंने प्रमाण दे दिए हैं.. बाद में अन्य शंकराचार्यों ने भी उनका समर्थन किया..
ज्योतिष पीठ (जोशीमठ, उत्तराखंड) आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक है.. इस पीठ के शंकराचार्य पद पर लंबे समय से विवाद चल रहा है.. 2017 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूपानंद सरस्वती.. और वासुदेवानंद सरस्वती दोनों को शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया था.. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उनके गुरु स्वरूपानंद सरस्वती ने उत्तराधिकारी बनाया.. और 2022 में श्रृंगेरी पीठाधीश्वर ने उनका अभिषेक किया.. यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.. प्रशासन ने इसी आधार पर नोटिस जारी किया था.. स्वामी जी का कहना है कि उन्होंने प्रमाण दे दिए.. लेकिन अब योगी जी को हिंदू सिम्पेथाइजर होने का प्रमाण देना होगा..
आपको बता दें कि 30 जनवरी 2026 को वाराणसी के विद्यामठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी जी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला.. उन्होंने कहा कि हमारे प्रमाण-पत्र मांगे गए थे और हमने दिए.. अब आपको हिंदू सिम्पेथाइजर होने का सबूत देना होगा.. क्योंकि सनातनी समाज हिंदू होने का सबूत मांग रहा है.. हिंदू होना केवल भाषणों या भगवे तक सीमित नहीं है.. बल्कि इसकी असली कसौटी गो-सेवा और धर्म-रक्षा है.. हिंदू होने का पहला कदम गायों से प्यार है.. उन्होंने 40 दिनों में दो मुख्य मांगें रखीं.. पहली प्रदेश से गोमांस निर्यात पूरी तरह रोकें.. दूसरी, गाय को राष्ट्र माता या राज्य माता घोषित करें.. अगर ऐसा नहीं हुआ तो सनातनी समाज योगी को हिंदू सिम्पेथाइजर नहीं मानेगा.. और उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं.. तो 10-11 मार्च को लखनऊ में संत सम्मेलन होगा.. और आगे का फैसला लिया जाएगा..
स्वामी जी ने आरोप लगाया कि उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश मुख्यमंत्री के विश्वस्तों के जरिए की जा रही है.. और उन्होंने कहा कि क्या रामराज्य का स्वप्न गायों के खून से अर्जित विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा.. उन्होंने गोमांस निर्यात पर जोर देते हुए कहा कि भैंस मांस के नाम पर निर्यात होता है.. लेकिन बिना डीएनए जांच के गोवंश काटा जा रहा है.. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में भैंसों की संख्या के मुकाबले निर्यात ज्यादा है.. जो संदेह पैदा करता है.. उन्होंने मांग की कि स्लॉटरहाउस और कंटेनरों में वैज्ञानिक जांच अनिवार्य हो..
भारत में गोमांस (काउ बीफ) का निर्यात प्रतिबंधित है.. लेकिन भैंस मांस (काराबीफ) वैध है.. 2024-25 में भारत ने करीब 12.55 लाख मीट्रिक टन भैंस मांस निर्यात किया.. जिसकी कीमत लगभग 34,000 करोड़ रुपये थी.. मुख्य बाजार वियतनाम, मिस्र, मलेशिया, इराक और सऊदी अरब हैं.. उत्तर प्रदेश इस निर्यात में सबसे बड़ा राज्य है.. राज्य में भैंस आबादी के आधार पर 30% से ज्यादा.. और कुल मांस उत्पादन में 40% से अधिक हिस्सा है.. निर्यात मुख्य रूप से अलीगढ़, संभल, हापुड़, बरेली, उन्नाव जैसे जिलों से होता है.. स्वामी जी का आरोप है कि गोहत्या छिपाकर की जा रही है.. योगी सरकार गोहत्या पर सख्त कानून लागू करती है.. और गोरक्षा पर जोर देती है.. लेकिन निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है..
जानकारी के मुताबिक पुराने आरोप भी हैं कि यूपी में मांस निर्यात से जुड़े कई लोग बीजेपी से जुड़े हैं.. 2015 में बीजेपी विधायक संगीत सोम का अल दुआ फूड प्रोसेसिंग कंपनी से कनेक्शन सामने आया था.. जो भैंस-बकरी-भेड़ मांस निर्यात करती है.. और उन्होंने सफाई दी कि 2008 में इस्तीफा दे दिया था.. समाजवादी पार्टी के नेताओं ने 2026 में भी ऐसे आरोप लगाए हैं.. कुछ पुराने दावे हैं कि बीजेपी को मीट निर्यात कंपनियों से चंदा मिलता है.. लेकिन ये विवादित हैं और साबित नहीं हुए..



